OralHealth – दांतों की कैविटी और दर्द से राहत के लिए बताए गए पारंपरिक घरेलू उपाय
OralHealth – आज के समय में ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। दांतों में कीड़ा लगना, कैविटी बनना और अचानक उठने वाला तेज दर्द अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हर आयु वर्ग इससे प्रभावित हो रहा है। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सलीम जैदी ने हाल ही में अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दांतों की शुरुआती समस्याओं को लेकर कुछ पारंपरिक और घरेलू उपाय साझा किए हैं, जो सही समय पर अपनाए जाएं तो राहत दे सकते हैं।

दांतों में कीड़ा और कैविटी क्यों बनती है
विशेषज्ञों के अनुसार मुंह में मौजूद बैक्टीरिया जब अधिक शक्कर और स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों के संपर्क में आते हैं, तो वे एसिड उत्पन्न करने लगते हैं। यह एसिड दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। धीरे-धीरे दांतों में सड़न शुरू होती है, जो आगे चलकर खोखलेपन और दर्द का कारण बनती है। दांतों की नियमित और सही सफाई न होना भी एक बड़ी वजह मानी जाती है। यही कारण है कि दंत चिकित्सक दिन में दो बार ब्रश करने और मुंह की सफाई पर विशेष जोर देते हैं।
शुरुआती समस्या में कारगर घरेलू उपाय
डॉ. सलीम जैदी का कहना है कि ये उपाय दांतों की शुरुआती खराबी में राहत दे सकते हैं। यदि दांत में सड़न अधिक बढ़ चुकी हो या लगातार दर्द बना रहे, तो घरेलू उपायों के बजाय दंत चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
लौंग का तेल देता है त्वरित राहत
लौंग का तेल लंबे समय से दांतों के दर्द में उपयोग किया जाता रहा है। इसमें मौजूद यूजेनॉल नामक तत्व दर्द को शांत करने में सहायक होता है। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं। इसे रुई में लगाकर प्रभावित दांत पर रखा जा सकता है या गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला किया जा सकता है।
नमक वाले गुनगुने पानी से कुल्ला
नमक और पानी का घोल दांतों की देखभाल का सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक मिलाकर दिन में दो से तीन बार कुल्ला करने से दर्द में कमी, मुंह की दुर्गंध से राहत और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह तरीका चिकित्सकीय स्तर पर भी सुझाया जाता है।
लहसुन का उपयोग कैसे करें
लहसुन में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो दांतों में मौजूद कीटाणुओं पर असर डालते हैं। एक लहसुन की कली को कुचलकर प्रभावित दांत पर कुछ मिनट तक रखने से दर्द और संक्रमण में राहत मिल सकती है। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करने की सलाह दी जाती है।
नीम से मिल सकती है प्राकृतिक सुरक्षा
नीम को आयुर्वेद में दांतों के लिए लाभकारी माना गया है। इसमें मौजूद सक्रिय तत्व सड़न और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। नीम की दातुन चबाना, नीम के पत्तों के पानी से कुल्ला करना या नीम आधारित उत्पादों का उपयोग करना दांतों की सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है।
अंडे के छिलके से तैयार पेस्ट
अंडे के छिलके में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो दांतों की मजबूती के लिए जरूरी है। उबले और सुखाए गए अंडे के छिलके का बारीक पाउडर बनाकर उसमें बेकिंग सोडा और नारियल तेल मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट से नियमित ब्रश करने पर दांतों की सतह को मजबूती मिल सकती है और संवेदनशीलता में कमी आ सकती है।
कब जरूरी है डॉक्टर से संपर्क
घरेलू उपाय केवल शुरुआती लक्षणों में राहत दे सकते हैं। यदि दांत में लगातार दर्द, सूजन या पस की समस्या हो, तो बिना देर किए दंत चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। समय पर जांच से दांतों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
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