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PregnancyFitness – गर्भावस्था में जिम को लेकर भ्रम और सच्चाई

PregnancyFitness – गर्भावस्था के दौरान व्यायाम को लेकर लंबे समय से कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि इस अवधि में जिम जाना या कसरत करना मां और गर्भस्थ शिशु के लिए जोखिम भरा हो सकता है। यही वजह है कि कई महिलाएं गर्भधारण की जानकारी मिलते ही अपनी रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियां कम या बंद कर देती हैं। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। नियंत्रित और चिकित्सकीय सलाह के तहत किया गया व्यायाम गर्भावस्था में लाभकारी भी हो सकता है।

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विशेषज्ञ की राय क्या कहती है

नागपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वैदेही मराठे के अनुसार, गर्भावस्था कोई रोग नहीं बल्कि एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है। ऐसे में पूरी तरह निष्क्रिय रहना भी शरीर के लिए ठीक नहीं माना जाता। उनका कहना है कि यदि महिला की सेहत सामान्य है और डॉक्टर ने किसी प्रकार की विशेष सावधानी नहीं बताई है, तो हल्की और नियमित शारीरिक गतिविधि जारी रखी जा सकती है।

डॉ. मराठे बताती हैं कि सही तरीके से किया गया प्रीनेटल वर्कआउट कई स्तरों पर मददगार साबित होता है। इससे कमर और पीठ दर्द में कमी आती है, शरीर का संतुलन बेहतर होता है और थकान कम महसूस होती है। नियमित व्यायाम से ऊर्जा स्तर बनाए रखने में भी सहायता मिलती है।

व्यायाम के संभावित लाभ

चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हल्की कसरत से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं। इनमें शामिल हैं:

• मांसपेशियों की मजबूती और सहनशक्ति में वृद्धि
• स्वस्थ वजन बढ़ने में संतुलन
• रक्त संचार में सुधार
• प्रसव के दौरान शरीर की तैयारी
• प्रसव के बाद रिकवरी में आसानी

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि जो महिलाएं पहले से नियमित रूप से जिम या योग करती रही हैं, वे गर्भावस्था में भी संशोधित रूप में इसे जारी रख सकती हैं। हालांकि किसी भी नई गतिविधि को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

सावधानियां क्यों जरूरी हैं

हालांकि जिम को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं माना गया है, लेकिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से स्पष्ट अनुमति लेना जरूरी है। इसके बाद प्रशिक्षित और प्रमाणित प्रीनेटल ट्रेनर की निगरानी में ही अभ्यास करना चाहिए।

भारी वजन उठाने, तेज उछाल वाली गतिविधियों या अत्यधिक दबाव डालने वाले व्यायाम से बचना बेहतर है। सांस लेने की सही तकनीक, शरीर की मुद्रा और कोर स्थिरता पर ध्यान देना आवश्यक है। पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। यदि चक्कर, दर्द या अत्यधिक थकान महसूस हो तो तुरंत व्यायाम रोक देना चाहिए।

हर महिला की स्थिति अलग

डॉ. वैदेही मराठे इस बात पर जोर देती हैं कि हर गर्भावस्था की परिस्थितियां अलग होती हैं। किसी महिला के लिए जो गतिविधि सुरक्षित है, वही दूसरी के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं। उच्च रक्तचाप, गर्भाशय से जुड़ी जटिलताएं या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। इसलिए शरीर के संकेतों को समझना और अनावश्यक दबाव से बचना जरूरी है।

सोच में बदलाव की जरूरत

विशेषज्ञ मानते हैं कि समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। सही जानकारी और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ की गई हल्की कसरत मां और शिशु दोनों के लिए लाभकारी हो सकती है। लेकिन बिना सलाह के इंटरनेट या अन्य स्रोतों से देख कर नया वर्कआउट शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।

अंततः, गर्भावस्था में जिम जाना पूरी तरह गलत नहीं है, बशर्ते यह नियंत्रित, सीमित और विशेषज्ञ की निगरानी में हो। किसी भी निर्णय से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

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