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RecipeTips – खस्ता मठरी के लिए सही आटा गूंथने का तरीका

RecipeTips – होली का मौसम आते ही रसोई में हलचल बढ़ जाती है। घरों में तरह-तरह के पकवान बनने लगते हैं और सूखे स्नैक्स की तैयारी पहले से शुरू हो जाती है ताकि त्योहार के दिनों में मेहमानों की खातिरदारी में कोई कमी न रहे। गुजिया, नमकीन, पापड़ और चिप्स के बीच एक और पारंपरिक स्वाद है जो हर थाली में जगह बना लेता है—मठरी। चाय के साथ परोसी जाने वाली खस्ता मठरी का स्वाद अलग ही होता है। हालांकि इसे बनाना कठिन नहीं है, लेकिन सही टेक्सचर पाने के लिए आटा तैयार करने की विधि बेहद अहम मानी जाती है। अनुभवी शेफ बताते हैं कि छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो घर पर भी हलवाई जैसी कुरकुरी मठरी बनाई जा सकती है।

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मैदा के साथ इन चीजों का संतुलित मेल

केवल मैदा से मठरी बनाने पर वह पारंपरिक खस्ता बनावट नहीं आ पाती। बेहतर परिणाम के लिए मैदा में थोड़ी मात्रा में गेहूं का आटा मिलाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कप मैदा लें तो उसमें लगभग चौथाई कप गेहूं का आटा मिलाना संतुलित माना जाता है। इसके साथ एक छोटा चम्मच बारीक पिसी सूजी और उतनी ही मात्रा में बेसन मिलाने से कुरकुरापन बढ़ता है। मात्रा अधिक न रखें, क्योंकि ज्यादा डालने से स्वाद और बनावट दोनों प्रभावित हो सकते हैं। स्वाद में हल्की तीखापन लाने के लिए दरदरी कुटी काली मिर्च भी मिलाई जा सकती है। यह संयोजन मठरी को साधारण से अलग पहचान देता है।

मोयन की सही मात्रा क्यों है जरूरी

मठरी की परतदार और खस्ता बनावट काफी हद तक मोयन पर निर्भर करती है। अक्सर यही सवाल रहता है कि घी या तेल कितना डाला जाए। पाक विशेषज्ञों के अनुसार आटे की कुल मात्रा का लगभग पांचवां हिस्सा मोयन के रूप में रखा जा सकता है। यदि आप 200 ग्राम आटा ले रही हैं तो करीब 40 ग्राम घी पर्याप्त होता है। घर में नाप-तौल कप और चम्मच से करने वालों के लिए दो कप आटे में लगभग दो बड़े चम्मच घी मिलाना ठीक माना जाता है। घी को आटे में अच्छी तरह मिलाकर उसे हाथों से रगड़ें ताकि हर कण में चिकनाई समा जाए।

ऐसे परखें कि मोयन संतुलित है या नहीं

घी की मात्रा सही है या नहीं, इसे जांचने का आसान तरीका है। थोड़ा सा आटा लेकर उसे मुट्ठी में दबाएं। यदि दबाने पर वह आकार बनाए रखता है और बिखरता नहीं, तो समझिए मोयन ठीक है। अगर आटा टूटकर गिर जाए तो थोड़ा और घी मिलाने की जरूरत हो सकती है। यह छोटा सा परीक्षण मठरी की गुणवत्ता तय करने में मदद करता है।

आटा गूंथते समय किन बातों का रखें ध्यान

मठरी का आटा सामान्य रोटी के आटे की तरह नरम नहीं होना चाहिए। इसमें थोड़ा कड़ा पन जरूरी है, तभी तलने पर सही कुरकुरापन आएगा। पानी धीरे-धीरे मिलाएं और आटे को जोर से गूंथने के बजाय हल्के हाथों से दबाते और मिलाते हुए तैयार करें। यह तरीका परतदार बनावट लाने में सहायक माना जाता है।

विश्राम का समय भी है अहम

आटा तैयार होने के बाद उसे तुरंत बेलना सही नहीं है। सूजी और अन्य सामग्री को फूलने के लिए समय चाहिए। इसलिए आटे को ढककर कम से कम 10 से 15 मिनट तक अलग रख दें। इससे मिश्रण एकसार हो जाता है और बेलते समय दरारें नहीं पड़तीं।

त्योहारों पर बनने वाली मठरी में स्वाद के साथ परंपरा भी जुड़ी होती है। सही सामग्री, संतुलित मोयन और धैर्य से गूंथा गया आटा इस पारंपरिक स्नैक को खास बनाता है। थोड़ी सावधानी और अभ्यास से घर पर भी वैसी ही कुरकुरी मठरी तैयार की जा सकती है जैसी बाजार में मिलती है।

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