Regional Cuisine: बिना तेल-मसाले के बनता है यह सुपर-हेल्दी और मशहूर पकवान, जानें पनेस्का की वायरल रेसिपी
Regional Cuisine: झारखंड के ग्रामीण अंचलों में, खासकर ठंड के मौसम का आगमन होते ही, एक विशिष्ट और पारंपरिक पकवान को बनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस व्यंजन की सबसे खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए बाजार से कुछ भी विशेष लाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह साधारण चावल के दानों से ही अपनी पहचान बनाता है। स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रों के अनुसार, इस पकवान के नाम भी अलग-अलग हैं। झारखंड के कुछ हिस्सों में इसे खप्पर पीठा के नाम से जाना जाता है, जबकि अन्य जगहों पर यह पनेस्का या पनेष्का कहलाता है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में, इसी तरह की तैयारी को आटे का साट कह कर पुकारा जाता है। यह व्यंजन पूरी तरह से प्रकृति और सादगी पर आधारित है, क्योंकि इसे बनाने के लिए किसी भी तरह के तेल, मसाले, प्याज या लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता है। इसकी शुद्धता और पौष्टिकता ही इसे इतना खास बनाती है।

उत्तम गुणवत्ता वाले चावल का चयन
किसी भी पाककला (Regional Cuisine) में, उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। पनेस्का या खप्पर पीठा की तैयारी के लिए, आपको सर्वोत्तम अनाज के चयन पर विशेष ध्यान देना होगा। इस व्यंजन का आधार केवल चावल है, इसलिए चावल की किस्म, उसकी पुरानी या नई उपज पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि चावल की गुणवत्ता उच्च हो ताकि पीसने के बाद वह एक महीन और चिकना आटा दे सके। एक सही प्रकार का चावल ही आपके पनेस्का को वांछित कोमलता और स्वाद प्रदान कर सकता है।
चावल भिगोने की पारंपरिक विधि
परंपरागत रूप से, चावल को रात भर या कम से कम सात से आठ घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखा जाता है। चावल को भिगोने की यह प्रक्रिया न केवल उसे नरम करती है, बल्कि इसके स्टार्च को भी सक्रिय करती है, जिससे पीसने में आसानी होती है और आटा अधिक मुलायम बनता है। चावल को अच्छी तरह से भिगोने के बाद, इसे साफ पानी से धोना और फिर एक स्वच्छ कपड़े या तौलिए पर पंखे की हवा में सूखने के लिए फैला देना चाहिए। चावल को पूरी तरह से नहीं सुखाना है, बल्कि उसमें हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, जो पीसने की प्रक्रिया को आसान बना सके। यह नमी बैटर की बनावट के लिए महत्वपूर्ण होती है।
आटे को बारीक पीसने की प्रक्रिया
जब चावल सूखकर हल्की नमी की अवस्था में पहुँच जाए, तो अगला कदम इसे पीसकर महीन आटा तैयार करना होता है। पारंपरिक रूप से इसे सिलबट्टे पर पीसा जाता था, लेकिन आधुनिक घरों में अब मिक्सर ग्राइंडर का उपयोग किया जाता है। चावल को तब तक पीसना चाहिए जब तक कि वह पूरी तरह से एक महीन पाउडर, जिसे बोलचाल की भाषा में पिसे हुए पाउडर की निरंतरता कहा जाता है, न बन जाए। ध्यान रहे, आटे में कोई भी मोटा दाना नहीं रहना चाहिए, क्योंकि यह पनेस्का की वांछित कोमलता को प्रभावित कर सकता है।
आटे को भूनकर नमी हटाना
पीसे हुए चावल के आटे को और अधिक नरम बनाने और उसकी बन्धन क्षमता (binding capacity) को बढ़ाने के लिए, इसे सूखी कड़ाही में धीमी आँच पर हल्का भूनना आवश्यक है। इस चरण को आटे के लिए पूर्व-ताप उपचार कहा जाता है। इस प्रक्रिया में किसी भी तेल या घी का उपयोग नहीं किया जाता है। भूनने का मुख्य उद्देश्य आटे में मौजूद किसी भी शेष नमी को पूरी तरह से समाप्त करना है, जिससे पनेस्का बनाते समय बैटर की बनावट में सुधार हो। भूनने के बाद, आटे को एक महीन छलनी से छान लेना चाहिए, ताकि उसमें रह गई कोई भी गुठली या मोटे कण अलग हो जाएं।
पनेस्का के लिए आदर्श बैटर बनाना
छने हुए चावल के आटे में अब बैटर बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें गुनगुना गर्म पानी धीरे-धीरे मिलाना शुरू करें। पहले, एक मोटा बैटर तैयार करें ताकि आप आटे की स्थिरता को समझ सकें। इसके बाद, हाथ से आटे को लगभग चार से पाँच मिनट तक अच्छी तरह मसलना चाहिए। इस लोचदार बनावट की तैयारी से बैटर में हवा भर जाती है, जिससे पनेस्का हल्का और फूला हुआ बनता है। फिर, धीरे-धीरे पानी मिलाते हुए एक पतला और बहने वाला घोल (बैटर) तैयार करें। इस घोल को तैयार करने के बाद, इसे कम से कम बीस से पच्चीस मिनट तक ढककर विश्राम करने दें, जिसे बैटर के लिए विश्राम अवधि कहा जाता है। यह बैटर को अंतिम रूप से सेट होने में मदद करता है।
मिट्टी के खप्पर पर पकाने की सही तकनीक
पनेस्का (Regional Cuisine) को पकाने के लिए, मिट्टी का बर्तन जिसे खप्पर या खपरी कहा जाता है, का उपयोग करना ही सबसे प्रामाणिक तरीका है। सबसे पहले, खपरी को गैस पर चढ़ाकर उच्च ताप नियंत्रण पर रखें ताकि यह पूरी तरह से गर्म हो जाए। जब बर्तन पूरी तरह से गर्म हो जाए, तो आँच को तुरंत धीमी आँच (low flame) पर कर दें। अब तैयार किए गए पतले बैटर को एक बड़े चम्मच या डब्बू से खपरी के केंद्र में डालें। बैटर डालने के बाद, खपरी को ढक्कन से ढक दें और इसे दो से तीन मिनट तक धीरे-धीरे पकने दें। यह धीमी आँच पर भाप में पककर तैयार होता है। पक जाने के बाद, इसे सावधानी से उठाएँ। इस विधि से एक-एक करके सारे पनेस्का तैयार कर लें।
स्वाद का अनुभव: मीठा या नमकीन
पनेस्का या खप्पर पीठा का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसे आप अपनी इच्छा अनुसार मीठे और नमकीन दोनों रूपों में खा सकते हैं।
अगर आप मिठाई का अनुभव लेना चाहते हैं, तो दूध को गर्म करें और उसमें प्राकृतिक मिठास के लिए गुड़ (jaggery) मिलाकर एक मीठा घोल तैयार करें। इस मीठे दूध में गरमा गरम पनेस्का डुबोकर खाने का आनंद अद्भुत होता है। यह एक पारंपरिक मिठाई संलयन का उदाहरण है।
वहीं, नमकीन स्वाद पसंद करने वालों के लिए, यह दही या छाछ (मट्ठा) के साथ परोसा जा सकता है। दही या मट्ठे में, जीरा (cumin) और सूखी लाल मिर्च को हल्का भूनकर डालें, साथ ही सेंधा नमक (rock salt) या सामान्य नमक मिलाकर एक स्वादिष्ट और चटपटा नमकीन घोल तैयार करें। यह नमकीन मसालों का समामेलन पनेस्का के सादे स्वाद को एक नया आयाम देता है। इस प्रकार, खप्पर पीठा खाने वाले को दोनों तरह के स्वादों का लुफ्त उठाने का विकल्प मिलता है।



