Surya Grahan 2026 – खगोलीय घटना से जुड़ी वैज्ञानिक व्याख्या, धार्मिक मान्यता और समय-सीमा का पूरा विवरण
Surya Grahan 2026 – सूर्य ग्रहण को लेकर समाज में सदियों से जिज्ञासा, आस्था और वैज्ञानिक समझ साथ-साथ चलती रही है। खगोलीय दृष्टि से यह एक प्राकृतिक घटना है, जो तब घटित होती है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से अवरुद्ध हो जाता है। भारतीय परंपराओं में ग्रहण को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित रही हैं, जबकि आधुनिक विज्ञान इसे ग्रहों की नियमित गति का परिणाम मानता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—पूर्ण, आंशिक और वलयाकार। पूर्ण ग्रहण में सूर्य पूरी तरह ढक जाता है, आंशिक में केवल कुछ हिस्सा छिपता है, जबकि वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा सूर्य से थोड़ा छोटा दिखाई देता है और चारों ओर आग की अंगूठी जैसा दृश्य बनता है, जिसे सामान्य भाषा में “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है।

17 फरवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण
वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या पर 17 फरवरी को पड़ रहा है। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, यानी चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा और उसके किनारे चमकते हुए दिखाई देंगे। खगोलविदों के अनुसार, इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में होंगे, जिससे यह विशेष दृश्य निर्मित होगा। यह घटना खगोलीय अध्ययन और आकाश दर्शन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत में दृश्यता और भौगोलिक स्थिति
यह सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से से दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इसे मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन जैसे क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। चूँकि भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहाँ इससे जुड़े धार्मिक नियम, जैसे सूतक काल, भी लागू नहीं माने जाएंगे।
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की अवधि
भारतीय मानक समय के मुताबिक यह ग्रहण देर रात लगभग 3:26 बजे शुरू होगा और सुबह करीब 7:57 बजे समाप्त होगा। इस पूरे समय भारत में रात का वातावरण रहेगा, इसलिए आम लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे। खगोल विज्ञान संस्थानों के अनुसार, यह अवधि वैश्विक स्तर पर अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न रहेगी।
सूतक काल लागू होगा या नहीं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में सूर्य ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों पर रोक लगाई जाती है। हालाँकि, चूँकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा और दैनिक जीवन पर किसी प्रकार की धार्मिक पाबंदी नहीं रहेगी।
कुंभ राशि में ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में घटित होगा और धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित रहेगा। ज्योतिषविदों का मानना है कि ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन कुंभ राशि वालों पर इसका असर तुलनात्मक रूप से अधिक महसूस किया जा सकता है।
वर्ष 2026 में कितने सूर्य ग्रहण
खगोलीय कैलेंडर के अनुसार, 2026 में कुल दो सूर्य ग्रहण होंगे। पहला 17 फरवरी को वलयाकार और दूसरा 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। दोनों ही भारत में दृश्य नहीं होंगे, हालांकि विभिन्न देशों में इन्हें देखा जा सकेगा।
राशियों पर संभावित ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भले ही भारत में इसका धार्मिक असर मान्य न हो, लेकिन ग्रहों की स्थिति के आधार पर इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर माना जाता है। मेष राशि वालों के लिए यह समय करियर में प्रगति का संकेत दे सकता है। वृष राशि वालों को वित्तीय योजना बनाते समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। मिथुन राशि के जातकों को नई जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं। कर्क राशि वालों के लिए पारिवारिक मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। सिंह राशि वालों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। कन्या राशि के जातकों को स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। तुला राशि वालों को संबंधों में संतुलन बनाए रखना होगा। वृश्चिक राशि के लिए आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लेने की आवश्यकता है। धनु राशि के लिए शिक्षा और करियर में नए अवसर बन सकते हैं। मकर राशि वालों को धैर्य के साथ मेहनत जारी रखनी चाहिए। कुंभ राशि में बदलाव के संकेत दिख सकते हैं, जबकि मीन राशि वालों को मानसिक शांति बनाए रखने की सलाह दी जाती है।



