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Tortoise Ring Vastu Benefits: कछुए वाली अंगूठी से रातों-रात चमकेगी किस्मत और बरसेगा पैसा, बस पहनने से पहले जान लें ये कड़क नियम

Tortoise Ring Vastu Benefits: वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में कछुए को केवल एक जीव नहीं, बल्कि सौभाग्य का सबसे बड़ा संवाहक माना गया है। हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए (Vastu Shastra Tips) का पालन करना अनिवार्य होता है, और कछुए की अंगूठी इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा है। इसे धारण करने मात्र से न केवल व्यापार में दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की होती है, बल्कि व्यक्ति के भीतर एक गजब का आत्मविश्वास भी पैदा होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो कछुआ धैर्य और निरंतरता का प्रतीक है, जो हमें सिखाता है कि धीमी लेकिन स्थिर गति ही अंततः सफलता की ओर ले जाती है।

Tortoise Ring Vastu Benefits
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भगवान विष्णु और लक्ष्मी का मिलता है दोहरा आशीर्वाद

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान कूर्म अवतार यानी कछुए का रूप धारण किया था ताकि मंदराचल पर्वत को आधार मिल सके। चूंकि माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए (Religious Significance) को देखते हुए यह माना जाता है कि कछुए की पूजा या उसकी आकृति धारण करने से धन की देवी स्वयं प्रसन्न होती हैं। जो व्यक्ति इस अंगूठी को सही विधि से पहनता है, उसे नारायण और लक्ष्मी दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में कभी दरिद्रता का वास नहीं होता।

सफलता और स्थिरता का बेजोड़ मेल है यह अंगूठी

कछुआ अपनी धीमी चाल के बावजूद अपनी मंजिल तक जरूर पहुंचता है, ठीक वैसे ही यह अंगूठी व्यक्ति के जीवन में स्थिरता लेकर आती है। वास्तु के जानकारों का कहना है कि (Success Symbol) के रूप में कछुए को देखना शुभ फलदायी है क्योंकि यह जातक को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति प्रदान करता है। अगर आप अपने करियर या व्यवसाय में बार-बार उतार-चढ़ाव महसूस कर रहे हैं, तो यह कछुए की आकृति वाली अंगूठी आपके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है।

धातु का सही चुनाव है सबसे ज्यादा जरूरी

कछुए की अंगूठी का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही धातु में बनवाया जाए, अन्यथा इसके नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार (Silver Tortoise Ring) या पंचधातु से निर्मित अंगूठी पहनना सबसे श्रेष्ठ और मंगलकारी माना गया है। चांदी मन को शांति प्रदान करती है और शुक्र ग्रह को बल देती है, जिससे भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है। वहीं पंचधातु पांच तत्वों को संतुलित करने का काम करती है, जो शरीर के आभा मंडल को सकारात्मक बनाए रखने में सहायक होती है।

किस दिन और कैसे शुरू करें यह शुभ अनुष्ठान

किसी भी आध्यात्मिक वस्तु को धारण करने का एक निश्चित समय और मुहूर्त होता है जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कछुए की अंगूठी पहनने के लिए (Auspicious Day) के तौर पर शुक्रवार या शनिवार का दिन सबसे उत्तम चुना गया है। शुक्रवार जहां लक्ष्मी जी का दिन है, वहीं शनिवार न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। इन दिनों में अंगूठी पहनने से ग्रहों की स्थिति अनुकूल होने लगती है और भाग्य का साथ मिलना शुरू हो जाता है, जिससे अटके हुए काम भी गति पकड़ने लगते हैं।

शुद्धिकरण और प्राण प्रतिष्ठा की सटीक विधि

अंगूठी को बाजार से लाकर सीधे हाथ में पहन लेना उचित नहीं है, पहले इसे ऊर्जावान बनाना अत्यंत आवश्यक है। पहनने से पूर्व इसे कुछ समय के लिए गंगाजल या शुद्ध कच्चे दूध में डुबोकर रखें ताकि (Purification Ritual) संपन्न हो सके। शुद्धिकरण के पश्चात इसे धूप-दीप दिखाकर पूरी श्रद्धा के साथ अपने इष्ट देव का ध्यान करें। यह प्रक्रिया अंगूठी के भीतर छिपी हुई आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत कर देती है, जिससे पहनने वाले को इसका पूर्ण लाभ मिलता है।

मंत्र शक्ति और सही उंगली का चुनाव

अंगूठी को धारण करते समय सही उंगली का चुनाव करना विज्ञान और ज्योतिष दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसे हमेशा दाहिने हाथ की मध्यमा यानी मिडिल फिंगर में ही पहनना चाहिए और इस दौरान (Mantra Chanting) करते हुए ‘ॐ कुरुमा नमः’ का जाप करना चाहिए। मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से होता है, और कछुए की पीठ का कठोर हिस्सा भी शनि के प्रभाव को दर्शाता है। मंत्रों के प्रभाव से अंगूठी की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है और मानसिक एकाग्रता में सुधार होता है।

इन लोगों को भूलकर भी नहीं पहननी चाहिए यह अंगूठी

कछुए की अंगूठी हर किसी के लिए फायदेमंद साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है। जिन लोगों की जन्मपत्री में शनि या राहु की स्थिति दोषपूर्ण या प्रतिकूल हो, उन्हें (Astrological Advice) के बिना इसे धारण करने से बचना चाहिए। साथ ही, यह भी सुझाव दिया जाता है कि गर्भवती महिलाएं और बहुत छोटे बच्चों को इस तरह के भारी ऊर्जा वाले आभूषण नहीं पहनने चाहिए। किसी विशेषज्ञ से मशवरा लेकर ही इसे पहनना आपके भविष्य के लिए सुरक्षित रहता है।

सावधानियां: एक छोटी सी गलती और हो सकता है नुकसान

अंगूठी पहनने के बाद कुछ मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य है ताकि इसकी सात्विकता बनी रहे। इसे पहनकर कभी भी अनैतिक या गलत कार्यों में संलिप्त नहीं होना चाहिए और (Negative Energy) से बचने के लिए इसे कभी भी गंदे स्थान पर नहीं गिराना चाहिए। सोते समय इसे उतारकर किसी पवित्र स्थान या डिब्बी में रखना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि अंगूठी को उंगली में बार-बार घुमाना नहीं चाहिए, क्योंकि कछुए का मुख हमेशा आपकी ओर होना चाहिए ताकि धन का आगमन घर की तरफ बना रहे।

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