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Vastu Shastra Dressing Table: बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल की दिशा क्यों मानी जाती है जीवन को प्रभावित करने वाली

Vastu Shastra Dressing Table: ड्रेसिंग टेबल केवल सौंदर्य प्रसाधन रखने का फर्नीचर नहीं है, बल्कि भारतीय मान्यताओं और वास्तु शास्त्र में इसे व्यक्ति के निजी जीवन से जुड़ा अहम तत्व माना गया है। खास तौर पर महिलाओं के लिए यह स्थान रोज़मर्रा के श्रृंगार और आत्म-देखभाल से जुड़ा होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ड्रेसिंग टेबल की दिशा और उसका स्थान मनोवैज्ञानिक संतुलन, पारिवारिक सामंजस्य और वैवाहिक जीवन पर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए इसे बेडरूम में रखते समय कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।

बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल की दिशा क्यों मानी जाती है जीवन को प्रभावित करने वाली
बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल की दिशा क्यों मानी जाती है जीवन को प्रभावित करने वाली
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वास्तु के अनुसार ड्रेसिंग टेबल का महत्व

वास्तु शास्त्र में दर्पण को ऊर्जा का संवाहक माना गया है। माना जाता है कि दर्पण आसपास की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को प्रतिबिंबित करता है। चूंकि ड्रेसिंग टेबल में दर्पण लगा होता है, इसलिए उसकी स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के मन, रिश्तों और घरेलू वातावरण पर पड़ सकता है। गलत दिशा में रखा गया दर्पण तनाव, आपसी मतभेद और मानसिक असंतुलन को बढ़ा सकता है, जबकि सही स्थान पर रखा गया ड्रेसिंग टेबल शांति और संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

किन दिशाओं में ड्रेसिंग टेबल रखना माना जाता है उचित

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल को पूर्व, पश्चिम या उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इन दिशाओं को ऊर्जा के प्रवाह के लिए संतुलित माना गया है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर और पश्चिमोत्तर दिशा भी ड्रेसिंग टेबल के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

ऐसी मान्यता है कि इन दिशाओं में रखी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर श्रृंगार करने से मन शांत रहता है और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है। पति-पत्नी के बीच संवाद बेहतर होता है और अनावश्यक तनाव से बचाव होता है। कई वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि सही दिशा में रखा दर्पण आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।

किन दिशाओं से बचना जरूरी

वास्तु शास्त्र में कुछ दिशाओं को ड्रेसिंग टेबल के लिए अनुपयुक्त बताया गया है। दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा में ड्रेसिंग टेबल रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन दिशाओं में रखा गया दर्पण नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है।

विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में इस दिशा में दर्पण या ड्रेसिंग टेबल रखना संतुलन को बिगाड़ सकता है। कहा जाता है कि इससे घर में विवाद, चिड़चिड़ापन और अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण दिशा में रखी ड्रेसिंग टेबल पर बैठकर श्रृंगार करने से जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है और घर के शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। आर्थिक अस्थिरता की आशंका भी इससे जोड़ी जाती है।

ड्रेसिंग टेबल से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण नियम

ड्रेसिंग टेबल की दिशा के साथ-साथ उसके आकार और स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी माना जाता है। कोशिश की जानी चाहिए कि ड्रेसिंग टेबल का शीशा बहुत बड़ा न हो, क्योंकि बड़े दर्पण को अत्यधिक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, गोल आकार के दर्पण को छोड़कर अन्य आकृतियों का शीशा बेडरूम में लगाया जा सकता है। यदि दर्पण टूटा हुआ हो, दरारें पड़ी हों या किनारे नुकीले हों, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। ऐसे दर्पण को नकारात्मक प्रभाव से जोड़ा जाता है।

इसके अलावा, यह भी ध्यान रखा जाता है कि दर्पण में सोते समय बिस्तर का प्रतिबिंब न दिखाई दे। कई मान्यताओं में इसे मानसिक अशांति और नींद से जुड़ी समस्याओं का कारण बताया गया है।

संतुलन और समझदारी है सबसे जरूरी

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वास्तु शास्त्र पारंपरिक मान्यताओं और अनुभवों पर आधारित है। ड्रेसिंग टेबल की सही दिशा और स्थिति से जुड़े नियमों का उद्देश्य घर में संतुलन और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना माना जाता है। यदि घर में ड्रेसिंग टेबल रखी जा रही हो, तो दिशा, प्रकाश और स्थान का संतुलन समझदारी से करना बेहतर माना जाता है।

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