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Aircraft Safety – एयर इंडिया समेत कई एयरलाइनों के विमानों में तकनीकी खामियों पर सरकार की रिपोर्ट

Aviation safety monitoring update India – सरकार ने संसद में नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़ी एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया है कि देश की विभिन्न एयरलाइनों के विमानों में तकनीकी गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे अधिक समस्याएं एयर इंडिया के विमानों में दर्ज की गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया के हर दस विमानों में से लगभग सात विमानों में किसी न किसी स्तर की तकनीकी कमी पाई गई है। यह जानकारी हाल के महीनों में किए गए विश्लेषण और निगरानी के आधार पर सामने आई है।

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संसद में पेश किए गए आंकड़ों से क्या संकेत मिलते हैं

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि जनवरी 2025 से तीन फरवरी 2025 तक विभिन्न एयरलाइनों के विमानों में बार-बार तकनीकी गड़बड़ियों की जांच की गई। इस अवधि में कुल 377 विमानों में दोहराई जाने वाली तकनीकी समस्याओं की पहचान हुई। सरकार के अनुसार, इन मामलों में एयर इंडिया के विमानों की संख्या सबसे अधिक रही, जिससे परिचालन गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

एयर इंडिया के विमानों में सबसे अधिक तकनीकी समस्याएं

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिन 166 एयर इंडिया विमानों का विश्लेषण किया गया, उनमें से 137 विमानों में बार-बार तकनीकी खामी पाए जाने की बात सामने आई। यह अनुपात अन्य घरेलू एयरलाइनों की तुलना में अधिक है। इसके अलावा, एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों की जांच में 54 विमानों में दोहराई जाने वाली गड़बड़ियों का पता चला। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि एयर इंडिया समूह के विमानों में तकनीकी विश्वसनीयता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

इंडिगो और अन्य एयरलाइनों की स्थिति

देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन इंडिगो के 405 विमानों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 148 विमानों में बार-बार तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं। वहीं, स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 विमानों में इस तरह की गड़बड़ी पाई गई। अकासा एयर के संदर्भ में, जांच किए गए 32 विमानों में से 14 विमानों में तकनीकी खामी दोहराए जाने की पुष्टि हुई है। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि तकनीकी चुनौतियां केवल एक एयरलाइन तक सीमित नहीं हैं, हालांकि उनकी गंभीरता अलग-अलग है।

डीजीसीए की निगरानी और निरीक्षण प्रक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमानन सुरक्षा नियामक नागर विमानन महानिदेशालय ने अपनी निगरानी गतिविधियों को तेज रखा। मंत्री के अनुसार, डीजीसीए ने हालिया अवधि में 3,890 निगरानी निरीक्षण किए। इन निरीक्षणों में नियमित जांच, अचानक निरीक्षण और नियामक ऑडिट शामिल रहे, जिनका उद्देश्य विमानों और हवाई अड्डा संचालकों द्वारा नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है।

तकनीकी घटनाओं में बीते वर्षों में आई गिरावट

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबी अवधि में देखा जाए तो उड़ानों के दौरान तकनीकी गड़बड़ी के मामलों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में ऐसे कुल 421 मामले सामने आए, जबकि इससे पहले वर्ष में यह संख्या 448 थी। मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष तकनीकी गड़बड़ियों की संख्या घटकर 353 रह गई, जो निगरानी तंत्र और सुधारात्मक कदमों का परिणाम मानी जा रही है।

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

डीजीसीए के पास एक व्यवस्थित सुरक्षा निगरानी तंत्र मौजूद है, जिसके तहत किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर संबंधित एयरलाइन से स्पष्टीकरण मांगा जाता है। जरूरत पड़ने पर प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं। मंत्री ने कहा कि यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन या गैर-अनुपालन पाया जाता है, तो डीजीसीए द्वारा प्रवर्तन कार्रवाई भी की जाती है।

सभी घटनाओं की रिपोर्टिंग अनिवार्य

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि डीजीसीए ने एक परिपत्र जारी किया है, जिसके तहत एयरलाइनों के लिए सभी तकनीकी घटनाओं की रिपोर्ट नियामक को देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य समय रहते जोखिमों की पहचान करना और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

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