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Assam Police Attack Case: क्या असम के लखीमपुर में कानून को चुनौती दे रही है उन्मादी भीड़…

Assam Police Attack Case: असम के लखीमपुर जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पुलिस की एक टीम पर उस वक्त जानलेवा हमला किया गया, जब वे एक आतंकी समर्थक आरोपी को पकड़ने गई थी। इस हिंसक (Criminal Conspiracy) के पीछे बांग्लादेशी मूल के लोगों का हाथ बताया जा रहा है, जिन्होंने न केवल पुलिसकर्मियों को बेरहमी से पीटा बल्कि आरोपी को उनके कब्जे से जबरन छुड़ा भी लिया। सोमवार को कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस मामले में 10 मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

Assam Police Attack Case
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सोशल मीडिया पर आतंक की पैरवी और पुलिस की दबिश

यह पूरा विवाद 27 दिसंबर को उस वक्त शुरू हुआ जब पुलिस को बहारुल इस्लाम नामक युवक की सटीक लोकेशन मिली। बहारुल पर आरोप है कि उसने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के समर्थन में (Social Media Monitoring) से बचने के लिए फर्जी अकाउंट्स का सहारा लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। इन पोस्ट्स में उसने खुलेआम आतंकी हमले की तारीफ की थी और नफरत फैलाने की कोशिश की थी। खुफिया जानकारी के आधार पर जब पुलिस टीम बोंगालमोरा के सोनापुर इलाके में उसे दबोचने पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था।

भीड़ का हिंसक रूप और पुलिसकर्मियों की जान पर बन आई

जैसे ही पुलिस ने बहारुल इस्लाम को हिरासत में लेकर अपनी गाड़ी की ओर बढ़ना शुरू किया, अचानक 10 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ ने टीम को घेर लिया। लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस इस (Mob Violence) ने कानून का रत्ती भर भी सम्मान नहीं किया। भीड़ ने सब-इंस्पेक्टर गोकुल जॉयश्री और पुलिस वाहन के चालक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले का मुख्य उद्देश्य किसी भी कीमत पर बहारुल को पुलिस की गिरफ्त से आजाद कराना था, जिसमें वे अस्थायी रूप से सफल भी रहे और आरोपी को छुड़ाकर ले भागे।

सुनियोजित साजिश का खुलासा और एसएसपी का बयान

लखीमपुर के एसएसपी गुनेन्द्र डेका ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इसे एक सामान्य झड़प नहीं बल्कि एक गहरी साजिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि आतंकी हमले के बाद कई संदिग्ध लोग (National Security) के लिए खतरा बने हुए थे और बहारुल उनमें से एक प्रमुख नाम था। एसएसपी के मुताबिक, अताबुर रहमान नामक व्यक्ति ने इस पूरी भीड़ का नेतृत्व किया और पुलिस टीम पर हमले की योजना बनाई। यह हमला इतनी तेजी और तालमेल के साथ किया गया कि पुलिस टीम को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

घायल जांबाजों की हालत और कानूनी कार्रवाई

इस हिंसक झड़प में सब-इंस्पेक्टर गोकुल जॉयश्री और ड्राइवर को गंभीर चोटें आई हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता यानी (BNS Sections) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। खाकी पर हाथ उठाने वालों को यह कड़ा संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि किसी भी सूरत में अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने हमलावरों की पहचान कर उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगालना शुरू कर दिया है।

गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली और पुराना आपराधिक इतिहास

पुलिस ने जिन 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें अताबुर रहमान, अफाजुद्दीन, इकरामुल हुसैन और बिलाल हुसैन जैसे नाम शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इन (Arrested Suspects) में से कई लोग पहले भी विभिन्न अपराधों में लिप्त रहे हैं। फरार आरोपी बहारुल इस्लाम के बारे में यह चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि वह पहले भी फर्जी सोने की तस्करी के एक मामले में पकड़ा जा चुका था। इन लोगों का संगठित होकर पुलिस पर हमला करना इलाके में बड़े अपराधी गठजोड़ की ओर इशारा करता है।

बहारुल इस्लाम फिर से अंडरग्राउंड और तलाश जारी

भीड़ द्वारा छुड़ाए जाने के बाद आतंकी समर्थक बहारुल इस्लाम एक बार फिर अंडरग्राउंड हो गया है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई (Police Raid) अभियान तेज कर दिए हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। एसएसपी डेका ने भरोसा दिलाया है कि आरोपी ज्यादा दिनों तक कानून की नजरों से बच नहीं पाएगा। पुलिस अब उन लोगों पर भी नजर रख रही है जिन्होंने बहारुल को छिपने के लिए जगह मुहैया कराई है या इस पूरी घटना में पर्दे के पीछे से मदद की है।

इलाके में सुरक्षा कड़ी और बढ़ा हुआ तनाव

लखीमपुर के बोंगालमोरा और सोनापुर इलाकों में इस घटना के बाद से ही भारी तनाव व्याप्त है। स्थानीय निवासियों के मन में असुरक्षा की भावना को देखते हुए पुलिस ने (Public Safety) सुनिश्चित करने के लिए फ्लैग मार्च निकाला है और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वाले या नफरत भरे कंटेंट साझा करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार भी इस मामले की पल-पल की रिपोर्ट ले रही है।

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