Congress Party News: कांग्रेस के भीतर सुलझा शशि थरूर की नाराजगी का विवाद, राहुल और खरगे के साथ बैठक के बाद दिखा नया उत्साह
Congress Party News: पिछले काफी समय से कांग्रेस नेतृत्व से दूरी बनाए रखने वाले वरिष्ठ नेता शशि थरूर के तेवर अब नरम पड़ गए हैं। हफ्तों से जारी कयासों और पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव के बीच, गुरुवार को थरूर ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लिया। संसद भवन परिसर में करीब दो घंटे तक चली इस सियासी चर्चा में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे। माना जा रहा है कि केरल विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के लिए यह बैठक एकजुटता दिखाने का एक बड़ा प्रयास है, ताकि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी की गुंजाइश न रहे।

बंद कमरे में हुई दो घंटे की गंभीर सियासी मंत्रणा
यह बहुप्रतीक्षित मुलाकात गुरुवार दोपहर मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में संपन्न हुई। इस बैठक की खास बात यह रही कि इसमें केवल खरगे, राहुल गांधी और थरूर ही शामिल थे, जबकि संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल उपस्थित नहीं रहे। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि वेणुगोपाल ने इस संवाद की रूपरेखा तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। बैठक के बाद शशि थरूर के हाव-भाव काफी बदले हुए थे। उन्होंने चर्चा को ‘अत्यंत सकारात्मक’ करार देते हुए कहा कि एक जीवंत राजनीतिक दल में जिस तरह के रचनात्मक और सौहार्दपूर्ण संवाद की जरूरत होती है, वैसी ही बातचीत यहां हुई।
मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर शशि थरूर का बड़ा स्पष्टीकरण
लंबे समय से यह चर्चा आम थी कि शशि थरूर केरल में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनना चाहते हैं और इसी वजह से वे पार्टी आलाकमान से असहज चल रहे हैं। लेकिन इस बैठक के बाद उन्होंने इन अटकलों पर विराम लगा दिया। थरूर ने दो टूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी का फिलहाल कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि वे तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं और संसद में अपने क्षेत्र की आवाज उठाना ही उनकी प्राथमिकता है। थरूर ने जोर देकर कहा कि वे और उनके वरिष्ठ नेता एक ही टीम का हिस्सा हैं और सभी मिलकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
नाराजगी की वजह और कोच्चि की रैली का वह कड़वा अनुभव
जानकारों का मानना है कि थरूर पिछले कुछ समय से पार्टी में अपनी उपेक्षा महसूस कर रहे थे। चार बार के सांसद और कार्यसमिति सदस्य होने के बावजूद, उन्हें लगा कि सांगठनिक फैसलों और राज्य की राजनीति में उन्हें वह महत्व नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं। विशेष रूप से 19 जनवरी को कोच्चि में आयोजित ‘महा पंचायत’ रैली के दौरान राहुल गांधी द्वारा मंच पर थरूर का नाम न लिया जाना, उनके लिए काफी आहत करने वाला रहा। इसके अलावा, विदेश नीति पर थरूर के निजी बयानों और आधिकारिक बैठकों से उनकी अनुपस्थिति ने भी पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी दूरियां बढ़ा दी थीं।
मल्लिकार्जुन खरगे की मध्यस्थता और एकता का संकल्प
गुरुवार की इस विशेष बैठक में खरगे ने एक कुशल मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने दोनों पक्षों की बातों को गहराई से सुना और असंतोष के बिंदुओं को सुलझाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने थरूर को भरोसा दिलाया कि पार्टी में उनका कद और अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है। राहुल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केरल में एक दशक बाद सत्ता में वापसी के लिए सभी वरिष्ठ नेताओं का साथ आना अनिवार्य है। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी थरूर को विश्वास में लेते हुए भविष्य में मिलकर काम करने का रोडमैप साझा किया।
सोशल मीडिया पर साझा की एकजुटता की मुस्कुराती तस्वीर
बैठक खत्म होने के तुरंत बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संतुष्टि जाहिर की। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ एक तस्वीर साझा की, जिसमें तीनों नेता मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। थरूर ने अपनी पोस्ट में दोनों नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि वे विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा से पूरी तरह संतुष्ट हैं और देश की सेवा के लिए एकजुट होकर काम करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। कांग्रेस के इस आंतरिक सुलह से पार्टी कार्यकर्ताओं में भी यह संदेश गया है कि चुनावी रण में उतरने से पहले नेतृत्व अपनी कमियों को दूर करने के लिए गंभीर है।



