CyberCrime – दबोचा गया अंगूठे के क्लोन के इस्तेमाल से सबको चूना लगाने वाला मास्टरमाइंड
CyberCrime – अंगूठे के क्लोन तैयार कर बैंकिंग कॉरेसपोंडेंट बनकर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने सोमवार रात गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। करीब तीन वर्ष पहले दर्ज हुए 5.80 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम आरोपी तक पहुंची। गिरफ्तार शख्स पर कानपुर और फतेहपुर जिलों में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से बड़ी संख्या में फिंगरप्रिंट क्लोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

पुराने मामले की जांच से खुला नेटवर्क
हाथरस जिले के रतनगढ़ी निवासी रामनिवास ने सितंबर 2023 में साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक सितंबर 2022 से 13 मार्च 2023 के बीच उनके बैंक खाते से 5.80 लाख रुपये अज्ञात व्यक्ति द्वारा निकाले गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की।
एसपी देहात और साइबर क्राइम प्रभारी अमृत जैन के मुताबिक, इस प्रकरण में पहले ही सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। हालांकि जांच जारी थी, क्योंकि पुलिस को आशंका थी कि इसके पीछे संगठित गिरोह काम कर रहा है। लगातार तकनीकी साक्ष्य जुटाने और डिजिटल ट्रैकिंग के बाद टीम को मुख्य सरगना तक पहुंचने में सफलता मिली।
गुरुग्राम में दबिश, भारी मात्रा में सामान बरामद
सीओ सर्जना सिंह के नेतृत्व में इंस्पेक्टर बीडी पांडेय की टीम ने फतेहपुर जिले के जाफरगंज थाना क्षेत्र के सगरा गांव निवासी शिवम कुमार को गुरुग्राम के खेड़की दौला क्षेत्र स्थित भंगरोला से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वही गिरोह का सरगना है।
गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से 689 फिंगरप्रिंट क्लोन, छह मोबाइल फोन, दो एसएसडी, 13 सिम कार्ड, दो बायोमैट्रिक मशीन और एक एचपी लैपटॉप बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पर गैंगस्टर एक्ट सहित चार मुकदमे दर्ज हैं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से लंबे समय से सक्रिय था।
यू-ट्यूब से सीखी तकनीक, सस्ती मशीन से बना नेटवर्क
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने अंगूठे का क्लोन तैयार करने और आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिये रकम निकालने की तकनीक ऑनलाइन वीडियो देखकर सीखी। इसके लिए उसने करीब 14 हजार रुपये में रबर स्टांप बनाने वाली मशीन खरीदी।
बताया गया कि मशीन में विशेष केमिकल का उपयोग कर वह किसी व्यक्ति के अंगूठे की नकल तैयार करता था। यह काम देखने में साधारण लगता था, लेकिन तकनीकी समझ और डिजिटल डेटा के दुरुपयोग ने इसे खतरनाक बना दिया।
राजस्व वेबसाइट से हासिल करते थे निजी जानकारी
जांच में सामने आया कि गिरोह राजस्व विभाग की वेबसाइट से जमीन संबंधी दस्तावेजों का पीडीएफ डाउनलोड करता था। इन दस्तावेजों में उपलब्ध आधार नंबर और फिंगरप्रिंट की जानकारी का दुरुपयोग कर क्लोन तैयार किए जाते थे।
इसके बाद बायोमैट्रिक मशीन में नकली अंगूठा लगाकर आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिये पीड़ित के खाते से रकम अपने बैंकिंग कॉरेसपोंडेंट वॉलेट में ट्रांसफर कर ली जाती थी। फिर यह राशि जनसेवा केंद्रों के माध्यम से नकद निकाली जाती थी।
करोड़ों की ठगी का अंदेशा
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने विभिन्न खातों से अब तक करीब 35 लाख रुपये निकालने की बात स्वीकार की है। हालांकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह आंकड़ा 50 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच के बाद ही वास्तविक रकम का खुलासा हो पाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य राज्यों में भी कनेक्शन की जांच की जा रही है। साइबर क्राइम से जुड़े इस तरह के मामलों में नागरिकों को अपने दस्तावेजों और बायोमैट्रिक जानकारी की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।



