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Delhi Air Pollution Crisis: दिल्ली की हवा ने फिर ओढ़ी मौत जैसी सफेद चादर, अब केवल कुदरत ही बचा सकती है सांसें

Delhi Air Pollution Crisis: देश की राजधानी दिल्ली में रहने वालों के लिए आज की सुबह किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। आसमान में सूरज की रोशनी को चीरकर निकलने वाली किरणों के बजाय चारों तरफ (Toxic Smog Layer) छाई हुई है, जिसने पूरी दिल्ली को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। हालांकि कल के मुकाबले आज हवा में मामूली सुधार की बातें कही जा रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि औसत वायु गुणवत्ता अब भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है, जो बुजुर्गों और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

Delhi Air Pollution Crisis
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जब हवा बन गई जहर और सूचकांक हुआ पार

आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई, जो इस सीजन का (Severe Air Quality Index) पार करने वाला सातवां दिन था। जब एक्यूआई 400 के ऊपर चला जाता है, तो स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। दिल्ली के कई इलाकों में तो स्थिति इतनी भयावह है कि वहां कदम रखते ही आंखों में जलन और गले में खराश महसूस होने लगती है।

दिल्ली एनसीआर के इलाकों का खौफनाक रिपोर्ट कार्ड

अगर हम सुबह 8 बजे तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मुंडका 385 और विवेक विहार 377 के साथ सबसे प्रदूषित इलाकों में शुमार हैं। जहांगीरपुरी, वजीरपुर और चांदनी चौक जैसे क्षेत्रों में भी (Polluted Air Zones) का स्तर बेहद चिंताजनक बना हुआ है। द्वारका और आनंद विहार जैसे पॉश और व्यस्त इलाकों में भी हवा का स्तर 370 के पार है। नोएडा और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी शहरों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है, वहां भी लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।

धीमी पड़ती हवा की रफ्तार और प्रदूषण का जाल

वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले तीन-चार दिनों तक दिल्लीवासियों को इस दमघोंटू हवा से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। कोहरे और धुएं के मिलने से बनी इस मोटी परत के पीछे (Slow Wind Speed) एक बड़ा कारण है। हवा की गति इतनी धीमी है कि जहरीले प्रदूषक कणों का बिखराव नहीं हो पा रहा है। 14 अक्टूबर के बाद से दिल्ली की हवा लगातार ‘खराब’ से ‘गंभीर’ के बीच झूल रही है, जो एक लंबी पर्यावरणीय त्रासदी का संकेत है।

24 घंटे में बिगड़े हालात और केंद्रीय बोर्ड की चेतावनी

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली का औसत सूचकांक 412 दर्ज किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि सोमवार को यह 373 पर था, यानी महज एक दिन के भीतर (Daily AQI Trends) में 39 अंकों की भारी बढ़ोतरी हुई। दिल्ली के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे नेहरू नगर और ओखला फेज-2 में तो शाम होते-होते सूचकांक 450 के पार चला गया, जिसे ‘अति गंभीर’ श्रेणी माना जाता है।

मानकों की धज्जियां और स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार

वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 का स्तर 60 से नीचे होना चाहिए ताकि वह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित रहे। लेकिन दिल्ली की वर्तमान स्थिति में (PM 2.5 Concentration) का स्तर 228.6 तक पहुंच गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली के निवासी सुरक्षित मानकों से साढ़े तीन गुना ज्यादा प्रदूषित हवा अपने फेफड़ों में भर रहे हैं। यह स्थिति न केवल फेफड़ों बल्कि दिल की बीमारियों के खतरे को भी कई गुना बढ़ा देती है।

ग्रैप के सख्त नियमों के बाद भी बेअसर पाबंदियां

दिल्ली में प्रदूषण के इस तांडव को देखते हुए प्रशासन ने 13 दिसंबर से ही ग्रैप-3 और ग्रैप-4 के कड़े प्रावधान लागू कर दिए थे। निर्माण कार्यों से लेकर भारी वाहनों के प्रवेश तक पर (Environmental Policy Restrictions) लगाई गई हैं। इसके बावजूद धरातल पर प्रदूषण की स्थिति में कोई खास कमी नहीं देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पाबंदियों से काम नहीं चलेगा, जब तक कि कुदरत खुद मेहरबान न हो जाए।

अब केवल बारिश और तेज हवा ही आखिरी उम्मीद

मौजूदा मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा लगता है कि अब केवल कोई बड़ी प्राकृतिक घटना ही दिल्ली को इस संकट से निकाल सकती है। या तो भारी बारिश हो जो इन प्रदूषक कणों को जमीन पर बैठा दे, या फिर (Weather Patterns Change) के कारण तेज हवाएं चलें जो इस धुंध की चादर को उड़ा ले जाएं। फिलहाल मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है, जिसका मतलब है कि दिल्ली को अभी कुछ और दिन इस जहरीले धुएं के साये में ही बिताने होंगे

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