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Digital Transformation in Judiciary: सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों को दी डिजिटल कवच धारण करने की चेतावनी, न्याय की दहलीज पर पहुंची तकनीक…

Digital Transformation in Judiciary: हिसार की बार एसोसिएशन में आयोजित सम्मान समारोह में जब देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो गया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने संबोधन की शुरुआत अपनी जड़ों को याद करते हुए की, जहां उन्होंने पेतवाड़ गांव से अपनी प्रारंभिक शिक्षा और फिर इसी हिसार की अदालतों में वकालत के शुरुआती गुर सीखे थे। उन्होंने बड़े ही भावनात्मक अंदाज में कहा कि (Professional Career Growth) के इस ऊंचे मुकाम पर पहुंचने के बाद भी हिसार से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बार एसोसिएशन से मिला स्नेह और मार्गदर्शन उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसने उन्हें आज इस प्रतिष्ठित पद तक पहुंचाया है।

Digital Transformation in Judiciary
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अपराधों का बदलता चेहरा और न्याय की नई चुनौतियां

आज के समय में अपराध करने के तरीके पहले जैसे नहीं रहे, बल्कि वे अधिक जटिल और अदृश्य हो गए हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने आगाह किया कि जिस गति से समाज बदल रहा है, उसी गति से (Evolution of Criminal Activities) भी न्यायिक प्रणाली के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर रही है। अब अपराधी हथियारों के बजाय कोड और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में यदि कानूनी पेशेवर खुद को समय के साथ नहीं बदलते, तो न्याय की प्रक्रिया पीछे छूट सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक वकीलों को केवल पुराने कानूनों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि उभरती वैश्विक चुनौतियों को समझने के लिए निरंतर अध्ययन करते रहना चाहिए।

डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के विरुद्ध वकीलों की भूमिका

मुख्य न्यायाधीश ने समाज में तेजी से फैल रहे डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे घोटालों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि (Cyber Crime Investigation Knowledge) आज के दौर के अधिवक्ताओं के लिए अनिवार्य हो गई है क्योंकि अब साक्ष्य फाइलों के बजाय सर्वर और क्लाउड में छिपे होते हैं। जब तक एक वकील को तकनीक की बुनियादी समझ नहीं होगी, वह डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण नहीं कर पाएगा और न ही अदालत में अपने मुवक्किल का पक्ष मजबूती से रख पाएगा। उन्होंने वकीलों से आग्रह किया कि वे इन डिजिटल अपराधों की बारीकियों को समझें ताकि निर्दोषों को न्याय दिलाया जा सके।

आधुनिक लाइब्रेरी और ई-संसाधनों का महत्व

न्याय की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सीजेआई ने बुनियादी ढांचे में बदलाव की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि युवा वकीलों को विशेष रूप से (Legal Research Digital Tools) का अधिकतम उपयोग करना चाहिए ताकि वे वैश्विक स्तर के कानूनी मिसालों तक पहुंच बना सकें। ई-पुस्तकालय और डिजिटल डेटाबेस न केवल वकीलों का समय बचाते हैं, बल्कि बहस के दौरान तर्कों में सटीकता और गहराई भी लाते हैं। तकनीक से लैस होने का अर्थ केवल कंप्यूटर चलाना नहीं, बल्कि सूचनाओं के विशाल भंडार का सही उपयोग करके न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है।

युवा अधिवक्ताओं के लिए सफलता का मूल मंत्र

हिसार के न्यायिक परिसर में मौजूद युवा चेहरों को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने निरंतर सीखने की ललक बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वकालत का पेशा (Modern Legal Practice Ethics) और समर्पण की मांग करता है, जहां हर रोज एक नया अध्याय जुड़ता है। एक सफल वकील वही है जो तकनीक के प्रति अपनी हिचकिचाहट को खत्म करे और खुद को डिजिटल रूप से अपडेट रखे। उन्होंने बार और बेंच के बीच के सामंजस्य को रेखांकित करते हुए कहा कि जब वकील तकनीक में सक्षम होंगे, तभी न्यायपालिका भी तेजी से कार्य कर पाएगी और आम जनता का विश्वास कानून पर और अधिक मजबूत होगा।

तकनीक और कानून का संगम ही है भविष्य की चाबी

सीजेआई के संबोधन का निचोड़ यह था कि आने वाले समय में केवल वही वकील सफल होंगे जो अपनी कानूनी विद्वत्ता को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से (Judicial Efficiency Enhancement) के लिए वकीलों को ई-रिसोर्सेज अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। बदलते परिवेश में साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्ष्य कानून का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत के अनुसार, यदि वकील और न्यायिक अधिकारी कंधे से कंधा मिलाकर नई चुनौतियों का सामना करते हैं, तो भारत की न्याय प्रणाली दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकती है।

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