ECISIR – जल्द शुरू होगा मतदाता सूची संशोधन का तीसरा चरण
ECISIR – देश में मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने एक और अहम कदम उठाया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तीसरे चरण की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोग ने शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर संकेत दिया है कि यह चरण अप्रैल 2026 से शुरू हो सकता है। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

पहले दो चरणों का अनुभव
मतदाता सूची की यह व्यापक समीक्षा चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। पहला चरण बिहार में लागू हुआ था। इसके बाद 27 अक्टूबर 2025 को दूसरे चरण की घोषणा की गई, जिसमें 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। इन दोनों चरणों में मिलाकर लगभग 60 करोड़ मतदाताओं का डेटा जांच और अद्यतन की प्रक्रिया से गुजर चुका है।
हालांकि आयोग ने पूर्व में सभी राज्यों को प्रारंभिक सूचना भेजी थी, लेकिन दूसरे चरण में सीमित राज्यों को ही शामिल किया गया। इसी आधार पर माना जा रहा है कि तीसरे चरण में भी सभी 22 राज्यों को एक साथ शामिल किया जाना जरूरी नहीं है।
किन राज्यों को भेजा गया पत्र
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से तैयारी का आकलन मांगा गया है, उनमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं।
केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली, चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को भी पत्र भेजा गया है। इनमें से कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, इसलिए मतदाता सूची का अद्यतन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनगणना कार्यक्रम से तालमेल की चुनौती
तीसरे चरण की संभावित शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब 2027 की जनगणना का हाउसलिस्टिंग चरण भी प्रस्तावित है। जनगणना के तहत मकानों की सूची बनाने का काम 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच 45 दिनों की अवधि में किया जाना है।
दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही अपने कार्यक्रम अधिसूचित कर दिए हैं। ऐसे में इन राज्यों को या तो अपनी समय-सारिणी में बदलाव करना होगा या चुनाव आयोग से समन्वय स्थापित करना होगा। जिन राज्यों ने अभी तारीख तय नहीं की है, वे कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का विकल्प चुन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों प्रक्रियाएं एक साथ चलती हैं तो प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए समन्वय और योजना का स्पष्ट खाका तैयार करना आवश्यक होगा।
प्रक्रिया का उद्देश्य और महत्व
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना और नए पात्र मतदाताओं को शामिल करना है। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया अहम मानी जा रही है। मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी प्रक्रिया की नींव है, इसलिए आयोग इसे प्राथमिकता दे रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तीसरे चरण में कितने राज्यों को शामिल किया जाता है और जनगणना कार्यक्रम के साथ संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है। आने वाले महीनों में इस पर और स्पष्टता सामने आने की संभावना है।



