EnergySecurity – वैश्विक संकट से निपटने को भारत के पास 74 दिनों का तेल भंडार
EnergySecurity – वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारत की तैयारी को लेकर सोमवार को राज्यसभा में अहम जानकारी सामने आई। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल की स्थिति में देश के पास उपलब्ध तेल भंडार 74 दिनों तक की घरेलू मांग पूरी करने में सक्षम है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी गई जानकारी
उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि तेजी से विकास कर रहे देश के लिए सुरक्षित और व्यवहार्य तेल भंडारण व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। उनका कहना था कि वैश्विक संकट के समय ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की भूमिका निर्णायक होती है।
भारत की ऊर्जा संरचना और भौगोलिक स्थिति
मंत्री ने बताया कि भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों पर आधुनिक तेलशोधक संयंत्र स्थापित हैं, जिससे आयातित कच्चे तेल का कुशल प्रबंधन संभव हो पाता है। यह भौगोलिक संतुलन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाता है और किसी एक क्षेत्र में बाधा आने पर दूसरे क्षेत्र से समन्वय की सुविधा देता है।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़ों का हवाला देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। इसके साथ ही, देश के पास विश्व की चौथी सबसे बड़ी तेलशोधन क्षमता भी मौजूद है। वर्तमान में यह क्षमता लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जिसे आने वाले वर्षों में बढ़ाकर 32 करोड़ मीट्रिक टन प्रति वर्ष करने की योजना है।
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी मजबूत पकड़
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक भी है। वर्तमान में देश विश्व में पेट्रोलियम उत्पादों के पांचवें सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल है, जिससे विदेशी मुद्रा आय और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत होती है।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उद्देश्य
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का मुख्य उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के समय घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखना है। मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के दिशानिर्देशों में लगभग 90 दिनों के तेल भंडार की सिफारिश की जाती है।
वर्तमान भंडार की वास्तविक स्थिति
पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत अपने तेल भंडार का आकलन केवल भूमिगत रणनीतिक भंडारण सुविधाओं के आधार पर नहीं करता, बल्कि तेलशोधक संयंत्रों में उपलब्ध स्टॉक को भी इसमें शामिल किया जाता है। इन सभी स्रोतों को मिलाकर वर्तमान में देश के पास कुल 74 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध है।
भविष्य की योजनाओं पर संकेत
उन्होंने स्वीकार किया कि आदर्श स्थिति में यह भंडार 90 दिनों का होना चाहिए। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था को लेकर उन्होंने भरोसा जताया और कहा कि मंत्री के रूप में वे 74 दिनों के भंडार के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं। साथ ही, भविष्य में भंडारण क्षमता बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा का आधार
मंत्री के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार केवल ऊर्जा आपूर्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक स्थिरता से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। वैश्विक तेल कीमतों में अचानक उछाल या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में यह भंडार अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने में मदद करता है।
ISPRL के तहत स्थापित भंडारण सुविधाएं
एक लिखित उत्तर में हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार ने इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सुविधाएं स्थापित की हैं। इनकी कुल क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल की है। इन भंडारों में उपलब्ध तेल की मात्रा बाजार की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है।



