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RRB Group D Exam: फर्जीवाड़े के जाल में फंसे मुन्नाभाई और 22 हजार भर्तियों का सच जानकर टूट जाएगा लाखों युवाओं का दिल

RRB Group D Exam: रेलवे की परीक्षाओं में अपनी जगह पक्की करने के लिए कुछ लोग अब भी गलत रास्तों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन तकनीक और सतर्कता ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है। ताजा मामला बलियापुर के पलानी आमागाड़ा डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र का है, जहां गुरुवार को (Exam Malpractice Prevention) के तहत एक फर्जी अभ्यर्थी को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी संटू कुमार, पिंटू कुमार नामक वास्तविक अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। जैसे ही वीक्षकों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, उन्होंने तत्काल जांच शुरू की और सच्चाई सामने आते ही पुलिस को सूचित कर दिया।

RRB Group D Exam
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मुन्नाभाई गिरफ्तार और बांका से मुंगेर तक जुड़ा लिंक

पकड़ा गया आरोपी संटू कुमार बिहार के बांका जिले के शंभूगंज का रहने वाला है, जबकि असली उम्मीदवार मुंगेर का निवासी बताया जा रहा है। थाना प्रभारी सत्यजीत कुमार ने पुष्टि की है कि (Police Custody Process) के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यह घटना दर्शाती है कि परीक्षा केंद्रों पर अब सुरक्षा व्यवस्था कितनी कड़ी हो चुकी है। वीक्षकों की सूझबूझ और संदेह की सही समय पर पुष्टि ने एक बड़ी जालसाजी को उजागर किया है, जो उन मेहनती छात्रों के हक पर डाका डालने की कोशिश थी जो दिन-रात तैयारी करते हैं।

नई ग्रुप डी भर्ती का ऐलान और युवाओं की मायूसी

एक ओर जहां फर्जीवाड़े की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर रेल मंत्रालय द्वारा 22,000 नई भर्तियों की घोषणा ने विवाद छेड़ दिया है। ग्रुप डी यानी लेवल-1 के 11 अलग-अलग श्रेणियों में पदों की मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन (Candidate Dissatisfaction) का आलम यह है कि युवा इस संख्या को बहुत कम मान रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब रेलवे में 1.40 लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हैं, तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान मात्र 22 हजार पदों पर ही भर्ती क्यों निकाली जा रही है? सोशल मीडिया पर मंत्रालय के खिलाफ भारी विरोध देखा जा रहा है।

आईटीआई और 10वीं पास योग्यता पर बढ़ता असमंजस

भर्ती की प्रक्रिया भले ही दिसंबर के अंत या जनवरी के पहले सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद हो, लेकिन इसकी योग्यता को लेकर अभी भी कोहराम मचा हुआ है। अभ्यर्थियों के बीच यह (Eligibility Criteria Dispute) बना हुआ है कि क्या इस बार केवल 10वीं पास युवाओं को मौका मिलेगा या फिर आईटीआई सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया जाएगा। आशंका जताई जा रही है कि कुछ विशेष तकनीकी पदों के लिए आईटीआई वालों को वरीयता दी जाएगी, जबकि सामान्य पदों पर ही 10वीं पास छात्र आवेदन कर सकेंगे। आधिकारिक नोटिफिकेशन आने तक यह दुविधा लाखों युवाओं की नींद उड़ाए हुए है।

इंजीनियरिंग विभाग में पदों की सबसे बड़ी संख्या

यदि रिक्तियों के विवरण पर नजर डालें, तो इस भर्ती में इंजीनियरिंग विभाग का दबदबा रहने वाला है। नई नियमावली के अनुसार (Railway Job Statistics) बताते हैं कि कुल स्वीकृत 22,000 पदों में से अकेले इंजीनियरिंग विभाग के पास 12,500 पद हैं। इनमें सबसे अधिक मांग ट्रैक मेंटेनर ग्रेड-4 की है, जिसके लिए 11,000 पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा ट्रैफिक प्वाइंट-बी के लिए 5,000 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन आंकड़ों से साफ है कि रेलवे अपने बुनियादी ढांचे और ट्रैक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारी संख्या में ग्राउंड स्टाफ की भर्ती करने जा रहा है।

विभिन्न जोन और तकनीकी पदों का विस्तृत आवंटन

भर्ती का वितरण क्षेत्रीय स्तर पर भी किया गया है, जिसमें पूर्व मध्य रेलवे को 993 और दक्षिण पूर्व रेलवे को 1,199 पद मिले हैं। तकनीकी शाखाओं की बात करें तो (Technical Post Allocation) के तहत असिस्टेंट एस एवं टी के 1500, असिस्टेंट सी एवं डब्ल्यू के 1000 और ट्रैक मशीन के 600 पद शामिल हैं। लोको शेड, ब्रिज और ऑपरेशनल विभागों में भी पदों का सृजन किया गया है। इतनी विविधता के बावजूद, कुल पदों की सीमित संख्या ने उन करोड़ों आवेदकों को डरा दिया है जो एनटीपीसी और एएलपी के बाद अब ग्रुप डी से उम्मीदें लगाए बैठे थे।

रेलवे की भर्ती प्रणाली और अभ्यर्थियों के तीखे सवाल

जैसे-जैसे 2025 की अन्य भर्तियों जैसे एनटीपीसी और टेक्नीशियन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, ग्रुप डी के अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे रहा है। युवा लगातार (Ministry Policy Analysis) करते हुए पूछ रहे हैं कि क्या भविष्य में भर्तियों की संख्या बढ़ाई जाएगी? रेल मंत्रालय ने फिलहाल 22,000 पदों पर ही अपनी सहमति दी है, लेकिन विरोध की गूंज दिल्ली के गलियारों तक पहुंच रही है। युवाओं का भावनात्मक जुड़ाव रेलवे से इतना गहरा है कि एक छोटी सी गलती या पदों में कटौती उनके भविष्य के सपनों को चकनाचूर कर देती है।

भविष्य की चुनौतियां और तैयारी का सही रास्ता

फर्जीवाड़े की घटनाओं और पदों की कमी के बीच, उम्मीदवारों के लिए एकमात्र रास्ता कड़ी मेहनत और ईमानदारी ही बचता है। रेलवे प्रशासन ने (Examination Security Protocols) को अब इतना आधुनिक बना दिया है कि संटू कुमार जैसे जालसाजों का बचना नामुमकिन है। आने वाले हफ्तों में जब ग्रुप डी का विस्तृत नोटिफिकेशन जारी होगा, तब योग्यता और पदों की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। तब तक, अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अपनी तैयारी को और अधिक धार दें ताकि वे इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह बना सकें।

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