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RafaleDeal – भारत ने 114 लड़ाकू विमानों की खरीद को दी मंजूरी

RafaleDeal – भारत ने अपनी वायु शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये की पूंजीगत सैन्य खरीद को स्वीकृति प्रदान की है। इस फैसले को देश के रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम में अहम माना जा रहा है।

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डील की संरचना और आपूर्ति योजना

जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के तहत 18 विमान सीधे फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा तैयार अवस्था में दिए जाएंगे, जबकि शेष विमानों का निर्माण भारत में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस प्रक्रिया में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है। इसका उद्देश्य न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाना है, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन को भी प्रोत्साहन देना है।

अनुमानित लागत और आगे की प्रक्रिया

रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से कुल लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जानकारों के अनुसार यह सौदा लगभग 2.90 लाख करोड़ से 3.15 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर से पहले हथियार प्रणाली, रखरखाव पैकेज और तकनीकी पहलुओं को लेकर विस्तृत बातचीत की जाएगी। प्रस्ताव को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से भी अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है। वर्ष 2019 में भारतीय वायुसेना ने 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान खरीदने के लिए सूचना आमंत्रण जारी किया था, जिसे वैश्विक स्तर पर बड़े सैन्य खरीद कार्यक्रमों में गिना गया।

अन्य दावेदार और चयन प्रक्रिया

इस परियोजना में कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियां शामिल थीं। अमेरिकी कंपनियों के एफ-21 और एफ/ए-18 के अलावा यूरोफाइटर टाइफून भी प्रतिस्पर्धा में थे। लंबी मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद मौजूदा आवश्यकताओं और परिचालन अनुभव को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया। इससे पहले 2015 में 36 राफेल विमानों की खरीद का समझौता हुआ था, जिन्हें भारतीय वायुसेना वर्तमान में संचालित कर रही है।

वायुसेना में स्क्वाड्रन की स्थिति

लड़ाकू विमानों की नई खरीद ऐसे समय में स्वीकृत हुई है जब भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या स्वीकृत 42 के मुकाबले घटकर 31 रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक लड़ाकू विमानों की समय पर आपूर्ति से यह अंतर कम करने में मदद मिलेगी। करीब एक दशक पहले मध्यम बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान परियोजना पर काम शुरू हुआ था, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ पाई थी। मौजूदा मंजूरी को उसी दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।

मिसाइल और हथियार प्रणाली में स्वदेशी भागीदारी

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों के साथ आने वाली अधिकांश उन्नत मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश की रक्षा उद्योग क्षमता भी मजबूत होगी। लंबी दूरी तक सटीक हमले करने की क्षमता से वायुसेना की निवारक ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

अन्य सैन्य प्रस्तावों को भी स्वीकृति

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने वायुसेना के अलावा नौसेना से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। इसमें चार मेगावाट क्षमता वाले समुद्री गैस टरबाइन आधारित विद्युत जनरेटर और पी8आई लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान शामिल हैं। गैस टरबाइन जनरेटर को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की मेक-I श्रेणी के तहत शामिल किया गया है, जिससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निर्भरता घटेगी। वहीं पी8आई विमानों से समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

रणनीतिक महत्व और आगे की राह

114 लड़ाकू विमानों की यह मंजूरी भारत की दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे न केवल वायु शक्ति में संतुलन बनेगा, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण और औद्योगिक साझेदारी के जरिए घरेलू रक्षा क्षेत्र को भी नई दिशा मिलेगी। अब सभी की नजर अंतिम अनुबंध और उत्पादन प्रक्रिया पर है, जो आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी।

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