TejasMk1A – भारतीय वायुसेना को मिलने को तैयार पहले पांच स्वदेशी लड़ाकू विमान
TejasMk1A – भारतीय वायुसेना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़े क्षेत्र के लिए एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने स्पष्ट किया है कि LCA तेजस Mk1A के पहले बैच के पांच लड़ाकू विमान पूरी तरह तैयार हैं और इन्हें वायुसेना को सौंपे जाने में कोई तकनीकी बाधा शेष नहीं है। कंपनी ने डिलीवरी में देरी को लेकर चल रही अटकलों को निराधार बताते हुए कहा कि तय समझौते के अनुरूप सभी प्रमुख क्षमताएं इन विमानों में शामिल की जा चुकी हैं।

डिलीवरी को लेकर स्थिति स्पष्ट
HAL के अनुसार, पहले चरण में तैयार किए गए ये पांचों विमान कॉन्ट्रैक्ट में निर्धारित तकनीकी मानकों और ऑपरेशनल जरूरतों पर खरे उतरते हैं। कंपनी का कहना है कि भारतीय वायुसेना के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा गया है ताकि विमानों को उसी कॉन्फ़िगरेशन में सौंपा जाए, जिसकी मांग वायुसेना ने की है। इससे पहले कुछ विमानों की डिलीवरी प्रस्तावित समय पर नहीं हो सकी थी, क्योंकि वायुसेना ने पूरी तरह ऑपरेशनल स्थिति में ही विमानों को स्वीकार करने पर जोर दिया था।
अतिरिक्त विमानों की तैयारी और इंजन आपूर्ति
HAL ने यह भी जानकारी दी है कि नौ अतिरिक्त LCA Mk1A विमान पहले ही असेंबल किए जा चुके हैं और उनकी परीक्षण उड़ानें सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं। इन विमानों की डिलीवरी अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रॉनिक से मिलने वाले इंजनों पर निर्भर है। अब तक पांच इंजन प्राप्त हो चुके हैं और कंपनी को उम्मीद है कि आगे की सप्लाई तय डिलीवरी योजना के अनुरूप बनी रहेगी। HAL का दावा है कि इंजन आपूर्ति को लेकर स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
डिजाइन से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम
कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि डिजाइन और डेवलपमेंट से संबंधित जिन बिंदुओं की पहचान की गई थी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय वायुसेना के साथ तकनीकी स्तर पर निरंतर संवाद जारी है। HAL का कहना है कि वह चालू वित्त वर्ष के लिए तय किए गए अपने उत्पादन और डिलीवरी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
दीर्घकालिक रक्षा कार्यक्रमों पर फोकस
LCA Mk1A के अलावा HAL कई अन्य बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम कर रहा है। इनमें इंडियन मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर, तेजस LCA Mk2 और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सभी योजनाओं के 2032 के बाद उत्पादन चरण में पहुंचने की संभावना है, जिससे देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
दो चरणों में मिले 180 विमानों के ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2021 में पहले चरण के तहत 83 LCA Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया था, जिसमें फाइटर और ट्रेनर दोनों संस्करण शामिल थे। इसके बाद सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों के लिए फॉलो-ऑन कॉन्ट्रैक्ट किया गया, जिसकी कुल कीमत 62,370 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इस तरह वायुसेना ने दो चरणों में कुल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है।
डिलीवरी टाइमलाइन और उत्पादन क्षमता
इन सभी विमानों की आपूर्ति 2027-28 से शुरू होकर लगभग छह वर्षों में पूरी किए जाने की योजना है। वर्तमान में HAL की फाइटर विमान उत्पादन क्षमता 24 विमान प्रति वर्ष है। इस गति से पूरे ऑर्डर को पूरा करने में सात साल से अधिक का समय लगने का अनुमान है, जिसके चलते पूरी फ्लीट 2033 के आसपास वायुसेना को मिल पाएगी। इससे पहले वायुसेना 40 LCA Mk1 विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है।
कार्यक्रम का अहम पड़ाव
17 अक्टूबर को HAL के नासिक संयंत्र से पहले तेजस Mk1A प्रोटोटाइप की सफल पहली उड़ान को इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इंजन सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद पूरी डिलीवरी प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है और वायुसेना की परिचालन जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
वायुसेना के लिए क्यों अहम है तेजस Mk1A
भारतीय वायुसेना इस समय स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है और पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। ऐसे में तेजस Mk1A का समय पर शामिल होना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह विमान न केवल स्वदेशी तकनीक की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भरता को भी कम करने की दिशा में एक ठोस कदम है।



