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Terrorism – कश्मीर एकजुटता दिवस पर भारत विरोधी बयानों से बढ़ी सुरक्षा चिंता

Terrorism –  कश्मीर एकजुटता दिवस के मौके पर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ने एक बार फिर भारत के खिलाफ खुली नफरत और हिंसा का प्रदर्शन किया है। सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों में भारत के प्रमुख शहरों को निशाना बनाने और हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की धमकियां दी गईं, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।

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पाकिस्तान में रैलियों से खुलेआम उकसावे की भाषा

लाहौर और PoK के विभिन्न इलाकों में आयोजित सभाओं के दौरान जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेताओं ने ऐसे बयान दिए, जिन्हें सीधे तौर पर उकसावे और हिंसा के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। इन कार्यक्रमों में भारत के खिलाफ न सिर्फ आक्रामक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, बल्कि युवाओं को हिंसक रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करने की कोशिश भी की गई। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस तरह के मंच अक्सर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और आतंकी नेटवर्क को सक्रिय रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेता का विवादित बयान

लाहौर में हुई एक रैली में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े सैयद अब्दुल रहमान नकवी ने भीड़ को संबोधित करते हुए भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल उठाने वाले बयान दिए। नकवी, जो हाफिज सईद के राजनीतिक संगठन से जुड़ा बताया जाता है, ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों का सहारा लेकर भड़काऊ बातें कहीं। उसके वक्तव्य में आगरा, दिल्ली और दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आक्रामक भाषा का प्रयोग किया गया, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।

आतंकी नेटवर्क से पुराने रिश्ते

जानकारी के मुताबिक नकवी के संबंध लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उसके सार्वजनिक बयानों में जिस तरह से संगठित हिंसा की बात की गई, उससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे मंचों का इस्तेमाल विचारधारात्मक समर्थन बनाए रखने और नए समर्थकों को जोड़ने के लिए किया जा रहा है। भारतीय एजेंसियां इन बयानों के पीछे की मंशा और संभावित गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

PoK में जैश कमांडर की सभा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलाकोट क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी ने एक बड़ी सभा को संबोधित किया। अपने भाषण में उसने युवाओं को संगठन से जुड़ने के लिए उकसाया और हिंसा को तथाकथित संघर्ष का रास्ता बताया। सभा के दौरान दिए गए बयान न सिर्फ भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा करने वाले माने जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भों का उल्लेख

कश्मीरी के वक्तव्य में दिल्ली के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल जैसे देशों का नाम लिया गया। विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान अक्सर वैश्विक ध्यान आकर्षित करने और संगठन की पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश होते हैं। रैली में संगठन से जुड़े नए कैडर को भी मंच पर पेश किया गया, जिसे आतंकी ढांचे को फिर से सक्रिय करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी

इन घटनाओं के बाद भारतीय खुफिया तंत्र ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। सुरक्षा बलों को संभावित घुसपैठ और किसी भी अप्रिय गतिविधि से निपटने के लिए अलर्ट मोड में रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अक्सर हताशा और दबाव का संकेत होती है, लेकिन किसी भी खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर

सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि सार्वजनिक मंचों से दिए गए ऐसे बयान तत्काल कार्रवाई का संकेत नहीं होते, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भी जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से सेना, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियां समन्वय के साथ हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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