TMCFundDispute – पार्टी फंड को लेकर तृणमूल में बढ़ा आंतरिक विवाद
TMCFundDispute – पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद संगठन के अंदर उभरे मतभेद लगातार गहराते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को पार्टी के कुछ असंतुष्ट विधायकों ने संगठन के बैंक खाते में जमा धनराशि की जांच की मांग करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष द्वारा बैंक को पत्र लिखकर खाते से होने वाले वित्तीय लेन-देन पर अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध भी किया गया है। इन घटनाओं ने संगठन के भीतर चल रहे विवाद को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।
पार्टी खाते की जांच की मांग
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले असंतुष्ट गुट ने बिधाननगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर पार्टी फंड की जांच की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित खाते में बड़ी राशि जमा है, जिसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि खाते में मौजूद धनराशि के स्रोत और उसके उपयोग की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उनका तर्क है कि संगठन से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर स्पष्टता आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके।
पूर्व कोषाध्यक्ष ने बैंक को भेजा पत्र
इस विवाद के बीच पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास द्वारा बैंक को भेजा गया पत्र भी चर्चा में है। पत्र में उन्होंने संगठन के नियंत्रण और अधिकार को लेकर जारी विवाद का हवाला देते हुए खाते से किसी भी संभावित अनधिकृत लेन-देन पर चिंता जताई है।
उन्होंने बैंक प्रबंधन से अनुरोध किया कि विवाद के समाधान तक खाते से होने वाले भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों पर सावधानी बरती जाए। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी भविष्य में कानूनी जटिलताएं पैदा कर सकती है।
संगठनात्मक बदलाव के बाद बढ़ी बहस
तृणमूल कांग्रेस में हाल ही में कई संगठनात्मक बदलाव किए गए थे। चुनावी पराजय के बाद पार्टी नेतृत्व ने विभिन्न पदों पर फेरबदल करते हुए नई जिम्मेदारियां सौंपी थीं। इसी क्रम में कोषाध्यक्ष पद पर भी बदलाव किया गया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक पुनर्गठन के बाद सामने आए ये विवाद पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति संतुलन और नेतृत्व संबंधी मतभेदों को उजागर करते हैं। वित्तीय मुद्दे पर उठे सवालों ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
इस्तीफों से बढ़ी राजनीतिक हलचल
पार्टी को हाल के दिनों में कुछ और झटके भी लगे हैं। पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने संगठन के विभिन्न पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव ने भी अपने पद से हटने का फैसला किया है।
हालांकि दोनों नेताओं ने अपने-अपने कारण बताए हैं, लेकिन इन घटनाओं को पार्टी के भीतर जारी असंतोष के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। लगातार सामने आ रहे इस्तीफों ने संगठन की आंतरिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
नेतृत्व ने आरोपों का किया जवाब
पार्टी नेतृत्व की ओर से इन आरोपों और शिकायतों पर प्रतिक्रिया भी सामने आई है। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि किसी सदस्य को संगठन के वित्तीय मामलों को लेकर कोई आपत्ति थी, तो उसे पहले पार्टी मंच पर उठाया जाना चाहिए था।
नेताओं का तर्क है कि संगठन के आंतरिक मामलों को सार्वजनिक विवाद का रूप देना पार्टी हित में नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि हालिया संगठनात्मक बदलावों के बाद कुछ कदमों की वैधानिक स्थिति पर भी सवाल उठते हैं, जिनकी समीक्षा की जानी चाहिए।
मामला पहुंचा न्यायालय
इस राजनीतिक और संगठनात्मक विवाद के बीच मामला अब न्यायिक स्तर तक पहुंच गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की गई है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर न्यायालय का आगामी रुख राजनीतिक घटनाक्रम को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी यह खींचतान पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसके और महत्वपूर्ण आयाम सामने आ सकते हैं।