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Tactical Retired Out in T20 Cricket: जब जीत की खातिर बल्लेबाजों ने खुद की दी बलि, मैदान पर मचे इस कोहराम ने दुनिया को चौंकाया…

Tactical Retired Out in T20 Cricket: क्रिकेट का खेल अब केवल बल्ले और गेंद की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह शतरंज की बिसात की तरह दिमाग का खेल भी बन चुका है। रविवार, 4 जनवरी को न्यूजीलैंड की धरती पर सुपर समैश 2025-26 के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने खेल प्रेमियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। टी20 फॉर्मेट में (Innovative strategies) का दौर तो पुराना है, लेकिन जिस तरह से नॉर्दर्न नाइट्स की टीम ने मैदान पर अपनी चालें चलीं, उसने क्रिकेट के आंकड़ों और इतिहास को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है।

Tactical Retired Out in T20 Cricket
Tactical Retired Out in T20 Cricket

रिटायर्ड आउट: मजबूरी नहीं अब जीत का बना हथियार

आमतौर पर किसी खिलाड़ी का मैदान छोड़ना चोट या थकान से जुड़ा होता है, लेकिन आधुनिक क्रिकेट में अब यह एक सोची-समझी रणनीति बन गई है। ओटागो के खिलाफ 167 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए नॉर्दर्न नाइट्स की टीम एक मुश्किल भंवर में फंसी हुई थी। खेल के 16 ओवर बीत चुके थे और स्कोरबोर्ड पर (Batting strike rate) की कमी साफ झलक रही थी। टीम को आखिरी 24 गेंदों में 58 रनों की दरकार थी, जो किसी भी स्थिति में नामुमकिन तो नहीं लेकिन बेहद चुनौतीपूर्ण जरूर था।

जीत रावल का साहसी फैसला और टीम हित की मिसाल

मैदान पर मौजूद जीत रावल 27 गेंदों में केवल 23 रन बनाकर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने महसूस किया कि उनकी धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए हार का कारण बन सकती है। 17वें ओवर की पहली गेंद डॉट होने के तुरंत बाद उन्होंने (Tactical retirement) लेने का फैसला किया। यह कोई चोट नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी योजना थी ताकि डगआउट में बैठे विस्फोटक बल्लेबाज क्रीज पर आकर तेजी से रन बटोर सकें और टीम को जीत की दहलीज तक ले जा सकें।

इतिहास में पहली बार: एक ही पारी में दो बार दोहराया गया कारनामा

जीत रावल के इस कदम से प्रेरित होकर दूसरे छोर पर मौजूद जेवियर बेल ने भी कुछ ऐसा ही किया। वह भी 13 गेंदों पर महज 9 रन बनाकर अपनी लय तलाश रहे थे। 18वें ओवर की शुरुआत में ही उन्होंने भी खुद को रिटायर्ड आउट घोषित कर दिया। टी20 क्रिकेट के (Sporting history) में यह पहला मौका था जब किसी एक पारी में एक नहीं, बल्कि दो-दो खिलाड़ियों ने स्वेच्छा से अपना विकेट बलिदान कर दिया ताकि टीम की रन गति को बढ़ाया जा सके।

कप्तान बेन पोमारे की आतिशी पारी और रोमांचक मोड़

रणनीति के तहत छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे कप्तान बेन पोमारे ने आते ही अपनी मंशा साफ कर दी। उन्होंने पहली चार गेंदों पर दो शानदार चौके जड़े और दबाव को विपक्षी टीम पर शिफ्ट कर दिया। इस (Middle order collapse) के डर को दरकिनार करते हुए कप्तान ने 10 गेंदों पर 20 रनों की तेज पारी खेली। उनके साथ स्कॉट कुगेलेइजन ने भी महज 12 गेंदों पर 34 रन ठोककर मैच में जान फूंक दी और मुकाबले को अंतिम ओवर के रोमांच तक खींच ले गए।

रोमांच की पराकाष्ठा और एक यादगार टाई मुकाबला

नॉर्दर्न नाइट्स के बल्लेबाजों का यह त्याग बेकार नहीं गया, हालांकि वे जीत का स्वाद चखने से बस एक कदम दूर रह गए। टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 166 रन बनाए और मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। यह (Match result) भले ही टाई रहा हो, लेकिन क्रिकेट जगत में चर्चा केवल उस निर्भीक फैसले की हो रही है, जिसने खेल की पारंपरिक सोच को चुनौती दी है। खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि व्यक्तिगत रिकॉर्ड से कहीं ऊपर टीम की जरूरत होती है।

क्या भविष्य में आम हो जाएगी यह अनोखी रणनीति

सुपर समैश के इस मैच ने दुनिया भर की टी20 लीगों के लिए एक उदाहरण पेश किया है। अब कोच और कप्तान इस (Game changing tactics) को अपनी मुख्य योजना का हिस्सा बनाने पर विचार करेंगे। आने वाले समय में आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में भी हमें ऐसे नजारे देखने को मिल सकते हैं जहां धीमी बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी खुद ही रास्ता साफ कर देंगे। क्रिकेट का यह बदलता स्वरूप जितना रोमांचक है, उतना ही तकनीकी रूप से उन्नत भी होता जा रहा है।

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