CyberFraud – गोरखपुर में वॉशिंग मशीन कॉल के बाद निकल गई महिला की चीख, खातों से उड़े 12 लाख
CyberFraud – गोरखपुर में वॉशिंग मशीन कॉल के बाद महिला के खातों से 12 लाख पारगोरखपुर में एक साधारण फोन कॉल के बाद ऑनलाइन ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। वॉशिंग मशीन की मरम्मत के लिए किए गए संपर्क के कुछ ही घंटों में एक महिला के दो अलग-अलग बैंक खातों से करीब 12 लाख रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी रकम की निकासी के दौरान न तो कोई ओटीपी अलर्ट मिला और न ही बैंक की ओर से एसएमएस सूचना भेजी गई। पीड़िता ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम
बड़गो इलाके की निवासी दीपिका दूबे ने साइबर थाने में दर्ज कराई शिकायत में बताया कि तीन फरवरी 2026 को उन्होंने वॉशिंग मशीन ठीक कराने के लिए एक मैकेनिक को फोन किया था। बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने उनके मोबाइल नंबर पर 10 रुपये का रिचार्ज कराने को कहा। उन्होंने सामान्य प्रक्रिया समझकर रिचार्ज कर दिया। इसके बाद कुछ अनजान नंबरों से कॉल आए, जिन्हें उन्होंने उठाया नहीं। उसी दिन उनके खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर हो गई।
दो बैंकों से कई किश्तों में निकाली गई रकम
दीपिका दूबे का भारतीय स्टेट बैंक की बेतियाहाता शाखा और यूनियन बैंक की आजाद चौक शाखा में बचत खाता है। शिकायत के अनुसार, स्टेट बैंक खाते से सात अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 2,81,767 रुपये निकाले गए। वहीं यूनियन बैंक खाते से 21 बार में 8,38,590 रुपये की निकासी हुई। इस तरह कुल 11,20,357 रुपये ऑनलाइन माध्यम से निकाल लिए गए। रकम की निकासी एक ही दिन में होने की बात सामने आई है।
ट्रांजेक्शन लिमिट पर उठे सवाल
पीड़िता का कहना है कि दोनों खातों की यूपीआई ट्रांजेक्शन सीमा अधिकतम एक लाख रुपये प्रतिदिन तय है। इसके बावजूद एक ही दिन में 11 लाख से अधिक की निकासी कैसे संभव हुई, यह सबसे बड़ा सवाल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाते से पैसे निकलते समय न तो मोबाइल पर कोई संदेश आया और न ही बैंक की ओर से किसी प्रकार की चेतावनी दी गई। बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इस मामले ने नई चिंता खड़ी कर दी है।
बैंक शाखा में पता चला फर्जीवाड़ा
दीपिका को ठगी की जानकारी तब हुई जब छह फरवरी को उन्होंने बैंक शाखा जाकर बैलेंस की जानकारी ली। खाते में रकम कम मिलने पर उन्होंने स्टेटमेंट निकलवाया, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज की और स्थानीय साइबर थाने में तहरीर दी। उन्होंने बैंक प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मिलीभगत की आशंका जताई है।
पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार बैंक स्टेटमेंट, पासबुक, साइबर क्राइम पोर्टल की रिपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण के जरिए ट्रांजेक्शन की ट्रेल खंगाली जा रही है। दोषियों की पहचान होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ में भी साइबर ठगी की घटना
इसी तरह की एक घटना लखनऊ से भी सामने आई है। सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में रहने वाले एक निजी कंपनी के कर्मचारी के खाते से करीब 1.52 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित के अनुसार, घटना के समय उनका मोबाइल फोन बंद था, जिसके चलते उन्हें तुरंत जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में बैंक स्टेटमेंट देखने पर ट्रांजेक्शन का पता चला। इस मामले में भी साइबर अपराध की आशंका जताई गई है।
बढ़ती ऑनलाइन ठगी ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में ऑनलाइन ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। छोटे-छोटे बहानों से शुरू होने वाली बातचीत कई बार बड़े वित्तीय नुकसान में बदल जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक या छोटे भुगतान के नाम पर मांगी गई जानकारी से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी असामान्य गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
पुलिस और बैंकिंग संस्थान लोगों को जागरूक रहने की सलाह दे रहे हैं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।



