AI Video Case – गोरखनाथ में बुजुर्ग की आत्महत्या, जमीन विवाद और दबाव की जांच
AI Video Case – गोरखपुर के गोरखनाथ इलाके से सामने आई एक गंभीर घटना ने डिजिटल अपराध और स्थानीय विवादों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कथित तौर पर मानसिक दबाव और सामाजिक बदनामी के डर से आत्महत्या कर ली। परिजनों का आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले कुछ लोग मकान पर कब्जा करने की नीयत से लंबे समय से उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे और इसी दबाव के बीच यह कदम उठाया गया।

मकान विवाद से शुरू हुआ तनाव
मृतक की पहचान सुरेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो विकास नगर कॉलोनी के निवासी थे। परिजनों के अनुसार, उनका पड़ोसियों से लंबे समय से मकान को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि कुछ लोग घर हड़पने के उद्देश्य से लगातार दबाव बना रहे थे। सुरेंद्र सिंह ने अपना मकान छोड़ने से इनकार किया, जिसके बाद कथित तौर पर उत्पीड़न और धमकियों का सिलसिला तेज हो गया।
आपत्तिजनक वीडियो की धमकी का आरोप
परिवार का कहना है कि आरोपियों ने दबाव बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। दावा किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर उसे वायरल करने की धमकी दी गई। इस धमकी से सुरेंद्र सिंह गहरे सदमे में आ गए थे। परिजनों के मुताबिक, सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर वह काफी चिंतित रहने लगे थे।
बेटे की तहरीर पर दर्ज हुआ मामला
मृतक के बेटे अविनाश सिंह की शिकायत पर पुलिस ने विकास नगर कॉलोनी के पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। नामजद आरोपियों में राजेश जायसवाल, राजकुमार यादव, उमेश जायसवाल, दिनेश जायसवाल और अनिल चौहान शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने सुरेंद्र सिंह को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और कई बार मारपीट भी की।
कर्ज और पारिवारिक परेशानियां
पुलिस जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र सिंह एक धागा फैक्ट्री में मुनीम के तौर पर काम करते थे। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से एक पिछले साल नेपाल में चोरी के मामले में गिरफ्तार हुआ था और अभी जेल में बंद है। बेटे को छुड़ाने के प्रयास में सुरेंद्र सिंह ने कई लोगों से कर्ज लिया था। आर्थिक तंगी के चलते वह समय पर कर्ज चुका नहीं पा रहे थे, जिससे तनाव और बढ़ गया।
कर्जदारों का दबाव और विवाद
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों से सुरेंद्र सिंह ने कर्ज लिया था, उनमें कुछ वही लोग भी शामिल थे जो अब इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। कर्ज न चुका पाने की स्थिति में कथित तौर पर मकान अपने नाम कराने का दबाव बनाया जा रहा था। आर्थिक संकट और सामाजिक दबाव के चलते सुरेंद्र सिंह किसी से खुलकर मदद भी नहीं मांग पा रहे थे।
एक महीने पुराना सुसाइड लेटर
पुलिस को जांच के दौरान एक सुसाइड लेटर मिला है, जो करीब एक महीने पहले लिखा गया बताया जा रहा है। यह पत्र सुरेंद्र सिंह ने अपने पास ही रखा था और किसी को इसकी जानकारी नहीं दी थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुसाइड नोट में कर्ज से जुड़ी परेशानी का उल्लेख है, जबकि कथित वीडियो का सीधा जिक्र नहीं मिलता।
पुलिस की जांच और आधिकारिक बयान
इस मामले में क्षेत्राधिकारी रवि सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आर्थिक दबाव और कर्ज को आत्महत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
डिजिटल धमकी के बढ़ते मामले
यह मामला एक बार फिर डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग और सामाजिक दबाव की गंभीरता को उजागर करता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आपत्तिजनक वीडियो से जुड़ा आरोप कितना सही है और इसमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ हुई या नहीं।



