उत्तर प्रदेश

Assembly Debate – विधानसभा में विपक्ष पर सीएम का तीखा प्रहार

Assembly Debate – उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, पर सीधा और तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल का हवाला देते हुए प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है, जबकि पहले हालात अलग थे।

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शिक्षा विभाग को लेकर पुरानी व्यवस्था पर सवाल

मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान एक पुराने अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब वह गोरखपुर से सांसद थे, तब एक रेलवे स्टेशन पर कुछ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। उसी दौरान तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें पहचानने में हिचक दिखाई। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, जब उन्होंने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वह मंत्री के साथ आए हैं, तो अधिकारी ने अनभिज्ञता जताई। बाद में मंत्री ने स्वयं यह स्वीकार किया कि वह कई महीनों से अपने कार्यालय नहीं गए थे, जिससे अधिकारी उन्हें पहचान नहीं पाए।

मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग को प्रशासनिक शिथिलता का उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि विभागीय मंत्री ही नियमित रूप से कार्यालय न जाएं, तो व्यवस्था पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।

शहीदी दिवस के कार्यक्रम का उल्लेख

अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री ने एक अन्य घटना का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में तत्कालीन शिक्षा मंत्री को आमंत्रित किया गया था। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान मंत्री को राम प्रसाद बिस्मिल और भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां के बीच अंतर स्पष्ट नहीं था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस भ्रम ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों की जानकारी सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए आवश्यक है। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने इन आरोपों पर अपनी असहमति भी दर्ज कराई।

कानून-व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं पर बयान

विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार का पक्ष रखा। प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले से जुड़े संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं की अपनी स्थापित मर्यादाएं हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने चार पीठों की परंपरा और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमों का सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार कानून के दायरे में रहकर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री के वक्तव्य पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार की उपलब्धियों का हवाला दिया। सदन में यह भी कहा गया कि लोकतंत्र में स्वस्थ बहस जरूरी है, लेकिन तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान इस तरह की बहसें आम हैं। हालांकि, इन बयानों से राजनीतिक माहौल में गर्माहट जरूर बढ़ी है। आने वाले दिनों में भी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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