BudgetAllocation – केंद्रीय बजट से उत्तर प्रदेश की विकास रफ्तार को नई दिशा
BudgetAllocation – केंद्रीय बजट में उत्तर प्रदेश के लिए घोषित प्रावधानों ने राज्य की विकास यात्रा को नई ऊर्जा दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश को कुल 4.26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलने का अनुमान है। यह आवंटन न केवल पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है, बल्कि राज्य में बुनियादी ढांचे, सामाजिक योजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती देने वाला भी माना जा रहा है।

पिछले वर्ष से अधिक संसाधन, विकास को मिलेगी गति
केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट में उत्तर प्रदेश को मिलने वाली कुल राशि पिछले बजट से लगभग 25 हजार करोड़ रुपये ज्यादा है। अधिकारियों का मानना है कि यह अतिरिक्त संसाधन राज्य की चल रही विकास परियोजनाओं को गति देगा और नई योजनाओं के क्रियान्वयन में सहायक होगा। केंद्र से मिलने वाला यह सहयोग सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य और शहरी सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
केंद्रीय करों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी
केंद्रीय करों से राज्यों को मिलने वाले हिस्से में उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा लाभ मिला है। अनुमान के अनुसार, राज्य को लगभग 2.68 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय करों के रूप में प्राप्त होंगे। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 13 हजार करोड़ रुपये अधिक है। केंद्रीय करों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत आंकी गई है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है।
कर मदों से मिलने वाली आय का ब्योरा
केंद्रीय करों के तहत सबसे अधिक राशि इनकम टैक्स से मिलने की संभावना है, जो करीब 95,698 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा कॉरपोरेशन टैक्स से लगभग 78,939 करोड़ रुपये, सेंट्रल जीएसटी से 73,547 करोड़ रुपये, कस्टम ड्यूटी से 14,347 करोड़ रुपये और यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6,112 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके बाद केंद्रीय करों में बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान का स्थान आता है।
केंद्रीय योजनाओं और सहायता में बढ़ोतरी
वित्त विभाग के अनुमान के अनुसार, केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश को लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इसके अतिरिक्त कैपिटल असिस्टेंस के रूप में 20 हजार करोड़ रुपये और सेंट्रल सेक्टर की योजनाओं के लिए करीब 18 हजार करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। ये आंकड़े अनंतिम हैं और जरूरत के अनुसार इनमें वृद्धि संभव है।
पारंपरिक उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
बजट में 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन की घोषणा से उत्तर प्रदेश के वस्त्र, हस्तशिल्प, चमड़ा और खेल सामग्री जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज कार्यक्रम के जरिए खादी, हथकरघा और एक जिला-एक उत्पाद जैसी पहलों को नई मजबूती मिलेगी। चूंकि राज्य की लगभग 73 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए इन योजनाओं का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देगा।
हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत
केंद्रीय बजट में घोषित सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो उत्तर प्रदेश से जुड़ेंगे। दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से कम से कम दस जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
शहरी सुविधाएं, स्वास्थ्य और पर्यटन पर निवेश
पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए नई योजना में उत्तर प्रदेश के 25 शहर शामिल किए गए हैं। जिला अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, प्रत्येक जिले में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने और पर्यटन स्थलों पर प्रशिक्षित गाइड उपलब्ध कराने जैसे कदमों से सामाजिक सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।
औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों को प्रोत्साहन
इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण, एमएसएमई सेक्टर और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए किए गए प्रावधानों से उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रस्तावित 10 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का बड़ा हिस्सा राज्य को मिल सकता है, क्योंकि देश के कुल एमएसएमई में बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश में स्थित है।
सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य से जुड़े लाभ
कैंसर, डायबिटीज और कुछ दुर्लभ बीमारियों की दवाओं की कीमतों में राहत से राज्य की बड़ी आबादी को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए शी-मार्ट जैसी पहलों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।



