CareerCourses – बीएचयू पीजी दाखिलों में बदली तस्वीर, रोजगारपरक कोर्स बने पहली पसंद
CareerCourses – बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में इस वर्ष पोस्ट ग्रेजुएट दाखिलों के आंकड़ों ने छात्रों की बदलती प्राथमिकताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने रखी है। जहां पहले पारंपरिक विषयों में प्रवेश के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी, वहीं अब छात्रों का झुकाव तेजी से ऐसे पाठ्यक्रमों की ओर बढ़ रहा है जो सीधे रोजगार और व्यावसायिक अवसरों से जुड़े हैं। विश्वविद्यालय में प्रोफेशनल कोर्स लगभग पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि कई पारंपरिक विषयों में सीटें खाली रहने के कारण स्पॉट एडमिशन की प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है।

रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों की बढ़ी मांग
बीएचयू में बीएड, एमएड, एनवायरमेंटल साइंस, फूड एंड न्यूट्रिशन तथा डेयरी एंड फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स इस बार छात्रों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। कई विभागों में सभी सीटें नियमित काउंसलिंग के दौरान ही भर गईं, जिससे स्पॉट राउंड की जरूरत भी नहीं पड़ी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि युवाओं का फोकस अब ऐसे पाठ्यक्रमों पर है जो पढ़ाई पूरी होने के बाद बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकें।
पारंपरिक विषयों में खाली रह गईं हजारों सीटें
दूसरी ओर कला, सामाजिक विज्ञान और कुछ पारंपरिक विज्ञान विषयों में अपेक्षित संख्या में प्रवेश नहीं हो सके। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों को मिलाकर लगभग 2400 सीटें अब भी रिक्त हैं। इन्हें भरने के लिए स्पॉट राउंड आयोजित किया जा रहा है। एमए हिंदी, इतिहास, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, संस्कृत, उर्दू, अर्थशास्त्र और अंग्रेजी जैसे विषयों में अभी भी विभिन्न श्रेणियों की सीटें उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय 30 जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू करने की तैयारी में जुटा है।
कानून और विज्ञान में भी बदला रुझान
दाखिले के आंकड़े बताते हैं कि बदलाव केवल कला संकाय तक सीमित नहीं है। एलएलबी (ऑनर्स) और एलएलएम जैसे कानून के पाठ्यक्रमों में भी कई सीटें खाली रह गई हैं। इसी तरह एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, बायोटेक्नोलॉजी और मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स जैसे विज्ञान विषयों में भी स्पॉट एडमिशन की आवश्यकता पड़ी है। इससे संकेत मिलता है कि विद्यार्थी अब पारंपरिक डिग्री की तुलना में रोजगार केंद्रित विकल्पों को अधिक महत्व दे रहे हैं।
विश्वविद्यालय ने पहले ही किए थे बदलाव
छात्रों की बदलती पसंद को देखते हुए बीएचयू प्रशासन ने पिछले वर्ष कई पारंपरिक पाठ्यक्रमों की सीटों में 15 से 40 प्रतिशत तक कटौती की थी। यह निर्णय लगातार घटती मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। मौजूदा प्रवेश प्रक्रिया के परिणाम बताते हैं कि विश्वविद्यालय का यह आकलन काफी हद तक सही साबित हुआ है और नई शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थान अपनी योजनाओं में बदलाव कर रहा है।
बदलते जॉब मार्केट का दिख रहा असर
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति, उद्योगों की बदलती जरूरतें और स्किल आधारित शिक्षा की बढ़ती मांग ने छात्रों की सोच को प्रभावित किया है। अब अधिकांश विद्यार्थी ऐसे कोर्स चुन रहे हैं जिनसे पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी या करियर की संभावनाएं अधिक मजबूत हों। इसी कारण प्रोफेशनल और इंटरडिसिप्लिनरी पाठ्यक्रमों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जबकि पारंपरिक विषयों की लोकप्रियता पहले की तुलना में कम होती दिखाई दे रही है।