उत्तर प्रदेश

Carjacking – लखनऊ में काली थार से अपहरण और लूट की लगातार घटनाएँ बढ़ीं

Carjacking – राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों में काली थार (एसयूवी) का इस्तेमाल कर लोगों को लिफ्ट के बहाने अगवा करने और लूटने की घटनाएँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में सरोजनीनगर, बीकेटी, कमता और हाइडिल चौराहे के आसपास हुई अलग-अलग वारदातों में तरीका लगभग एक जैसा रहा—पहले सुनसान जगह पर खड़े व्यक्ति को गाड़ी में बैठाना, फिर रास्ता बदलकर उसे बंधक बनाना, मारपीट करना और नकदी व मोबाइल लूट लेना। कई मामलों में बदमाशों ने पीड़ितों से जबरन डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसे भी ट्रांसफर करा लिए। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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एक जैसा पैटर्न, अलग-अलग इलाके

जांच में सामने आ रहा है कि बदमाश अधिकतर उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो बस स्टॉप, चौराहों या सुनसान जगहों पर वाहन का इंतजार कर रहे होते हैं। काली थार में सवार गिरोह पहले बातों में उलझाता है, फिर थोड़ी दूर चलने के बाद निर्जन रास्तों की ओर मुड़ जाता है। गाड़ी के भीतर ही पीड़ित को डराया-धमकाया जाता है, उसके साथ मारपीट होती है और नकदी, मोबाइल तथा अन्य सामान छीन लिया जाता है। कई पीड़ितों से जनसेवा केंद्र या फोन के माध्यम से यूपीआई भुगतान भी करवाया गया, जिससे अपराध का दायरा और गंभीर हो गया है।

सरोजनीनगर में युवक को बनाया गया निशाना

कानपुर नगर के रावतपुर निवासी फिदा हुसैन ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह मंगलवार सुबह करीब नौ बजे स्कूटर इंडिया चौराहे के पास कानपुर लौटने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान काली एसयूवी उनके पास रुकी और चालक ने कानपुर जाने की बात कही। भरोसा करके बैठने के बाद उन्होंने पाया कि गाड़ी में चालक समेत चार लोग मौजूद थे। कुछ दूर चलने पर बदमाशों ने रास्ता बदल दिया, उन्हें गाड़ी में ही बंधक बनाया और लात-घूसों से पीटा। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। आरोप है कि बदमाशों ने उनके पास से 5,400 रुपये, मोबाइल फोन, घड़ी और ड्राइविंग लाइसेंस छीन लिया। इसके बाद जनसेवा केंद्र के माध्यम से उनके गूगल पे खाते से करीब एक लाख रुपये भी ट्रांसफर करा लिए गए। अंत में उन्हें कानपुर देहात के रनियां क्षेत्र के सुनसान रास्ते पर उतारकर छोड़ दिया गया। किसी तरह वह घर पहुँचे और फिर सरोजनीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

सरोजनीनगर थाना प्रभारी राजदेव प्रजापति ने पुष्टि की कि अज्ञात थार सवार बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और संभावित रास्तों पर वाहनों की आवाजाही का मिलान किया जा रहा है, हालांकि अभी तक आरोपियों का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।

कमता से बीबीडी तक शिक्षक की अगवानी

दूसरी घटना चिनहट के हसन विहार कॉलोनी निवासी शिक्षक बलराम पटेल के साथ हुई। वह बहराइच स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में तैनात हैं। उनकी पत्नी किरन देवी के अनुसार, 30 जनवरी की सुबह वह कमता में वाहन का इंतजार कर रहे थे, तभी काली एसयूवी में सवार तीन लोगों ने बहराइच छोड़ने का भरोसा देकर उन्हें गाड़ी में बैठा लिया। कुछ देर बाद बदमाश उन्हें बीबीडी इलाके में ले गए, जहाँ उन्होंने शिक्षक को बंधक बना लिया। आरोप है कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, उनका मुँह बांध दिया गया और जेब से 500 रुपये व मोबाइल फोन छीन लिया गया। बाद में उन्हें किसानपथ के पास बीकेटी क्षेत्र में उतारकर छोड़ दिया गया।

परिवार की चिंता और स्वास्थ्य पर असर

घर लौटने के बाद बलराम पटेल की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। परिवार ने घटना के बाद से गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्नी किरन देवी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से आम लोगों में डर का माहौल बन रहा है और रोजमर्रा की यात्रा भी असुरक्षित महसूस होने लगी है।

हाइडिल चौराहे पर टैंकर चालक से लूट

इससे पहले रविवार को हाइडिल चौराहे से एक टैंकर चालक को भी इसी तरह काली थार में लिफ्ट देकर कानपुर के घाटमपुर ले जाने के बहाने बैठाया गया था। बदमाशों ने रास्ते में उससे 60,000 रुपये लूट लिए और उसे आलू के खेत में छोड़कर फरार हो गए। इस मामले में भी पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुँच पाई है।

जांच की चुनौतियाँ

तीनों वारदातों में एक ही तरह की काली एसयूवी का इस्तेमाल होने से यह आशंका मजबूत हो रही है कि ये घटनाएँ किसी संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दी जा रही हैं। हालांकि अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई वारदातों के कारण समन्वित जांच में समय लग रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संदिग्ध वाहनों की पहचान, नंबर प्लेट की ट्रैकिंग और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

इन घटनाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर उन लोगों के लिए जोखिम बढ़ गया है जो रोजाना कामकाज के लिए साझा वाहनों या लिफ्ट पर निर्भर रहते हैं। पुलिस ने फिलहाल लोगों से सतर्क रहने, अनजान वाहनों में अकेले न बैठने और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना देने की अपील की है।

आगे की राह

फिलहाल पुलिस अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों को जोड़कर व्यापक जांच की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी नेटवर्क, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और डिजिटल भुगतान के सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाना प्रशासन के लिए प्राथमिकता बन चुका है।

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