CataractSurgery – गोरखपुर में ऑपरेशन के बाद फैला संक्रमण, जांच शुरू
CataractSurgery – गोरखपुर के सिकरीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद संक्रमण फैलने का मामला गंभीर रूप ले चुका है। एक फरवरी को हुए ऑपरेशन के बाद कई मरीजों की आंखों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके चलते अब तक पांच लोगों की आंखें निकालनी पड़ी हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, एक मरीज की आंख दिल्ली के एम्स में बुधवार रात सर्जरी कर हटाई गई। वहीं, पांच अन्य मरीजों की दृष्टि पूरी तरह जा चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

जांच समिति का गठन
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई है। समिति में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। टीम को अस्पताल परिसर, ऑपरेशन थियेटर और संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ मरीजों और उनके परिजनों के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट और बैक्टीरिया की आशंका
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल के विभिन्न हिस्सों से नमूने लेकर जांच की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सीलबंद लिफाफे में सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार, कुछ नमूनों में खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी की आशंका जताई गई है, जिसे संक्रमण का कारण माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष के लिए कल्चर जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।
एम्स में इलाज और सर्जरी
संक्रमण गंभीर होने पर कई मरीजों को दिल्ली स्थित एम्स रेफर किया गया था। खजनी क्षेत्र की 55 वर्षीय मीरा देवी की आंख में संक्रमण अत्यधिक बढ़ जाने के कारण डॉक्टरों को सर्जरी कर आंख निकालनी पड़ी। उनके परिजनों ने बताया कि डॉक्टरों ने संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए यह कदम जरूरी बताया। चार अन्य मरीजों को उपचार के बाद एम्स से छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन कुछ की दृष्टि प्रभावित होने की पुष्टि हुई है।
कुछ मरीजों की हालत में सुधार
हालांकि, सभी मामलों में स्थिति एक जैसी नहीं है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, कुल 30 मरीजों की दूरबीन पद्धति से सर्जरी की गई थी। इनमें से नौ मरीजों की हालत में सुधार हुआ है और वे उपचार के बाद घर लौट आए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इन मरीजों में संक्रमण का असर कम था, इसलिए समय पर इलाज से स्थिति संभाली जा सकी।
प्रशासन की निगरानी और आगे की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच की जा रही है। ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता, उपकरणों की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया और दवाओं की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यदि लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन ने मरीजों के इलाज को प्राथमिकता देने और प्रभावित परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखने की बात कही है।
यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और निजी अस्पतालों में मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े करता है। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि संक्रमण की जड़ क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन उपायों की जरूरत है।



