Gorakhpur Gender Change Husband Wife Dispute: गोरखपुर में जेंडर चेंज ने उजाड़ा सुहाग, अब कोर्ट में छिड़ी मुआवजे की जंग
Gorakhpur Gender Change Husband Wife Dispute: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बांसगांव इलाके से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने वैवाहिक रिश्तों की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। एक महिला जिसे सात साल पहले अपने जीवनसाथी के रूप में एक पति मिला था, उसे अब पता चला है कि उसका पति (Gender Reassignment Surgery Consequences) कराकर पूरी तरह महिला बन चुका है। ताज्जुब की बात यह है कि दो बच्चों के पिता ने इस लिंग परिवर्तन की प्रक्रिया को इतनी गोपनीयता से अंजाम दिया कि उसकी अपनी पत्नी को इसकी भनक लगने में पूरे दो साल लग गए। अब यह मामला थाने से निकलकर न्यायालय की दहलीज तक पहुंच चुका है, जहां रिश्तों की पेचीदगियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

सुहाग की सेज पर धोखे का साया
पीड़िता ने कोर्ट में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि शादी के शुरुआती दिनों से ही उसके पति का व्यवहार सामान्य नहीं था। एक निजी कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत होने के बावजूद, वह अपनी पत्नी के प्रति (Marital Discord and Abuse) किसी भी तरह का भावनात्मक लगाव नहीं रखता था। पत्नी का आरोप है कि उसका पति न केवल उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था, बल्कि छोटी-छोटी बातों पर मारपीट भी करता था। घर के भीतर का माहौल हमेशा तनावपूर्ण बना रहता था, लेकिन बच्चों के भविष्य की खातिर महिला सब कुछ चुपचाप सहती रही, इस उम्मीद में कि शायद वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा।
दोस्तों के साथ संबंध और पत्नी पर दबाव
महिला ने अपने पति पर बेहद गंभीर और अमानवीय आरोप लगाए हैं। अर्जी में कहा गया है कि पति अक्सर अपने दो पुरुष दोस्तों के साथ संबंध बनाता था और उसे भी (Unnatural Physical Relations Allegations) इन अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करता था। जब भी महिला ने इन हरकतों का विरोध करने की कोशिश की, उसे बेरहमी से पीटा गया और घर से निकालने की धमकियां दी गईं। महिला के अनुसार, उसके पति की अजीबोगरीब हरकतों ने उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था, लेकिन वह समाज के डर से खामोश रही।
दिल्ली में चोरी-छिपे बदला अपना जेंडर
लिंग परिवर्तन की इस चौंकाने वाली सचाई का खुलासा तब हुआ जब महिला के हाथ दिल्ली के एक अस्पताल का मेडिकल पर्चा लगा। पीड़िता के अनुसार, उसे दो साल बाद पता चला कि उसके पति ने (Secret Gender Transformation Process) दिल्ली जाकर गुपचुप तरीके से अपनी पहचान बदल ली है। इस राज के खुलते ही वैवाहिक जीवन में भूचाल आ गया। पत्नी का दावा है कि जेंडर बदलने के बाद पति का व्यवहार और भी हिंसक हो गया और पिछले साल उसने मारपीट कर महिला को घर से बाहर निकाल दिया, ताकि वह अपनी नई पहचान के साथ स्वतंत्र रह सके।
न्यायालय में हर्जाने और न्याय की गुहार
अपने और अपनी दो मासूम बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब पीड़िता ने कानून का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने कोर्ट से (Legal Compensation Claims India) मांग की है कि उसे भारी हर्जाना दिलाया जाए, क्योंकि उसके पति ने उसे धोखे में रखकर उसका जीवन बर्बाद कर दिया है। महिला का कहना है कि सामाजिक और मानसिक रूप से वह इतनी प्रताड़ित हो चुकी है कि अब उसके पास कानूनी लड़ाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। बच्चों के अंधकारमय भविष्य को लेकर वह काफी चिंतित है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठी है।
पति की दलील और निजता का अधिकार
वहीं दूसरी ओर, पति ने भी न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उसने पत्नी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद और झूठा करार दिया है। पति का कहना है कि उसे (Personal Liberty and Privacy Rights) अपना जीवन अपनी शर्तों पर जीने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। उसका तर्क है कि जेंडर बदलना उसका व्यक्तिगत फैसला है और इसके लिए उसे अपराधी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। कोर्ट अब दोनों पक्षों की दलीलों को सुन रहा है और यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि इस जटिल मामले में मानवीय संवेदनाओं और कानूनी अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
मासूम बेटियों के भविष्य पर संकट के बादल
इस पूरी कानूनी और सामाजिक लड़ाई के बीच दो मासूम बेटियों का भविष्य दांव पर लगा है। महिला का आरोप है कि पिता ने अपने फैसले से पहले एक बार भी अपने परिवार और (Child Welfare and Future Security) बच्चों के बारे में नहीं सोचा। समाज में जिस तरह की मानसिक परेशानियों का सामना महिला को करना पड़ रहा है, उसका असर बच्चों की परवरिश पर भी पड़ रहा है। पिता द्वारा जेंडर बदलने के बाद अब बच्चों के लिए समाज को जवाब देना और भी कठिन हो गया है, जिससे यह मामला केवल पति-पत्नी का न रहकर सामाजिक सरोकार का भी बन गया है।
गोरखपुर कोर्ट में सुनवाई और कानूनी पेचीदगियां
गोरखपुर के बांसगांव का यह मामला कानून विशेषज्ञों के लिए भी एक नई चुनौती पेश कर रहा है। भारतीय कानून में शादी के बाद (Complexity of Family Laws India) जेंडर बदलने और उसके बाद भरण-पोषण के नियमों को लेकर अक्सर बहस होती रही है। फिलहाल मामला विचाराधीन है और दोनों पक्षों की ओर से सप्लीमेंट्री अर्जियां दाखिल की गई हैं। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या पति ने वाकई क्रूरता की और क्या जेंडर छिपाना ‘धोखाधड़ी’ की श्रेणी में आता है। आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला ऐसे अन्य मामलों के लिए एक नजीर साबित हो सकता है।



