Jewelry Theft Case: जानें, अयोध्या दर्शन के बाद तनिष्क शोरूम में 6.61 लाख की सनसनीखेज चोरी का पूरा सच
Jewelry Theft Case: लखनऊ की पॉश कॉलोनी गोमतीनगर में स्थित तनिष्क शोरूम से हीरे जड़ित सोने के कंगन चोरी होने की घटना ने सराफा कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया था। यह कोई आम चोरी नहीं थी, बल्कि पूरी प्लानिंग, धैर्य और पेशेवर अंदाज में अंजाम दी गई वारदात थी। पुलिस जांच में सामने आया कि चार शातिर अपराधियों ने ग्राहक बनकर शोरूम में एंट्री ली और मौका पाकर कीमती कंगन उड़ा ले गए। इस चोरी की कीमत करीब 6.61 लाख रुपये आंकी गई है, जिसने (Jewelry Crime) को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए।

सीसीटीवी में कैद हुआ हर मूवमेंट
डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह के अनुसार, गोमतीनगर विस्तार सेक्टर-7 स्थित रिषिता मनहट्टन में रहने वाले सुशील कुमार, वरुणा रिटेल्स तनिष्क के निदेशक हैं। उन्होंने इस मामले में गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना कैद हो गई, जिसमें चार संदिग्ध ग्राहक बनकर गहनों को देखते और कर्मचारियों को उलझाते नजर आए। यही फुटेज आगे चलकर (CCTV Evidence) के रूप में पुलिस के लिए सबसे बड़ा हथियार बनी।
महाराष्ट्र से लखनऊ तक फैला था चोरी का नेटवर्क
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी किसी स्थानीय गिरोह के नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से जुड़े शातिर अपराधी हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में महाराष्ट्र के मानपाड़ा ठाणे निवासी बदर कुमार, रायगढ़ निवासी पांडुरंग गणपत पवार व मंगेश भाऊ और मध्य प्रदेश के बड़वानी निवासी शालुम चिंचॉकर शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से अलग-अलग शहरों में इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देते आ रहे थे, जो एक संगठित (Interstate Gang) की ओर इशारा करता है।
पहले रेकी, फिर आस्था का सहारा
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे 10 दिसंबर को लखनऊ के चारबाग स्थित एक होटल में ठहरे थे। वहां से उन्होंने गोमतीनगर के तनिष्क शोरूम की बारीकी से रेकी की। शोरूम की सुरक्षा, स्टाफ की संख्या और ग्राहकों की आवाजाही को समझने के बाद वे अचानक अयोध्या धाम चले गए। रामलला के दर्शन कर लौटने के बाद उन्होंने वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई, जिसने (Crime Planning) को और भी रहस्यमय बना दिया।
11 दिसंबर को हुआ ‘परफेक्ट क्राइम’
अयोध्या से लौटने के बाद आरोपी होटल पहुंचे और अगले दिन चेकआउट कर सीधे तनिष्क शोरूम पहुंचे। इस बार वे पूरी तरह तैयार थे। ग्राहक बनकर शोरूम में घुसे, काउंटर पर हीरे जड़ित कंगन दिखाने को कहा और कर्मचारियों को बातचीत में उलझा दिया। इसी दौरान दो जोड़ी कंगन गायब कर दिए गए। किसी को भनक तक नहीं लगी और आरोपी आसानी से निकल गए, जो एक (Perfect Heist) जैसा प्रतीत हुआ।
सराफा कारोबारियों को ही बनाते थे निशाना
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उनके निशाने पर हमेशा ज्वैलरी शोरूम ही रहते हैं। वे पहले रेकी करते हैं, फिर दो या तीन लोगों के छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर अलग-अलग समय पर शोरूम में प्रवेश करते हैं। एक सदस्य स्टाफ को बातों में उलझाता है, दूसरा गहनों को संभालता है और तीसरा नजर रखता है। इस रणनीति से वे कई शहरों में वारदात कर चुके हैं, जो (Jewelry Store Theft) की एक प्रोफेशनल शैली को दिखाता है।
सर्विलांस और फुटेज से पुलिस को मिली सफलता
इंस्पेक्टर गोमतीनगर बृजेश चंद्र तिवारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करते हुए पुलिस ने आरोपियों को ग्वारी पुल रेलवे लाइन के पास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी दिखाती है कि तकनीक के सही इस्तेमाल से (Police Investigation) कितनी प्रभावी हो सकती है।
बरामदगी और आगे की जांच
हालांकि शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने कई पुरानी घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकारी है, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए कंगन कहां बेचे गए या किस नेटवर्क के जरिए उन्हें ठिकाने लगाया गया। अन्य राज्यों में दर्ज मामलों से इनका लिंक भी खंगाला जा रहा है। माना जा रहा है कि इस गिरोह से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं, जिससे (Criminal Network) का पूरा चेहरा उजागर होगा।
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के ज्वैलरी शोरूम मालिकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कैमरे ही नहीं, बल्कि स्टाफ ट्रेनिंग, अलर्ट सिस्टम और ग्राहक वेरिफिकेशन भी जरूरी है। यह मामला एक सबक है कि शातिर अपराधी आस्था, भरोसे और भीड़ का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम दे सकते हैं, जिससे (Retail Security) पर नए सिरे से सोचने की जरूरत है।



