Kanpur News – भाजपा नेता को फंसाने वाले वकील को दो मामलों में क्लीनचिट
Kanpur News – उत्तर प्रदेश के कानपुर में चर्चित विवाद से जुड़े एक बड़े कानूनी घटनाक्रम में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को दो और मामलों में क्लीनचिट दे दी है। यह फैसला लंबी जांच, दस्तावेजी पड़ताल और गवाहों के बयानों के बाद लिया गया है। इससे पहले नवंबर 2025 में भी 37 शिकायतों को निराधार मानते हुए जांच एजेंसी ने उन्हें राहत दी थी। यह पूरा मामला भाजपा नेता रवि सतीजा द्वारा अगस्त 2025 में बर्रा थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें दुबे सहित कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

एसआईटी जांच की दिशा और शिकायतों का दायरा
‘ऑपरेशन महाकाल’ के तहत गठित एसआईटी को प्रारंभिक स्तर पर जमीन कब्जे और धमकी से जुड़ी कुल 61 शिकायतें मिली थीं। इनमें से 46 शिकायतें सीधे तौर पर अखिलेश दुबे और उनके सहयोगियों से संबंधित बताई गईं। जांच के दौरान टीम ने राजस्व रिकॉर्ड, बिक्री विलेख, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय लोगों के बयान खंगाले। नवंबर 2025 तक की पड़ताल में 37 मामलों में कोई ठोस आधार नहीं पाया गया था। अब दो और मामलों में भी साक्ष्य अपर्याप्त पाए जाने के बाद उन्हें क्लीनचिट दी गई है। अधिकारियों के अनुसार शेष शिकायतों पर या तो पहले ही कार्रवाई हो चुकी है या उन्हें साक्ष्य के अभाव में निस्तारित कर दिया गया है।
30 से अधिक मामलों में नहीं मिले ठोस सबूत
कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने स्पष्ट किया कि एसआईटी को अखिलेश दुबे के खिलाफ कुल 46 शिकायतें मिली थीं, जिनमें से अब तक 39 मामलों में आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह तथ्यों पर आधारित रही और जहां भी कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता थी, वहां प्रक्रिया अपनाई गई। जिन मामलों में पर्याप्त प्रमाण नहीं थे, उन्हें नियमों के तहत बंद कर दिया गया। पुलिस आयुक्त के मुताबिक, जमीन विवादों से जुड़े कई मामलों में पक्षकारों के बीच पुराने दीवानी विवाद पाए गए, जिन्हें आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई थी।
फरार आरोपी के घर पर कुर्की की कार्रवाई
इस बीच, मामले के एक अन्य आरोपी और अखिलेश दुबे के कथित सहयोगी अभिषेक बाजपेयी के खिलाफ नौबस्ता पुलिस ने 10 जनवरी को कुर्की की कार्रवाई की। भाजपा नेता रवि सतीजा की शिकायत के बाद से अभिषेक फरार बताया जा रहा है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा की अदालत ने संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था, जिसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया।
ढाई घंटे चली कार्रवाई, अगला नोटिस भी तैयार
पुलिस की टीम करीब ढाई घंटे तक मौके पर रही और घर के भीतर रखे सामान के साथ-साथ खिड़की-दरवाजे तक सील कर ले गई। इससे पहले आरोपित के घर पर नोटिस चस्पा किया गया था, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ। अब पुलिस रविवार को मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी विमल यादव के घर पर भी नोटिस चस्पा करने की तैयारी में है। जांच एजेंसियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, कानपुर के इस बहुचर्चित मामले में जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक ओर कई शिकायतों में आरोप निराधार पाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। एसआईटी ने साफ किया है कि आगे की कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जाएगी।



