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उत्तर प्रदेश

LandEncroachment – विधायक बेदीराम की जमीनों पर नगर निगम की सख्त जांच

LandEncroachment – सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक बेदीराम एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला लखनऊ के बाघामऊ और भरवारा-मल्हौर इलाके में कथित तौर पर सरकारी जमीन पर कब्जे से जुड़ा है। शिकायतों के आधार पर नगर निगम ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित भूखंडों की पैमाइश कराई जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और रिकॉर्ड के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

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विशेष कमेटी बनाकर शुरू हुई पड़ताल

नगर निगम ने जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है, जिसमें राजस्व विभाग और पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं। सोमवार को संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक सर्वेक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि जांच केवल एक या दो प्लॉट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव के अनुसार, संबंधित जमीनों के साथ-साथ आसपास की सरकारी भूमि, चकमार्ग, नाले और सार्वजनिक मार्गों की भी माप-तौल की जा रही है। इसके अलावा विधायक से जुड़े भूखंडों की रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज भी तलब किए गए हैं, ताकि कागजी अभिलेख और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।

डिजिटल नक्शों और अभिलेखों से हो रहा मिलान

प्रशासन को आशंका है कि इलाके में बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग के दौरान सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचा गया हो सकता है। जांच टीम डिजिटल नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड, विशेषकर खतौनी, का मौके की स्थिति से मिलान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं भी विसंगति पाई गई तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में मल्हौर और बाघामऊ के आसपास तेजी से रिहायशी कॉलोनियां विकसित हुई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगह बिना स्वीकृत नक्शे के ही बाउंड्रीवॉल खड़ी कर प्लॉट बेचे गए। सार्वजनिक रास्तों और नालों को भी नजरअंदाज किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

अवैध प्लॉटिंग के आरोपों से बढ़ी चिंता

करीब एक दर्जन गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के कुछ निवासियों का कहना है कि खरीदारों को पूरी जानकारी दिए बिना जमीन बेची गई। यदि जांच में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण साबित होता है तो इसका असर उन लोगों पर भी पड़ सकता है जिन्होंने अपनी बचत इन प्लॉटों में लगाई है।

फिलहाल प्रशासन यह स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी निर्दोष खरीदार को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। प्राथमिकता अवैध कब्जों और नियमों के उल्लंघन की पहचान करने की है।

संभावित कार्रवाई पर टिकी नजरें

अपर नगर आयुक्त ने कहा है कि यदि पैमाइश के दौरान सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण या कब्जा पाया गया, तो नियमानुसार उसे हटाया जाएगा। अवैध ढांचों पर कार्रवाई से इंकार नहीं किया गया है, लेकिन अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर होगा।

इस सख्ती के बाद इलाके में प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों में हलचल देखी जा रही है। वहीं, जिन परिवारों ने यहां जमीन खरीदी है, वे भी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।

नगर निगम की टीम अगले कुछ दिनों तक सर्वे और दस्तावेजों की जांच जारी रखेगी। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।

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