उत्तर प्रदेश

LandFraudCase – कानपुर में जमीन और मुआवजा धोखाधड़ी के दो मामलों में एफआईआर

LandFraudCase – कानपुर में जमीन और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने पुलिस और प्रशासन का ध्यान खींचा है। पनकी थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि हड़पने के आरोप में जहां पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी ओर मुआवजा राशि से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है। दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने सुनियोजित साजिश और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

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जमीन के सौदे में धोखे का आरोप

पनकी थाना क्षेत्र के ग्राम पतेहुरी निवासी जयपाल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने लायर्स एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री समेत चार नामजद और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। जयपाल सिंह का आरोप है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच कुछ लोगों ने मिलकर उनकी और उनके पिता की लगभग 7.25 बीघा जमीन को धोखे और दबाव के जरिए अपने नाम करा लिया। यह जमीन आराजी संख्या 128 और 19 में दर्ज बताई गई है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है।

इलाज के नाम पर सस्ते सौदे का आरोप

शिकायत के अनुसार, जयपाल के पिता भगवान सिंह लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। आरोप है कि उनकी बीमारी का फायदा उठाकर आरोपितों ने इलाज में मदद का भरोसा दिलाया और किश्तों में केवल साढ़े सात लाख रुपये देकर बहुमूल्य जमीन की रजिस्ट्री करा ली। कुछ हिस्से दबाव बनाकर बेहद कम कीमत पर लिखवाए गए, जबकि कुछ भूमि कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़प ली गई।

फोटो और हस्ताक्षर के दुरुपयोग का मामला

जयपाल सिंह ने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में उनकी पत्नी रीना सिंह से आयुष्मान कार्ड बनवाने का बहाना कर व्हाट्सएप के जरिए फोटो मंगाई गई। आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी में उसी फोटो और कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और करीब सात बीघा जमीन का पंजीकरण करा लिया गया। बाद में जब जमीन का बंटवारा हुआ, तब उन्हें इस कथित धोखाधड़ी की जानकारी मिली और उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच की दिशा

पनकी पुलिस का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। रजिस्ट्री दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने पीड़ित के बयान दर्ज कर लिए हैं और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

मुआवजा राशि से जुड़ी दूसरी धोखाधड़ी

इसी बीच कानपुर में एक अन्य मामले में झांसी निवासी पूजा देवी ने अपने पति की मृत्यु के बाद मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। पूजा देवी के पति रोडवेज में कर्मचारी थे और वर्ष 2014 में सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत न्यायालय में वाद दायर किया गया, जिसमें 2017 में उन्हें, उनके बच्चों और सास को मुआवजा देने का आदेश हुआ।

बैंक खाते से रकम निकाले जाने का आरोप

पीड़िता का आरोप है कि कानपुर के अधिवक्ताओं ने उनका और उनकी सास का बैंक खाता खुलवाया और फीस के नाम पर सास के खाते से एक लाख रुपये निकाल लिए। बाद में जब वह झांसी लौट गईं, तो खाते से जुड़ी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। वर्ष 2025 में पासबुक और एफडी की मांग करने पर भी सहयोग नहीं मिला। बैंक से स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि 2017 से 2019 के बीच कथित फर्जी हस्ताक्षरों से चेकबुक जारी कराकर करीब 2.99 लाख रुपये निकाल लिए गए।

पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट

इस मामले में पुलिस कमिश्नर के आदेश पर अधिवक्ता समेत छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, चेक और हस्ताक्षरों की जांच कराई जाएगी ताकि सच्चाई सामने आ सके। दोनों ही मामलों में पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।

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