उत्तर प्रदेश

Magh Mela Prayagraj 2026: महाकुंभ के बाद प्रयागराज की रेती पर शुरू हुई मोक्ष की कठिन साधना, जमकर उमड़ी भीड़…

Magh Mela Prayagraj 2026: संगम नगरी प्रयागराज में महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद अब माघ मेले का आगाज हो चुका है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर त्रिवेणी की पावन धाराओं में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो सुबह आठ बजे तक ही (Religious Congregation Statistics) के अनुसार लगभग 6.5 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित कर लिया था। विभिन्न मार्गों से आ रहे भक्तों के कारण पूरा मेला क्षेत्र ‘हर-हर गंगे’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा है।

Magh Mela Prayagraj 2026
Magh Mela Prayagraj 2026
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संतों का आगमन और कल्पवासियों का कठिन तप

माघ मेले की रौनक उस समय और बढ़ गई जब प्रमुख संत-महात्माओं ने संगम तट पर स्नान किया। इस बार किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणी नंद गिरी अपने अनुयायियों के साथ स्नान के लिए पहुंचीं, जो आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि शुक्रवार शाम तक करीब 15 लाख (Pilgrim Footfall Management) के आंकड़े को पार करते हुए श्रद्धालु और कल्पवासी रेती पर डेरा डाल चुके थे। कल्पवासी यहाँ एक माह तक संगम की रेती पर कठोर संयम और साधना करेंगे, जबकि संन्यासी अपने शिविरों में सत्संग और भजन-कीर्तन में लीन रहेंगे।

माघ मेले का अपना ‘लोगो’ और आधुनिक बाइक सेवा

इस वर्ष का माघ मेला कई मायनों में ऐतिहासिक और आधुनिक होने जा रहा है। महाकुंभ की तर्ज पर पहली बार माघ मेला का अपना विशिष्ट ‘लोगो’ जारी किया गया है, जो इसकी एक नई पहचान बन रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने एक अनोखी पहल करते हुए (Commuter Logistics Services) के तहत निजी कंपनियों के सहयोग से बाइक सेवा की शुरुआत की है। इससे वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालु भी आसानी से संगम के तट तक पहुँच सकेंगे, जिससे उनकी यात्रा सुगम और सुखद होगी।

क्यूआर कोड से सुरक्षा और त्वरित सहायता का दावा

प्रशासन ने मेले को पूरी तरह ‘डिजिटल’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पहली बार मेले के बिजली के खंभों पर विशेष क्यूआर कोड लगाए गए हैं। यदि किसी श्रद्धालु को कोई समस्या होती है या कोई आपात स्थिति आती है, तो वह (Emergency Response Systems) को सक्रिय करने के लिए बस कोड को स्कैन कर सकेगा। दावा किया जा रहा है कि इस तकनीक के माध्यम से मिनटों में मदद पहुँचाई जाएगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा और सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

आसमान से दीदार और पर्यटन के नए आयाम

प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने मेले को पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए कई घोषणाएं की हैं। इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा और पैरा ग्लाइडिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे वे (Aerial Tourism Experiences) का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा, सांस्कृतिक संध्याओं में देश के चर्चित कलाकारों को आमंत्रित किया गया है ताकि आस्था के साथ-साथ लोक कला का भी संगम हो सके। यह प्रयास माघ मेले को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखकर एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे रहा है।

सुरक्षा का अभेद्य किला और एआई कैमरों की नजर

मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि मेला क्षेत्र से लेकर पूरे प्रयागराज कमिश्नरेट तक 10 चक्र की सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के लिए (Artificial Intelligence Surveillance) आधारित कैमरों का जाल बिछाया गया है। 1154 सीसीटीवी कैमरों के जरिए जिले भर में निगरानी की जा रही है, जिसमें 260 एआई बेस्ड कैमरे विशेष रूप से संदिग्ध गतिविधियों और भीड़ के दबाव को भांपने के लिए लगाए गए हैं।

मोबाइल नेटवर्क की चुनौती और डिजिटल कनेक्टिविटी

मेला क्षेत्र में अक्सर मोबाइल नेटवर्क ठप होने की शिकायत रहती थी, जिसे लेकर मंडलायुक्त ने ठोस आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मेले की सफलता के लिए (Telecom Connectivity Infrastructure) बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रमुख मोबाइल कंपनियों से वार्ता की गई है और अतिरिक्त टॉवर व बूस्टर लगाए जा रहे हैं। शुक्रवार रात तक सभी तकनीकी खामियों को दूर करने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि श्रद्धालु अपने परिजनों से संपर्क में रह सकें और डिजिटल सेवाओं का उपयोग बिना किसी बाधा के कर सकें।

स्वास्थ्य सुविधाएं और जल पुलिस की मुस्तैदी

श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा के लिए मेला क्षेत्र में 75 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की गई है। आपात स्थिति के लिए 50 एम्बुलेंस हर वक्त तैयार रहेंगी। वहीं, जल पुलिस का एक विशेष थाना और कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। नदी में सुरक्षा के लिए (Water Safety Measures) के अंतर्गत 8 किलोमीटर तक डीप वाटर बैरिकेडिंग और 2 किलोमीटर के दायरे में जाल वाली सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 17 थानों और 40 पुलिस चौकियों के साथ यह मेला क्षेत्र एक सुरक्षित अभयारण्य की तरह विकसित किया गया है।

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