Safari – दुधवा टाइगर रिजर्व में सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने पर लगी रोक
Safari – दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगल सफारी के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सफारी के दौरान पर्यटक, जिप्सी चालक और नेचर गाइड किसी भी प्रकार का मोबाइल फोन अपने साथ नहीं ले जा सकेंगे। इसके साथ ही जंगल के भीतर वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोशूट या सोशल मीडिया के लिए रील बनाने जैसी गतिविधियों पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके स्वाभाविक व्यवहार को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

मोबाइल के कारण बढ़ रही थीं कई तरह की समस्याएं
अब तक सफारी के दौरान मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति थी, लेकिन कई मामलों में देखा गया कि कुछ पर्यटक और गाइड सफारी का आनंद लेने के बजाय वीडियो बनाने और लाइव अपडेट साझा करने में व्यस्त रहते थे। इस दौरान कई लोग बेहतर दृश्य पाने के लिए वाहन से बाहर झुक जाते थे या उतरने की कोशिश करते थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती थी। मोबाइल की रिंगटोन, तेज आवाज में वीडियो चलाना और अन्य ध्वनियां भी जंगल के शांत वातावरण को प्रभावित करती थीं। अधिकारियों के अनुसार, बाघ या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर मोबाइल के माध्यम से तुरंत सूचना फैलने से एक ही स्थान पर कई सफारी वाहन पहुंच जाते थे, जिससे जानवरों की सामान्य गतिविधियों में बाधा आती थी।
मानसून के लिए आज से बंद होगा पर्यटन सत्र
दुधवा टाइगर रिजर्व का मौजूदा पर्यटन सत्र मंगलवार की शाम होने वाली अंतिम सफारी के साथ समाप्त हो जाएगा। सामान्य तौर पर हर वर्ष 15 जून से पार्क को मानसून के कारण बंद कर दिया जाता है, लेकिन इस बार बारिश में देरी और पर्यटकों की मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग ने पर्यटन अवधि 15 दिन बढ़ा दी थी। अब जुलाई से लेकर अक्टूबर तक रिजर्व आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नया पर्यटन सत्र 15 नवंबर से शुरू किया जाएगा, जब मौसम और जंगल की परिस्थितियां फिर से अनुकूल होंगी।
बाघिन की मौत की जांच करेगी विशेष टीम
दूसरी ओर, 23 जून को दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में मृत मिली बाघिन के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। उत्तर प्रदेश के वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि वन्यजीव विशेषज्ञ ललित कुमार वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने भी राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट और निर्धारित मानकों के पालन संबंधी जानकारी मांगी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आए संभावित कारण
वन विभाग के अनुसार शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाघिन की मौत के पीछे कई संभावित कारण सामने आए हैं। इनमें हेमोरेजिक गैस्ट्राइटिस, शरीर में गंभीर परजीवी संक्रमण, अत्यधिक गर्मी और तनाव को प्रमुख वजह माना गया है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विशेष जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं का वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।