उत्तर प्रदेश

Unnav BJP MLA Viral Controversy: उन्नाव के दबंग विधायक ने लगाई ‘कुटाई’ वाली क्लास, बोले- सीधा इंसाफ होगा…

Unnav BJP MLA Viral Controversy: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक अनिल सिंह का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनके कड़े तेवर साफ सुनाई दे रहे हैं। इस (UP Politics Viral Audio News) ऑडियो क्लिप में विधायक जी अपने कार्यकर्ताओं को सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हिंसक रुख अपनाने की खुली सलाह देते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद से ही जिले के प्रशासनिक महकमे में डर और नाराजगी का माहौल है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग इसे दबंगई से जोड़कर देख रहे हैं।

Unnav BJP MLA Viral Controversy
Unnav BJP MLA Viral Controversy
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‘तीन-चार कंटाप रसीद कर देना’ और ऑन रिकॉर्ड धमकी

वायरल ऑडियो में विधायक अनिल सिंह और एक कार्यकर्ता के बीच की बातचीत बेहद चौंकाने वाली है। बातचीत की शुरुआत में विधायक यह सुनिश्चित करते हैं कि (Political Statement on Corruption) रिकॉर्डिंग चल रही है या नहीं। जैसे ही कार्यकर्ता ‘हां’ कहता है, विधायक जोश में आकर कहते हैं कि पुरवा क्षेत्र के भीतर यदि कोई भी अधिकारी घूस मांगेगा, तो अब जांच का इंतजार नहीं किया जाएगा। वह साफ शब्दों में कहते हैं कि जनता को भ्रष्ट अधिकारियों की मौके पर ही ‘कुटाई’ कर देनी चाहिए और तीन-चार कंटाप जड़ देने चाहिए। उनके इस बयान ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुटाई के बाद मुकदमा लिखवाने का अनोखा वादा

विधायक की दबंगई यहीं खत्म नहीं होती, उन्होंने कार्यकर्ता को यह भरोसा भी दिलाया कि पिटाई करने के बाद सजा का डर पालने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही (Law and Order Situation in UP) जनता भ्रष्ट अधिकारी को पीटकर आएगी, वह खुद उस अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा देंगे। उनका तर्क है कि जो कोई भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में अड़ंगा डालेगा या रिश्वतखोरी करेगा, उसे जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा। विधायक का यह ‘स्पॉट फैसला’ वाला अंदाज अब उनकी गले की फांस बनता दिख रहा है।

विधायक की सफाई: ‘पुराना है ऑडियो, भ्रष्टाचार से तंग आकर कहा’

जब यह विवाद बढ़ा और मीडिया ने विधायक अनिल सिंह से संपर्क किया, तो उन्होंने ऑडियो की सचाई स्वीकार कर ली। हालांकि, उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह (BJP MLA Anil Singh Statement) ऑडियो काफी पुराना है और उस समय अधिकारियों की मनमानी चरम पर थी। विधायक का दावा है कि क्षेत्र के अधिकारी जनता का काम करने के बदले मोटी रकम मांग रहे थे और बार-बार चेतावनी देने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा था। ऐसी मजबूर परिस्थितियों में जनता के हितों की रक्षा के लिए उन्हें कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग या कानून की धज्जियां?

अनिल सिंह ने अपने स्पष्टीकरण में जोर देकर कहा कि वह हमेशा से भ्रष्टाचार के कट्टर विरोधी रहे हैं। उनका कहना है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते (Public Representatives Accountability) जनता की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना उनका प्राथमिक कर्तव्य है। हालांकि, उन्होंने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या किसी संवैधानिक पद पर रहते हुए हिंसा को बढ़ावा देना उचित है। उन्होंने बस इतना कहा कि रिश्वतखोरों को सबक सिखाना जरूरी था ताकि गरीब जनता को उनका हक मिल सके।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘गुंडागर्दी को बढ़ावा दे रही है सत्ता’

ऑडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा और विधायक अनिल सिंह को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि (Opposition Attack on BJP MLA) एक विधायक का इस तरह खुलेआम मारपीट के लिए उकसाना अराजकता का प्रतीक है। उनका आरोप है कि भाजपा के नेता सत्ता के मद में चूर होकर खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि ऐसे जनप्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए जो जनता को हिंसा के रास्ते पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस विवाद ने जिले के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई (Corruption in Bureaucracy) अधिकारियों की रिश्वतखोरी इतनी बढ़ गई थी कि एक विधायक को ‘कुटाई’ जैसे शब्दों का सहारा लेना पड़ा? यदि प्रशासन सही ढंग से काम कर रहा होता और भ्रष्टाचार पर लगाम होती, तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है कि यह ऑडियो वास्तव में कितना पुराना है और इसके पीछे की मंशा क्या थी।

जनप्रतिनिधि बनाम कानून: एक गंभीर बहस

यह मामला केवल एक ऑडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। क्या जनता की समस्याओं के समाधान के लिए (Legal Action vs Personal Justice) कानून को हाथ में लेना सही है? एक तरफ विधायक के समर्थक इसे ‘जनता का इंसाफ’ कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ कानून के जानकार इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा आलाकमान अपने इस मुखर विधायक के खिलाफ क्या कदम उठाता है और उन्नाव की राजनीति किस करवट बैठती है।

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