UP Board Syllabus Change 2026: यूपी बोर्ड ने लिया बड़ा फैसला, अब किताबों के साथ हुनर भी होगा अनिवार्य
UP Board Syllabus Change 2026: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने आने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए एक ऐसी योजना तैयार की है, जो प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य की दिशा बदल देगी। एक अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले सत्र 2026-27 में यूपी बोर्ड अपने पारंपरिक पाठ्यक्रम में आमूलचूल परिवर्तन करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक (Educational Reform Policy) के तहत अब कक्षा नौवीं से ही व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रोजगारपरक कौशलों से भी लैस किया जाएगा।

कक्षा नौवीं से व्यावसायिक शिक्षा का आगाज
नए सत्र में यूपी बोर्ड के किसी भी स्कूल में दाखिला लेने वाले छात्र के लिए व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत एक विषय चुनना अब अनिवार्य होगा। इस बदलाव का असर आने वाले वर्षों की बोर्ड परीक्षाओं पर भी पड़ेगा। वर्तमान में हाईस्कूल के छात्र छह विषयों की परीक्षा देते हैं, लेकिन इस (Vocational Education Integration) के कारण साल 2028 में हाईस्कूल के परीक्षार्थियों को सात विषयों की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को माध्यमिक स्तर से ही आत्मनिर्भर बनाना है।
विषयों का नया और दिलचस्प संयोजन
कक्षा नौवीं के छात्रों के लिए विषयों का चयन अब पहले से अधिक विस्तृत होगा। अनिवार्य विषयों में हिंदी, अंग्रेजी या अन्य आधुनिक भारतीय भाषाएं शामिल रहेंगी। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों के साथ-साथ (Career Oriented Subjects) की एक लंबी सूची तैयार की गई है। छात्र अपनी रुचि के अनुसार कंप्यूटर, आईटी, मोबाइल रिपेयर, सोलर सिस्टम रिपेयर, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन या हेल्थ केयर जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में से किसी एक का चुनाव कर सकेंगे, जिससे उनकी तकनीकी समझ विकसित होगी।
सातवें विषय की अनिवार्यता और जॉब रोल प्रशिक्षण
बोर्ड ने सातवें विषय के रूप में ‘जीवन कौशल’ या व्यावसायिक कौशल विकास को अनिवार्य किया है। इसमें योग, नैतिक शिक्षा और शारीरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा के 16 विभिन्न सेक्टरों में से किसी एक जॉब रोल में प्रशिक्षण प्राप्त करने का विकल्प होगा। यह (Skill Development Training) सुनिश्चित करेगा कि छात्र जिस विषय को छठे विकल्प के रूप में चुन रहे हैं, सातवें विषय में उन्हें उससे अलग किसी कौशल में दक्षता हासिल हो। उदाहरण के तौर पर, मोबाइल रिपेयर सीखने वाला छात्र सातवें विषय में योग या कोई अन्य जॉब रोल चुन सकता है।
इंटरमीडिएट परीक्षा 2030 का नया स्वरूप
व्यावसायिक शिक्षा का यह नया मॉडल केवल हाईस्कूल तक सीमित नहीं रहेगा। कक्षा 11वीं में इसे साल 2029 से लागू किया जाएगा, जिसका प्रभाव 2030 की इंटरमीडिएट परीक्षा में दिखेगा। अब तक इंटर में छात्र पांच विषयों की परीक्षा देते थे, लेकिन नई (Intermediate Board Examination) व्यवस्था के तहत उन्हें छह विषयों की परीक्षा देनी होगी। वहीं, कृषि वर्ग के छात्रों के लिए विषयों की संख्या बढ़कर सात हो जाएगी। यह कदम छात्रों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ सीधे रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में उठाया गया है।
प्रयोगात्मक परीक्षा और अंक निर्धारण की पद्धति
व्यावसायिक विषयों की मूल्यांकन पद्धति को बहुत ही व्यावहारिक बनाया गया है। कक्षा नौवीं में 50 प्रतिशत अंक सैद्धांतिक और 50 प्रतिशत अंक प्रयोगात्मक होंगे, जिनका आंतरिक मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। वहीं, कक्षा 10वीं में (Board Practical Assessment) की जिम्मेदारी स्कूल की होगी, जबकि सैद्धांतिक परीक्षा बोर्ड आयोजित करेगा। यह संतुलन छात्रों को विषय की गहराई समझने और उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन में मदद करेगा, जिससे परीक्षा का दबाव भी कम होगा।
10 दिनों की अनिवार्य इंटर्नशिप का नियम
यूपी बोर्ड के नए नियमों के अनुसार, अब छात्रों को केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं रहना होगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने आसपास के औद्योगिक या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ समन्वय स्थापित करें। छात्रों ने जिस जॉब रोल में प्रशिक्षण लिया है, उन्हें उसमें न्यूनतम 10 दिनों की (Student Internship Program) अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी। यह वास्तविक कार्य अनुभव छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और उन्हें वास्तविक कामकाजी दुनिया की चुनौतियों से रूबरू कराएगा।
ग्रेडिंग प्रणाली और भविष्य की संभावनाएं
नैतिक शिक्षा, योग, खेल और पूर्व व्यावसायिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए बोर्ड अब अंक देने के बजाय ग्रेड प्रदान करेगा। यह ग्रेड छात्रों के (Academic Certification Process) का एक अभिन्न हिस्सा होगा और इसका उल्लेख अंक-पत्र में स्पष्ट रूप से किया जाएगा। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यूपी बोर्ड का यह कदम ‘नई शिक्षा नीति’ के उद्देश्यों को पूरा करने वाला है। इससे न केवल ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी, बल्कि छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करते-करते किसी न किसी हुनर में माहिर हो चुके होंगे।



