UP Cabinet Expansion 2026: सत्ता के गलियारों में मची हलचल, जानें किसके कटेंगे पत्ते और किसकी चमकेगी किस्मत…
UP Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश की सियासत में नए साल के आगमन के साथ ही एक बड़ा बदलाव दस्तक दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर मंगलवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है। इस बैठक में सरकार और संगठन के भविष्य को लेकर जो ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, उससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगामी कुछ दिनों में (political reshuffle) की एक बड़ी लहर देखने को मिल सकती है। बैठक में मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के कई दिग्गज चेहरे मौजूद रहे, जो इस बात की तस्दीक करता है कि फैसले काफी निर्णायक होने वाले हैं।

पंकज चौधरी की नई टीम का मिशन
हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने वाले पंकज चौधरी इस बैठक के केंद्र बिंदु रहे। संगठन के मुखिया के तौर पर वह अपनी एक नई और ऊर्जावान टीम तैयार करने की कवायद में जुटे हैं। माना जा रहा है कि वह पुराने चेहरों को नई जिम्मेदारियां सौंप सकते हैं और कुछ (organizational changes) के जरिए जमीनी स्तर पर पार्टी को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे। पंकज चौधरी के नेतृत्व में संगठन का ढांचा कैसा होगा, इसकी पहली झलक जनवरी के पहले सप्ताह में ही मिल सकती है, जब नए नामों पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
कैबिनेट विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती
योगी सरकार के आगामी कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की है। चूंकि वर्तमान में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वांचल से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में पार्टी हाईकमान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और बुंदेलखंड को (regional representation) देने का भारी दबाव है। इन क्षेत्रों के कद्दावर नेताओं को सरकार में शामिल कर पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि विकास और सत्ता में सबकी समान भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
दिल्ली दरबार में होगा अंतिम फैसला
लखनऊ में हुई इस अहम बैठक में केवल नामों के पैनल पर चर्चा हुई है, लेकिन अंतिम निर्णय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही लिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो जनवरी के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली का दौरा कर सकते हैं, जहां प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के साथ (final decision) पर मुहर लगेगी। हालांकि, विस्तार की सुगबुगाहट तेज है, लेकिन नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह मकर संक्रांति के बाद ही होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि हिंदू मान्यताओं में इस समय को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
दिग्गजों की मौजूदगी और संघ की राय
इस रणनीतिक बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें दोनों डिप्टी सीएम—केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक—सहित संगठन महामंत्री धर्मपाल भी मौजूद थे। केवल सरकार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS consultation) के पदाधिकारियों से भी इस संबंध में विस्तार से राय ली गई है। पूरे दिन लखनऊ में बैठकों का दौर जारी रहा और मुख्यमंत्री ने कई नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी राय जानी, ताकि किसी भी संभावित नाराजगी को समय रहते दूर किया जा सके।
भूपेंद्र चौधरी की कैबिनेट में संभावित एंट्री
निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। पश्चिम यूपी में जाट समुदाय के एक मजबूत चेहरे के तौर पर उनकी पहचान है। पार्टी के भीतर यह राय बन रही है कि उन्हें कैबिनेट में शामिल कर जाट वोट बैंक को (political coordination) के जरिए साधा जा सकता है। भूपेंद्र चौधरी को सरकार में जगह मिलना न केवल उनके व्यक्तिगत कद को बढ़ाएगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की घेराबंदी को तोड़ने में भी मददगार साबित होगा।
पीडीए नैरेटिव को काउंटर करने की रणनीति
समाजवादी पार्टी के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (PDA) वाले नैरेटिव ने हाल के दिनों में बीजेपी की चिंताओं को बढ़ाया है। योगी सरकार अपने इस कैबिनेट विस्तार के माध्यम से विपक्षी दलों के इस प्रभाव को कम करने की योजना बना रही है। पिछड़ी और दलित जातियों के प्रभावशाली चेहरों को (cabinet reshuffle) में प्राथमिकता देकर पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह सर्वसमाज के हितों की रक्षक है। जातीय समीकरणों की यह बिसात आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नए साल में नई रफ्तार और नई उम्मीदें
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नए साल में एक नई ऊर्जा और संशोधित टीम के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। संगठन और सरकार के बीच (strategic planning) का यह सामंजस्य राज्य के विकास कार्यों को कितनी गति देता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि जनवरी का महीना यूपी की राजनीति में बड़े उलटफेर और नए नेतृत्व के उभरने का गवाह बनेगा। कार्यकर्ता और नेता दोनों ही बेसब्री से उस लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं जो लखनऊ से दिल्ली भेजी गई है।



