UP Lekhpal Recruitment 2025: क्या लेखपाल भर्ती में आरक्षण की विसंगति पड़ेगी भारी या मिलेगा युवाओं को न्याय…
UP Lekhpal Recruitment 2025: उत्तर प्रदेश में राजस्व लेखपाल भर्ती को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक मोड सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी विसंगतियों का कड़ा संज्ञान लेते हुए राजस्व परिषद को सख्त चेतावनी जारी की है। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि (Government Job Reservation) प्रावधानों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या लापरवाही को शासन स्तर पर कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस हस्तक्षेप के बाद अब पूरे महकमे में जवाबदेही तय करने की कवायद तेज हो गई है।

आंकड़ों की दोबारा समीक्षा और राजस्व परिषद की सक्रियता
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद राजस्व परिषद अब हरकत में आ गया है। विभाग द्वारा श्रेणीवार रिक्तियों के आंकड़ों का पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। परिषद अब (Vacancy Data Re-verification) की प्रक्रिया को अंजाम दे रहा है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी विवाद से बचा जा सके। सूत्रों के मुताबिक, एक सप्ताह के भीतर संशोधित अधियाचन तैयार कर इसे उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) को भेज दिया जाएगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया को गति मिल सके।
सामाजिक न्याय और पारदर्शी चयन की प्रतिबद्धता
शासन की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था का अक्षरशः पालन करना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने लंबवत (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) दोनों प्रकार के आरक्षण को लेकर (Social Justice Commitment) पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रदेश के युवाओं को सामाजिक न्याय दिलाने की मूल भावना भी है। किसी भी स्तर पर मनमानी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब कठोर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी है।
रिक्त पदों की गणना में मिली गंभीर त्रुटियां
राजस्व लेखपाल के कुल 7,994 पदों के लिए 16 दिसंबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। विज्ञापन के प्रकाशन के बाद यह बात सामने आई कि जनपदों से भेजे गए आंकड़ों में भारी असंतुलन और विसंगतियां थीं। इन (Recruitment Process Discrepancies) ने भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब राजस्व परिषद प्रत्येक जनपद से श्रेणीवार कार्यरत और रिक्त पदों की गणना को पुनः सत्यापित कर रहा है, ताकि एक त्रुटिरहित अधियाचन आयोग को सौंपा जा सके।
सचिव कंचन वर्मा ने दिया पारदर्शिता का भरोसा
राजस्व परिषद की सचिव कंचन वर्मा ने इस संवेदनशील मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद परिषद ने आंकड़ों की समीक्षा को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। सचिव के अनुसार, संशोधित अधियाचन भेजे जाने के बाद (Transparent Selection Process) का मार्ग प्रशस्त होगा। विभाग का मुख्य लक्ष्य अब यह सुनिश्चित करना है कि लेखपाल भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से विवाद-मुक्त रहे और आरक्षण के नियमों का शत-प्रतिशत पालन हो।
भविष्य की भर्तियों के लिए एक सख्त चेतावनी
लेखपाल भर्ती में शासन का यह हस्तक्षेप केवल वर्तमान विज्ञापन तक सीमित नहीं है। इसे आने वाली सभी सरकारी भर्तियों के लिए एक मानक के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने संदेश दिया है कि (Reservation Rule Compliance) में किसी भी प्रकार की ढिलाई को शासन की अवहेलना माना जाएगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी त्रुटि पर जवाबदेही तय होना अब अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे व्यवस्था के प्रति युवाओं का विश्वास मजबूत हो सके।
सिलेबस और चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव की चर्चा
भर्ती में आरक्षण विसंगतियों के सुधार के साथ-साथ अभ्यर्थी अन्य बदलावों पर भी नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में (UPSSSC Exam Pattern) को लेकर भी कई खबरें सामने आई थीं, जिसमें मैथ्स को हटाए जाने और पीईटी स्कोर की वैधता पर चर्चा हुई थी। हालांकि, फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर केंद्रित है। शासन का मानना है कि एक बार आधारभूत आंकड़े सही हो जाएं, तो परीक्षा आयोजन में कोई तकनीकी बाधा नहीं आएगी।
युवाओं के हक में सरकार का बड़ा फैसला
अंततः, लेखपाल भर्ती में विसंगतियों को दूर करने का यह निर्णय प्रदेश के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि (Lawful Recruitment Execution) के माध्यम से केवल योग्य और पात्र उम्मीदवारों को ही अवसर मिले। मुख्यमंत्री के इस कदम से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में अब नियुक्तियां केवल योग्यता और संवैधानिक नियमों के आधार पर ही होंगी, जहां भ्रष्टाचार या लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं होगा।



