UP Voter List Revision 2026: लिस्ट से गायब हुए वोटरों को खोजेगी भगवा सेना, 10 दिन का ‘मिशन वोटर’ शुरू
UP Voter List Revision 2026: उत्तर प्रदेश के सियासी दंगल में शह-मात का खेल अब कागजों और सूचियों तक पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अगले 10 दिनों तक राज्य में अपने कार्यकर्ताओं को सिर्फ एक काम पर लगाया है और वह है ‘खोए हुए मतदाता’ की तलाश करना। पार्टी उन मतदाताओं की सूची खंगालेगी जिन्हें अनुपस्थित, मृतक या स्थायी रूप से स्थानांतरित (Political Campaign Strategy) के तहत बाहर कर दिया गया है। भाजपा को अंदेशा है कि कई जीवित लोगों को गलती से मृत घोषित कर दिया गया है।

हर बूथ सदस्य को मिला पांच वोटरों का टारगेट
पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बूथ कमेटियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। संगठन की योजना के अनुसार, बूथ कमेटी के हर सदस्य को प्रतिदिन कम से कम पांच नए मतदाता जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस (Grassroots Mobilization) के जरिए भाजपा उन शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ दोबारा बनाना चाहती है, जहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम कटने की खबरें आ रही हैं। पार्टी का मानना है कि एक-एक वोट जीत का अंतर तय करेगा।
2.89 करोड़ नामों के कटने से मची खलबली
एसआईआर यानी विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान पूरे प्रदेश में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटने के बाद सभी राजनीतिक दलों की नींद उड़ी हुई है। सत्ताधारी दल होने के नाते भाजपा में अधिक बेचैनी है, विशेषकर उन सीटों को लेकर जहां हार-जीत का अंतर बेहद कम रहता है। इस (Voter Data Analysis) के बाद पार्टी ने बाकी सभी सांगठनिक कार्यों को किनारे रखकर अपना पूरा ध्यान फॉर्म-6 भरवाने पर केंद्रित कर दिया है।
शीर्ष नेतृत्व ने संभाली कमान और की समीक्षा
शुक्रवार शाम को हुई एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा 16, 17 और 18 जनवरी को चलने वाले विशेष अभियान की सफलता सुनिश्चित करना था। संगठन ने स्पष्ट किया है कि (Party Leadership) का पूरा ध्यान अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की बारीकियों को समझने और उन खामियों को दूर करने पर है जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।
चार दिन का विशेष अभियान और सीईओ के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए चार विशेष तिथियां घोषित की हैं। इसमें 18 जनवरी, 31 जनवरी और 1 फरवरी की तारीखें प्रमुख हैं, जबकि एक तारीख जिला निर्वाचन अधिकारी तय करेंगे। इस (Election Commission Guidelines) के तहत सभी बूथों पर ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध रहेगी। मतदाताओं की सहायता के लिए हर केंद्र पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी ताकि फॉर्म भरने में कोई असुविधा न हो।
साहिबाबाद और गोरखपुर की गड़बड़ियों ने चौंकाया
मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसी शिकायतें भी सामने आई हैं जिन्होंने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट पर दशकों से रह रहे लोगों के नाम काट दिए गए, तो वहीं गोरखपुर में एक ही मकान में सैकड़ों मतदाताओं के नाम दर्ज मिले। विपक्षी दलों द्वारा की गई इस (Public Grievance) की शिकायत के बाद प्रशासन और राजनीतिक दल दोनों सतर्क हो गए हैं। भाजपा ऐसी ही विसंगतियों को दूर कर अपने वोट बैंक को सुरक्षित करना चाहती है।
फॉर्म-6 भरने वालों की संख्या में भारी उछाल
आंकड़ों की बात करें तो 6 जनवरी को ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद से उत्तर प्रदेश में मतदाता बनने की होड़ मची हुई है। पिछले कुछ ही दिनों में लगभग चार लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि पहले से ही 16 लाख से अधिक लोग लाइन में थे। विभिन्न दलों के (Booth Level Assistance) के जरिए हजारों फॉर्म भरे जा रहे हैं। अब तक कुल 20 लाख लोग फॉर्म-6 भर चुके हैं, जो प्रदेश की जागरूक राजनीति की ओर इशारा करता है।
शहरी सीटों पर भाजपा का विशेष फोकस
भारतीय जनता पार्टी का मुख्य ध्यान उन शहरी निर्वाचन क्षेत्रों पर है जहां मतदान का प्रतिशत अक्सर कम रहता है या जहां मतदाता सूची में नाम कटने की शिकायतें अधिक हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी (Eligible Voter) सूची से बाहर न रहे। भाजपा की यह सक्रियता दर्शाती है कि वह आगामी चुनावी चुनौतियों को लेकर कोई भी जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं है।



