उत्तर प्रदेश

UPPanchayatElection – सुलतानपुर में मतदाता सूची में शादी से पहले दर्ज हुए नाम

UPPanchayatElection – उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है, लेकिन सुलतानपुर जिले के एक गांव से सामने आया मामला पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन जहां सूची को त्रुटिरहित बनाने का दावा कर रहा है, वहीं मोतिगरपुर ब्लॉक क्षेत्र में ऐसे नाम दर्ज पाए गए हैं जो अभी तक कानूनी रूप से परिवार का हिस्सा ही नहीं बने हैं। यह मामला सिर्फ तकनीकी गलती का नहीं, बल्कि चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा माना जा रहा है, क्योंकि शिकायत के साथ आधिकारिक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने चर्चा तेज कर दी है और लोग मतदाता सूची बनाने की पूरी प्रक्रिया पर संदेह जता रहे हैं।

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Uppanchayatelection – सुलतानपुर में मतदाता सूची शादी से पहले
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मोतिगरपुर में सामने आया चौंकाने वाला प्रकरण
जयसिंहपुर तहसील के मैरी रंजीत गांव में रहने वाले उमेश सिंह ने एसडीएम को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में जानबूझकर गलत प्रविष्टियां की गई हैं। उन्होंने बताया कि सूची की क्रमांक संख्या 1268, मकान संख्या 154 पर संजना सिंह का नाम सचिन सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि दोनों की शादी अभी तक हुई ही नहीं है। उमेश ने इसे महज लिपिकीय भूल मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया बदलाव प्रतीत होता है, जिससे चुनाव में अनुचित लाभ उठाया जा सके।

शादी से पहले ही सरकारी रिकॉर्ड में ‘पत्नी’
शिकायतकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में शादी का आधिकारिक निमंत्रण पत्र भी पेश किया, जिसके अनुसार संजना और सचिन का विवाह 5 फरवरी 2026 को होना तय है। यानी तय तिथि से पहले ही दुल्हन का नाम ससुराल के पते पर मतदाता सूची में जोड़ दिया गया। इस तरह की प्रविष्टि ने गांव में भी चर्चा छेड़ दी है कि आखिर किस आधार पर यह बदलाव किया गया और किसने इसकी पुष्टि की। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सूची में ऐसे संदिग्ध नाम देखे गए हों।

एक नहीं, बल्कि दो संदिग्ध नाम
जांच में यह भी सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। मतदाता सूची की क्रमांक संख्या 918 पर कृतिका सिंह का नाम अनुराग सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज पाया गया, जबकि उनकी शादी भी इसी फरवरी महीने में होनी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि दोनों प्रविष्टियां एक ही पैटर्न की प्रतीत होती हैं, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि यह महज गलती नहीं बल्कि व्यवस्थित तरीके से किया गया काम हो सकता है।

आयु सीमा के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बूथ स्तर के अधिकारी यानी बीएलओ ने ऐसे युवाओं के नाम भी मतदाता सूची में जोड़ दिए हैं, जिनकी उम्र 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष पूरी नहीं हो रही थी। नियमों के अनुसार केवल उन्हीं नागरिकों को सूची में शामिल किया जा सकता है जिन्होंने निर्धारित तिथि तक वयस्कता प्राप्त कर ली हो। इस कथित उल्लंघन ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की तत्काल प्रतिक्रिया
मामला सामने आते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। जयसिंहपुर के एसडीएम प्रभात कुमार सिंह ने शिकायत को गंभीर बताते हुए इसे ‘जघन्य अपराध’ करार दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जांच के आदेश और संभावित कार्रवाई
एसडीएम ने तुरंत जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि यदि बीएलओ या किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी सूची की समीक्षा की जाएगी ताकि ऐसी अन्य गलत प्रविष्टियों का पता लगाया जा सके।

बीएलओ की भूमिका पर उठते सवाल
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बीएलओ पर अक्सर राजनीतिक दबाव रहता है और कुछ जगहों पर वे प्रभावशाली लोगों के कहने पर सूची में बदलाव कर देते हैं। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी ने सीधे तौर पर बीएलओ पर आरोप नहीं लगाया है, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

पंचायत चुनाव और वोटों की राजनीति
गांव के कई लोगों का मानना है कि पंचायत चुनाव में हर वोट मायने रखता है, इसलिए कुछ संभावित उम्मीदवार अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए पहले से ही मतदाता सूची में हेरफेर कराने की कोशिश करते हैं। शादी से पहले दुल्हन का नाम जोड़ना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि परिवार के वोटों की संख्या बढ़ाई जा सके।

आगे क्या होगा
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और शिकायतकर्ताओं से भी अतिरिक्त जानकारी मांगी जा रही है। यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरे जिले में मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बहस छेड़ सकता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।

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