Yogi Adityanath: यूपी में नक्शा पास कराना होगा आसान, जिला पंचायत नहीं अब ये विभाग देंगे मंजूरी
Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के शहरों में अनियोजित विकास और अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करने जा रही है। अब प्रदेश के विकास प्राधिकरणों की सीमा के भीतर जिला पंचायतों को नक्शा पास करने का अधिकार नहीं होगा। इसके बजाय, प्राधिकरण सीमा के बाहर नगर निगमों और अन्य स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया जाएगा ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से नक्शा पास कर सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को आवास, नगर विकास और पंचायती राज विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस नई कार्ययोजना को हरी झंडी दे दी है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य नक्शा पास करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।

जिला पंचायतों के अधिकारों में कटौती का मुख्य कारण
बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई जिला पंचायतें प्राधिकरणों द्वारा तैयार की गई महायोजना (Master Plan) के क्षेत्रों में भी नक्शा पास कर रही थीं। इससे शहरों का विकास बेतरतीब हो रहा था और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में बाधा आ रही थी। विकास प्राधिकरणों ने इस प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शहरी सीमाओं और प्राधिकरण क्षेत्रों में केवल उन्हीं संस्थाओं का नियंत्रण होगा जिनके पास तकनीकी विशेषज्ञता है। अब आवास विभाग जल्द ही इसका विस्तृत खाका तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण देगा।
आम जनता को मिलेगी राहत और आसान होगी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि आवासीय और व्यावसायिक भवनों के नक्शे पास करने की पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी को अपना घर बनाने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए ऑनलाइन मॉड्यूल और तकनीक का सहारा लिया जाए। जहां विकास प्राधिकरण मौजूद नहीं हैं, वहां नगर निगमों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। नगर निकायों को अपने संसाधन विकसित करने और जरूरत पड़ने पर नियमों में संशोधन करने के लिए भी कहा गया है ताकि विकास प्राधिकरणों जैसा ही पारदर्शी सिस्टम हर जगह लागू हो सके।
भवन विकास उपविधि का पालन करना होगा अनिवार्य
सरकार ने साफ कर दिया है कि नक्शा पास करने वाली जो भी संस्था हो, उसे ‘भवन विकास उपविधि’ (Building Bye-laws) का सख्ती से पालन करना होगा। नगर विकास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे विकास प्राधिकरणों के मौजूदा वर्किंग मॉड्यूल का अध्ययन करें और उसे नगर निकायों के लिए भी अपनाएं। इससे पूरे प्रदेश में भवन निर्माण के नियमों में एकरूपता आएगी और अवैध कॉलोनियों के बसने पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
न्यायिक सेवाओं में दिव्यांगों को आरक्षण और नई भर्ती नियमावली
इसी बैठक के साथ शासन ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पदों पर पदोन्नति के दौरान दिव्यांगजनों को चार प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। पहले यह व्यवस्था केवल सीधी भर्ती में थी, लेकिन अब इसे प्रोमोशन में भी लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही, पीसीएस-जे (PCS-J) की भर्ती प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास तीन साल की वकालत का अनुभव होना अनिवार्य होगा। साथ ही, चयन के लिए हिंदी भाषा का अच्छा ज्ञान होना भी एक जरूरी शर्त बना दी गई है, ताकि न्यायिक कार्यों में स्थानीय भाषा की सहजता बनी रहे।



