BLO Duty Relief Teachers: उम्रदराज शिक्षकों को चुनाव की ड्यूटी से मिली राहत, उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने सुनाया फरमान
BLO Duty Relief Teachers: उत्तराखंड के शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने उन शिक्षकों को बड़ी राहत दी है जो 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। अब (Teachers Service Extension) का लाभ ले रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की कठिन और भागदौड़ वाली ड्यूटी नहीं करनी होगी। शिक्षा विभाग ने निर्वाचन विभाग से अनुरोध किया है कि ऐसे अनुभवी शिक्षकों को चुनावी कार्यों के बोझ से मुक्त रखा जाए ताकि वे अपने सेवाकाल के अंतिम वर्षों में शिक्षण कार्य पर अधिक ध्यान दे सकें।

सत्रांत विस्तार और निर्वाचन कार्यों का बोझ
उत्तराखंड में प्री-एसआईआर का कार्य तेजी से चल रहा है और कई ऐसे शिक्षकों को इसमें लगाया गया था जिनकी उम्र 58 पार हो चुकी है। शिक्षक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी, क्योंकि (Educational Calendar Management) के तहत सेवा विस्तार पाने वाले शिक्षकों को आमतौर पर केवल शिक्षण के लिए रोका जाता है। अब विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन प्राइमरी या माध्यमिक शिक्षकों की आयु अधिक है, उनके स्थान पर युवा और स्वस्थ बीएलओ की नियुक्ति की जाए।
स्कूलों में पढ़ाई के दिनों में हुई वृद्धि
इस शैक्षणिक सत्र में उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्रों को पढ़ने का अधिक समय मिलने वाला है। शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती द्वारा जारी (School Academic Calendar 2026) के अनुसार, इस वर्ष स्कूल पिछले साल के मुकाबले तीन दिन ज्यादा चलेंगे। सालभर में कुल कार्यदिवसों की संख्या 243 तय की गई है, जो पिछली बार 240 थी। इसका मुख्य कारण यह है कि दीपावली समेत कई प्रमुख छुट्टियां रविवार के दिन पड़ रही हैं, जिससे शैक्षणिक सत्र का समय बढ़ गया है।
शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा
शैक्षिक कैलेंडर में छुट्टियों का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित शीतकालीन स्कूलों में कुल 122 दिन का अवकाश होगा, जबकि मैदानी इलाकों के (Summer Vacation Schedule) के तहत ग्रीष्मकालीन स्कूलों में 124 दिन की छुट्टी होगी। पांच हजार फीट से कम ऊंचाई वाले विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 27 मई से 30 जून तक चलेंगी। विभाग का लक्ष्य है कि बढ़े हुए कार्यदिवसों का लाभ उठाकर सिलेबस को समय पर पूरा किया जा सके।
अस्वस्थ और उम्रदराज बीएलओ को बदलने की प्रक्रिया
निर्वाचन विभाग ने भी मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे (BLO Appointment Criteria) की समीक्षा करें। यदि कोई बीएलओ शारीरिक रूप से अस्वस्थ है या उम्रदराज है, तो उसके स्थान पर ऊर्जावान युवा कर्मचारियों को तैनात किया जाए। इससे चुनावी डेटा के संकलन और प्री-एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
शिक्षकों पर विभागीय दबाव कम करने की पहल
शिक्षण के साथ-साथ अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ शिक्षकों की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। निर्वाचन विभाग ने अन्य विभागों को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि बीएलओ पर (Work Pressure Reduction) सुनिश्चित किया जाए। इससे शिक्षक प्री-एसआईआर से जुड़े कार्यों को बिना किसी मानसिक तनाव के जल्द पूरा कर सकेंगे। सरकार की इस पहल का शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है और इसे शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
शिक्षा की गुणवत्ता और चुनावी प्रबंधन के बीच संतुलन
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता और चुनावी प्रबंधन के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाने का प्रयास है। (Education Policy Uttarakhand) के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शिक्षकों का मुख्य ध्यान छात्रों के भविष्य पर रहे। सेवा विस्तार प्राप्त शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त करने से न केवल उन्हें मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि स्कूलों में अनुशासन और पढ़ाई का माहौल भी बेहतर होगा।



