उत्तराखण्ड

Dehradun Illegal Construction: जामा मस्जिद के अवैध निर्माण पर हुई बड़ी कार्रवाई, विरोध प्रदर्शन के बाद मिला एक महीने का अल्टीमेटम

 Dehradun Illegal Construction: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानो क्षेत्र अंतर्गत कुडियाल कंदोगल गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रशासन का दस्ता भारी लाव-लश्कर के साथ वहां पहुंचा। यहां स्थित जामा मस्जिद की पहली मंजिल पर किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार के सख्त निर्देश पर बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है। एमडीडीए (MDDA) की टीम ने बुधवार को पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद की प्रथम मंजिल को पूरी तरह सील कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान डोईवाला तहसील प्रशासन और रानीपोखरी पुलिस के अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

Dehradun Illegal Construction
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अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माण पर लगा ताला

प्राधिकरण के संयुक्त सचिव के आदेश पर एक उच्च स्तरीय टीम का गठन (Dehradun Illegal Construction) किया गया था, जिसने इस सीलिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया। सहायक कार्यकारी प्रमोद मेहरा और संयुक्त कार्यकारी स्वाति कोहली समेत कई अन्य (Authority Officials) की देखरेख में मस्जिद प्रबंधक द्वारा बिना अनुमति के बनाई गई पहली मंजिल को सील किया गया। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के दायरे में रहकर की जा रही है और किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुस्लिम सेवा संगठन का हल्ला बोल और प्रदर्शन

जैसे ही मस्जिद की पहली मंजिल को सील करने की खबर शहर में फैली, विरोध की चिंगारी भड़क उठी। देहरादून में मुस्लिम सेवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में एमडीडीए कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। संगठन का (Public Protest) इतना मुखर था कि एमडीडीए प्रशासन को उनके प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की मेज पर बैठना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

बातचीत के बाद प्रशासन ने दी बड़ी मोहलत

एमडीडीए कार्यालय पर हुए हंगामे और लंबी चली वार्ता के बाद प्राधिकरण के रुख में थोड़ी नरमी देखने को मिली। एमडीडीए प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की दलीलों को सुनते हुए मस्जिद प्रबंधन को अपने दावे और (Valid Documents) प्रस्तुत करने के लिए एक महीने का समय दिया है। यदि एक माह के भीतर प्रबंधन निर्माण से संबंधित वैध कागजात उपलब्ध करा देता है, तो नियमानुसार आगे का फैसला लिया जाएगा, अन्यथा सीलिंग की कार्रवाई को बरकरार रखते हुए ध्वस्तीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

राजधानी की सड़कों पर नगर निगम का प्रहार

मस्जिद पर हुई कार्रवाई के साथ-साथ देहरादून नगर निगम भी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। नगर निगम की विशेष टीमों ने तहसील चौक, प्रिंस चौक और सहारनपुर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में व्यापक (Encroachment Drive) चलाया। इस अभियान के दौरान सड़कों और फुटपाथों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। निगम की इस कार्रवाई का उद्देश्य शहर के यातायात को सुगम बनाना और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ खाली कराना है।

जब्त हुआ भारी मात्रा में अवैध सामान

निगम की टीमों ने इस अभियान के दौरान सिर्फ चेतावनी नहीं दी, बल्कि कठोर कार्रवाई करते हुए सामान की जब्ती भी की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फुटपाथों पर अवैध रूप से रखा गया करीब चार ट्रक और छह ट्रॉली सामान जब्त किया गया है। भूमि अनुभाग की (Municipal Enforcement) टीमों ने बल्लुपुर चौक से लेकर पंडितवाड़ी तक के पूरे स्ट्रेच को साफ किया। इसके अलावा, बिना अनुमति के शहर की सुंदरता बिगाड़ने वाले होर्डिंग्स और साइन बोर्ड्स को भी मौके से उखाड़ फेंका गया।

सिंगल यूज प्लास्टिक पर भी चला हंटर

सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य अनुभाग की टीम ने भी इस दौरान मोर्चा संभाला। शहर में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से प्रयोग करने वाले व्यापारियों और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों के खिलाफ (Financial Penalty) लगाने की कार्रवाई की गई। दर्जनों दुकानदारों के चालान काटकर उन्हें कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में स्वच्छता मानकों का उल्लंघन पाया गया, तो उनकी दुकानों को सील करने जैसी कठोर सजा भी दी जा सकती है।

अतिक्रमण मुक्त देहरादून के लिए मास्टर प्लान

नगर निगम और एमडीडीए की इन संयुक्त कार्रवाइयों से यह साफ संदेश गया है कि राजधानी के स्वरूप को बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। शहर के मुख्य चौराहों पर (Urban Planning) के तहत यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए नियमित रूप से ऐसे अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बुलडोजर का प्रहार निरंतर जारी रहेगा, ताकि देहरादून को एक स्वच्छ और सुंदर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा सके।

निष्कर्ष: क्या एक महीने में सुलझेगा मस्जिद विवाद?

मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर दी गई एक महीने की मोहलत ने फिलहाल तनाव को कम कर दिया है, लेकिन यह मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। आने वाले (Legal Deadline) के भीतर यदि प्रबंधन संतोषजनक प्रमाण नहीं दे पाया, तो एक बार फिर बुलडोजर की गूंज थानो क्षेत्र में सुनाई दे सकती है। फिलहाल, शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुफिया तंत्र और पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है ताकि किसी भी सांप्रदायिक या सामाजिक सौहार्द को बिगड़ने से रोका जा सके।

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