उत्तराखण्ड

GreenCess – उत्तराखंड में बॉर्डर पर बिना व्यवस्था खराब किए जारी है वसूली

GreenCess – दूसरे राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस की वसूली अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर सफल परीक्षण के बाद मंगलवार से यह व्यवस्था राज्य के कई अन्य प्रवेश बिंदुओं पर लागू कर दी गई। परिवहन विभाग का दावा है कि नई प्रणाली के तहत वाहनों को रोके बिना सेस वसूला जा रहा है, जिससे यातायात प्रभावित नहीं हो रहा और राजस्व संग्रह भी सुचारु रूप से हो रहा है।

Greencess Greencess Uttrakhnd Men Brdr Bina
Greencess Uttrakhnd Men Brdr Bina Greencess 100
WhatsApp Group Join Now

राज्य के 11 प्रवेश बिंदुओं पर लागू व्यवस्था

हरिद्वार के साथ देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिले में कुल 11 स्थानों पर ग्रीन सेस वसूली शुरू की गई है। इनमें नारसन, श्यामपुर, भगवानपुर, इमलीखेड़ा, रुद्रपुर, नादेही, सुतैया, तिमली, कुल्हाल, आशारोड़ी और धरमपुर जैसे प्रमुख बॉर्डर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में अन्य चेक पोस्टों पर भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि राज्य में प्रवेश करने वाले सभी बाहरी वाहनों को इस दायरे में लाया जा सके।

बिना रोके वसूली की नई तकनीक

उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहां वाहनों को रोके बिना ग्रीन सेस वसूला जा रहा है। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहन का नंबर स्कैन करते ही उसे सॉफ्टवेयर सिस्टम से जोड़ देते हैं। राज्यभर में ऐसे 37 कैमरे सक्रिय किए गए हैं। जैसे ही कोई बाहरी वाहन सीमा में प्रवेश करता है, उसका नंबर दर्ज होता है और यदि वह छूट की श्रेणी में नहीं आता तो संबंधित फास्टैग से तय राशि स्वतः कट जाती है।

कैसे काम करती है पूरी प्रक्रिया

कैमरों द्वारा वाहन नंबर पढ़े जाने के बाद सॉफ्टवेयर उसकी श्रेणी निर्धारित करता है। यदि वाहन सेस के दायरे में आता है तो सिस्टम सीधे फास्टैग खाते से राशि काट लेता है। कटौती के तुरंत बाद वाहन स्वामी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश भी भेजा जाता है। इससे पारदर्शिता बनी रहती है और चालक को अलग से भुगतान की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। विभाग का कहना है कि इस तकनीक से मानव हस्तक्षेप कम हुआ है और विवाद की संभावनाएं भी घटी हैं।

राजस्व और उपयोग की योजना

परिवहन विभाग के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था से प्रतिदिन लगभग 18 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। सालाना आधार पर यह राशि करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उप परिवहन आयुक्त शैलेष तिवारी ने बताया कि ग्रीन सेस से जुटाई गई धनराशि पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा सुधार और यातायात प्रबंधन जैसे कार्यों पर खर्च की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य बढ़ते यातायात दबाव के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।

किन वाहनों को मिली छूट

सभी दोपहिया वाहनों को ग्रीन सेस से पूरी तरह छूट दी गई है। उत्तराखंड में पंजीकृत वाहन भी इसके दायरे में नहीं आते। इसके अलावा सभी राज्यों के सरकारी वाहन, एंबुलेंस, अग्निशमन सेवा, सेना और अर्द्धसैनिक बलों के वाहन, पुलिस वाहन तथा कृषि कार्य में उपयोग होने वाले वाहन भी मुक्त रखे गए हैं। पर्यावरण के अनुकूल माने जाने वाले इलेक्ट्रिक, सीएनजी और हाइब्रिड वाहनों को भी इस शुल्क से राहत दी गई है।

आगे की तैयारी और विस्तार

अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में राज्य से जुड़ी सभी प्रमुख सड़कों पर एएनपीआर कैमरे स्थापित कर दिए जाएंगे। इससे बाहरी वाहनों की पहचान और वसूली की प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित यह मॉडल भविष्य में अन्य कर प्रणालियों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। फिलहाल सरकार इस व्यवस्था के प्रभाव और राजस्व आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर रही है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.