उत्तराखण्ड

Mastermind of Dehradun robbery case arrested: साले के पौने दो करोड़ पर ठहरी जीजा की गंदी नजर, देहरादून डकैती कांड में घर का भेदी ही निकला मास्टरमाइंड

Mastermind of Dehradun robbery case arrested: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पटेलनगर क्षेत्र में बीते आठ जनवरी की रात जो सनसनीखेज लूट हुई थी, उसकी गुत्थी सुलझते ही हर कोई दंग रह गया है। वन विहार इलाके में हुई इस वारदात में (Criminal betrayal by family members) का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जिसने रिश्तों पर से भरोसा उठा दिया है। पुलिस की तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि इस पूरी डकैती की पटकथा किसी और ने नहीं, बल्कि पीड़ित के अपने सगे फुफेरे जीजा ने लिखी थी। जिसे लगा था कि उसका साला रातों-रात करोड़ों का मालिक बन गया है, उसी लालच ने उसे अपराधी बना दिया।

Mastermind of Dehradun robbery case arrested
Mastermind of Dehradun robbery case arrested
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पौने दो करोड़ के बयाने ने जगाई जीजा की भूख

एसएसपी अजय सिंह ने मंगलवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मुख्य साजिशकर्ता बुशरान राणा पेशे से कपड़े की फेरी लगाता है। वह पीड़ित शराफत की सगी बुआ का दामाद है और उसका घर में अक्सर आना-जाना था। बुशरान को खबर मिली थी कि शराफत ने सहारनपुर में अपनी पुश्तैनी जमीन का सौदा किया है, जिसके बदले उसे (Cash involvement in real estate deals) के तौर पर लगभग एक करोड़ 80 लाख रुपये मिले हैं। इसी भारी-भरकम रकम को हड़पने के लिए बुशरान ने मुजफ्फरनगर के बदमाशों के साथ मिलकर खूनी साजिश रची।

बदमाशों को घर दिखाकर खुद छिप गया साजिशकर्ता

वारदात की रात यानी आठ जनवरी को बुशरान अपने चार अन्य साथियों के साथ देहरादून पहुंचा। पुलिस के अनुसार (Armed robbery execution tactics) को अंजाम देने के लिए उसने बदमाशों को शराफत का घर और गलियां दिखाईं, लेकिन खुद मौके से हट गया ताकि उसे कोई पहचान न सके। इसके बाद उसके साथियों ने घर में घुसकर हथियारों के बल पर पूरे परिवार को बंधक बना लिया। बदमाशों ने घर के कोने-कोने की तलाशी ली, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि वहां नोटों की गड्डियां रखी होंगी, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

जमीन का सौदा रद्द होने से अरमानों पर फिरा पानी

बदमाशों की बदकिस्मती और पीड़ित की खुशकिस्मती यह रही कि जमीन का वह बड़ा सौदा कुछ दिन पहले ही कैंसिल हो चुका था। जिस मोटी रकम की तलाश में लुटेरे आए थे, वह घर में मौजूद ही नहीं थी। (Financial loss during criminal activities) का सामना करते हुए बदमाशों के हाथ केवल एक लाख रुपये नकद और कुछ गहने ही लगे। इसी खींचतान में उन्होंने परिजनों को काफी डराया और धमकाया। सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से पुलिस आखिरकार इन अपराधियों के करीब तक पहुंच गई।

तेलपुर चौक के पास दबोचा गया लुटेरों का गिरोह

पटेलनगर पुलिस और स्पेशल टीम ने मंगलवार सुबह तेलपुर चौक के पास घेराबंदी कर चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान एक संदिग्ध वाहन को रोकने पर पुलिस ने पांचों आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में मास्टरमाइंड बुशरान राणा के साथ (Muzaffarnagar based criminal gangs) के आसिफ, इरफान, राजकुमार और वासिफ शामिल हैं। इनके पास से लूट की रकम और वारदात में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इनके पुराने आपराधिक इतिहास की भी कुंडली खंगाल रही है।

परिजनों ने रची थी अपहरण की झूठी कहानी

हैरानी की बात यह है कि इस लूट में शामिल कुछ बदमाशों के परिजनों ने दो दिन पहले ही मुजफ्फरनगर के खतौली थाने में उनके अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों को लगा था कि वे (Missing person reports and crime) का सहारा लेकर पुलिस को गुमराह कर देंगे। लेकिन मंगलवार को जैसे ही देहरादून पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी की खबर सार्वजनिक की, मुजफ्फरनगर में बैठे इनके परिजनों के होश उड़ गए और असली सच्चाई सबके सामने आ गई कि वे लुटेरे बन चुके हैं।

42 तोले सोने का दावा निकला पूरी तरह फर्जी

जांच के दौरान एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब पुलिस ने मकान मालिक के दावों की पड़ताल की। पीड़ित पक्ष ने शुरुआत में 42 तोले सोना लूटे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन (Verification of stolen property claims) के दौरान यह बात सच साबित नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पास से मिले जेवर बहुत कम मात्रा में हैं। इंस्पेक्टर सीबीएस अधिकारी ने बताया कि बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई लूट की कहानी की भी जांच की जा रही है और सच्चाई जानने के लिए आरोपियों को रिमांड पर लिया जाएगा।

कोर्ट में पेशी और रिमांड की कानूनी प्रक्रिया

मंगलवार को सभी पांचों आरोपियों को देहरादून की स्थानीय अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है ताकि (Judicial process for robbery suspects) को आगे बढ़ाया जा सके और लूटे गए बाकी जेवरों की बरामदगी की जा सके। एसएसपी ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि जिस तरह से पेशेवर तरीके से इस गिरोह को पकड़ा गया, वह काबिले तारीफ है। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी उत्तराखंड के अन्य जिलों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।

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