उत्तराखण्ड

Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 Update: साल 2026 में नहीं होगी नंदा देवी राजजात यात्रा, जानें क्यों टला करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र…

Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 Update: उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर मानी जाने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। साल 2026 के अगस्त-सितंबर महीने में जिस भव्य यात्रा का प्रस्ताव था, वह अब इस वर्ष आयोजित नहीं की जाएगी। लगभग 280 किलोमीटर की इस कठिन और बेहद पवित्र पदयात्रा को (Himalayan Pilgrimage Traditions) के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जिसे ‘हिमालय का महाकुंभ’ भी कहते हैं। नंदा देवी राजजात समिति द्वारा लिए गए इस आकस्मिक फैसले ने देश-दुनिया में फैले मां नंदा के करोड़ों भक्तों को थोड़ा मायूस कर दिया है।

Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 Update
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सुरक्षा कारणों से बदला गया यात्रा का साल

नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगस्त और सितंबर के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में (Weather Security Risks) की संभावना काफी अधिक रहती है। इस समय पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी और विषम मौसमी परिस्थितियों के चलते यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यात्रा के सुगम संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अब इसे वर्ष 2027 में आयोजित करने का फैसला लिया गया है।

नौटी गांव में होगा आधिकारिक स्थगन का ऐलान

कर्णप्रयाग में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. कुंवर ने बताया कि राजजात-2026 को स्थगित करने की औपचारिक घोषणा आगामी 23 जनवरी को की जाएगी। नौटी गांव में होने वाले (Traditional Ritual Program) जिसे ‘मनौती’ कहा जाता है, उसी दौरान इस निर्णय को सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाएगा। समिति का मानना है कि उच्च हिमालयी दुर्गम रास्तों पर हजारों की भीड़ को संभालना मौसम की बेरुखी के बीच असंभव हो जाता है, इसलिए एक साल का इंतजार करना ही बुद्धिमानी है।

क्या आपसी मतभेद बने आयोजन टलने की वजह

भले ही समिति ने मौसम और सुरक्षा को मुख्य कारण बताया है, लेकिन गलियारों में कुछ और भी चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों की मानें तो कुरूड़ और नौटी के बीच यात्रा के शुभारंभ स्थल को लेकर उत्पन्न हुए (Religious Leadership Dispute) ने भी इस स्थगन में भूमिका निभाई है। हाल के दिनों में नंदा राजजात और नंदाजात के आयोजन को लेकर दो पक्षों में कुछ मतभेद उभरे थे। हालांकि, समिति के पदाधिकारियों ने इन खबरों को दरकिनार करते हुए दोहराया है कि फैसला पूरी तरह जनहित और यात्रियों की सुविधा के आधार पर लिया गया है।

नंदा देवी राजजात का पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व

यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि देवी नंदा को उनके मायके से ससुराल विदा करने का एक भावुक उत्सव है। चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाने वाली यह (Sacred Trekking Event) लगभग 19 से 22 दिनों तक चलती है। इस दौरान श्रद्धालु उबड़-खाबड़ रास्तों, घने जंगलों और बर्फीले पहाड़ों को पार करते हैं। हर 12 साल में आयोजित होने वाली इस यात्रा का आध्यात्मिक महत्व इतना अधिक है कि इसमें शामिल होने के लिए सात समंदर पार से भी लोग खींचे चले आते हैं।

नंदा देवी राजजात प्राधिकरण के गठन की मांग

पत्रकार वार्ता के दौरान समिति ने राज्य शासन के समक्ष कुछ दूरगामी प्रस्ताव भी रखे हैं। समिति चाहती है कि हिमालय सचल महाकुंभ प्राधिकरण की तर्ज पर एक स्वतंत्र (Autonomous Religious Authority) का गठन किया जाए। यह प्रस्तावित प्राधिकरण न केवल मुख्य राजजात, बल्कि नंदा लोकजात और प्रतिवर्ष होने वाली वार्षिक यात्राओं के विकास की योजनाएं तैयार करे। इससे यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे का सुधार होगा और भविष्य में होने वाले आयोजनों को अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा।

राजवंशी कुंवरों के पास रहेगा पारंपरिक दायित्व

समिति ने शासन को भेजे गए प्रस्तावों में एक बात बिल्कुल साफ कर दी है कि आधुनिकता के दौर में भी परंपराओं से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नंदा देवी राजजात का पारंपरिक और धार्मिक संचालन (Garhwal Royalty Heritage) के अधीन ही रहेगा। गढ़वाल के राजवंशी कुंवरों के पास जो धार्मिक अधिकार सदियों से सुरक्षित हैं, वे भविष्य में भी बरकरार रहेंगे। प्राधिकरण का काम केवल व्यवस्थागत और प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रहेगा, ताकि धर्म और विकास का संतुलन बना रहे।

280 किलोमीटर का दुर्गम सफर और आस्था की परीक्षा

नंदा देवी राजजात के 20 पड़ाव किसी भी इंसान की शारीरिक और मानसिक क्षमता की परीक्षा लेते हैं। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित (High Altitude Challenges) के बावजूद श्रद्धालु नंगे पांव और कंधों पर डोलियां लेकर चलते हैं। रूपकुंड जैसे रहस्यों से भरी जगहों से गुजरते हुए होमकुंड में यात्रा का समापन होता है। समिति का मानना है कि इस बार मिले अतिरिक्त समय का उपयोग यात्रा मार्ग के जीर्णोद्धार और सुरक्षा इंतजामों को और पुख्ता करने में किया जा सकेगा।

श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने की अपील

यात्रा के स्थगित होने से पर्यटन और स्थानीय व्यवसाय पर भी असर पड़ने की संभावना है, लेकिन समिति ने सभी पक्षों से धैर्य की अपील की है। अगले वर्ष यानी 2027 में जब (Devotional Festival Planning) को नई ऊर्जा के साथ अमली जामा पहनाया जाएगा, तब सुविधाएं और भी बेहतर होंगी। फिलहाल, मां नंदा के भक्त 23 जनवरी के मनौती कार्यक्रम पर नजरें टिकाए हुए हैं, जहाँ से अगले साल की यात्रा की नई रूपरेखा और संकल्प पत्र तैयार किया जाएगा।

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