उत्तराखण्ड

Tuni Dehradun Triple Murder Suspicion: खौफनाक रात और चली गईं तीन बेगुनाह जिंदगियां, त्यूणी कांड में अपनों ने खोए लाल, अब न्याय की उठी गुहार

Tuni Dehradun Triple Murder Suspicion: उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित देहरादून की त्यूणी तहसील अचानक उस वक्त दहल उठी, जब भूठ गांव के एक पुराने स्कूल भवन में तीन युवकों के शव बरामद हुए। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन को झकझोर दिया है, बल्कि (Mystery Behind Triple Death) ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है। मारे गए लोगों में दो सगे भाई शामिल थे, जिनके पिता की सिसकियां अब इंसाफ की मांग कर रही हैं। जिस स्थान को शिक्षा का मंदिर माना जाता था, वहां हुई इस संदिग्ध मौत ने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं।

Tuni Dehradun Triple Murder Suspicion
Tuni Dehradun Triple Murder Suspicion
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आखिरी फोन कॉल और वो खौफनाक मंजर

मृतकों के परिजनों ने जो खुलासा किया है, वह रूह कंपा देने वाला है। उनके मुताबिक, 6 दिसंबर की रात करीब पौने एक बजे तीनों युवकों ने फोन कर अपने घर पर डर का इजहार किया था। उन्होंने बताया था कि (Unknown Assailants Threat) के कारण वे डरे हुए हैं और कोई बाहर से उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है। यह कॉल उनकी जिंदगी की आखिरी बातचीत साबित हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस रात कमरे के बाहर कुछ ऐसा घट रहा था जो सामान्य नहीं था।

चोट के निशान और हत्या की गहरी साजिश

परिजनों का आरोप है कि यह महज कोई हादसा नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है। जब शवों को देखा गया, तो उनके चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान थे और (Forensic Evidence Investigation) की आवश्यकता को पुख्ता करते हुए एक युवक का हाथ भी टूटा हुआ मिला। पिता केवल राम का कहना है कि अगर यह मौत स्वाभाविक होती, तो शरीर पर इतने घाव नहीं होते। इन निशानों ने पुलिस की उस शुरुआती थ्योरी पर सवाल उठा दिए हैं जो इसे एक साधारण दुर्घटना मान रही थी।

बंद कमरे का रहस्य और गैस का रिसाव

घटना का पता तब चला जब रविवार सुबह तक मजदूर अपने कमरे से बाहर नहीं आए। ग्रामीणों ने जब खिड़की से झांका तो उन्हें रसोई गैस की तेज दुर्गंध महसूस हुई। राजस्व पुलिस ने जब (Locked Room Mystery) को सुलझाने के लिए दरवाजा तोड़ा, तो अंदर संदीप, प्रकाश और संजय बेसुध पड़े थे। कमरे की एकमात्र खिड़की अंदर से बंद थी और पास ही रखा गैस सिलेंडर लीक हो रहा था। प्रथम दृष्टया इसे दम घुटने से हुई मौत माना गया, लेकिन परिजनों के दावों ने कहानी को पूरी तरह पलट दिया है।

मजदूरी की तलाश और मौत का आगोश

मृतकों की पहचान संदीप (25), प्रकाश (35) और संजय (28) के रूप में हुई है, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए गांव आए थे। ये तीनों युवक (Migrant Worker Safety) के मानकों के बीच भूठ गांव के वर्तमान प्रधान अमित राणा के मकान निर्माण कार्य में लगे थे। उन्हें रहने के लिए राजकीय प्राथमिक विद्यालय का पुराना कमरा दिया गया था। दो बेटों को एक साथ खोने वाले पिता केवल राम के लिए यह क्षति अपूरणीय है, जिन्होंने प्रशासन से निष्पक्षता की गुहार लगाई है।

प्रशासन का आश्वासन और जांच की आंच

इस संवेदनशील मामले पर प्रशासन भी अब हरकत में आता दिखाई दे रहा है। उपजिलाधिकारी (SDM) त्यूणी, प्रेम लाल ने स्वीकार किया है कि मृतकों के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए एक औपचारिक पत्र सौंपा है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि (Legal Action and Inquiry) के तहत मामले की गहराई से जांच की जाएगी। प्रशासन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उस रात की कॉल डिटेल्स खंगालने की तैयारी कर रहा है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

न्याय की बाट जोहता डिरनाड गांव

मृतक प्रकाश और संजय के पैतृक गांव डिरनाड कलिच में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों युवक बेहद मेहनती और शांत स्वभाव के थे, उनकी किसी से कोई पुरानी रंजिश नहीं थी। अब ग्रामीणों की मांग है कि (Criminal Conspiracy Probe) को तेजी से आगे बढ़ाया जाए ताकि उन चेहरों को बेनकाब किया जा सके जो इस कथित हादसे के पीछे छिपे हो सकते हैं। एक गरीब पिता की आंखों के आंसू तब तक नहीं सूखेंगे जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।

क्या बंद कमरा उगल पाएगा सच?

त्यूणी का यह मामला अब उत्तराखंड पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बंद कमरे के अंदर गैस रिसाव का होना और साथ ही शरीर पर चोटों के निशान मिलना, (Suspicious Death Investigation) को एक जटिल मोड़ पर ले आता है। क्या वह फोन कॉल वाकई किसी खतरे का संकेत थी? क्या बाहर से कोई वाकई उन्हें मारना चाहता था? इन सभी सवालों के जवाब अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की तफ्तीश पर टिके हैं।

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