Uttarakhand Cold Wave Alert 2026: रुला रही हैं जमी हुई झीलें और ठिठुरती सांसें, बड़े खतरे की आहट है यह बदलाव
Uttarakhand Cold Wave Alert 2026: हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड में इन दिनों कुदरत का एक ऐसा चेहरा देखने को मिल रहा है जो जितना सुंदर है, उतना ही जानलेवा भी। मौसम विभाग ने 12 और 13 जनवरी को पूरे प्रदेश में कड़ाके की शीतलहर चलने की (extreme weather warning) जारी की है, जिसने शासन से लेकर आम जनता तक की नींद उड़ा दी है। अगले पांच दिनों तक सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी जारी रहेगी, लेकिन सुबह के वक्त छाने वाला घना कोहरा इंसान की दृष्टि और हौसले दोनों का इम्तिहान लेने वाला है।

मसूरी की अटल उद्यान झील बनी बर्फ का मैदान
पहाड़ों की रानी मसूरी में पारा इस कदर गिरा है कि वहां का जीवन जैसे थम सा गया है। कड़ाके की ठंड और लगातार गिरते पाले के कारण अटल उद्यान की झील पूरी तरह (frozen lake phenomena) में तब्दील हो चुकी है। यह नजारा पर्यटकों के लिए भले ही रोमांचक हो, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए यह पानी के संकट और हड्डियों को गला देने वाली सर्दी का पैगाम लेकर आया है। रात के समय तापमान शून्य से नीचे जाने के कारण नलों में पानी जम रहा है और सड़कों पर बिछी पाले की सफेद चादर हादसों को दावत दे रही है।
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में येलो अलर्ट
मैदानी जिलों की स्थिति भी कुछ कम डरावनी नहीं है, जहाँ हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में मौसम विभाग ने शीतलहर का येलो अलर्ट घोषित किया है। रविवार को हरिद्वार में इस सीजन का सबसे (lowest temperature record) दर्ज किया गया, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गंगा के तटों पर सुबह की आरती के समय भक्तों की संख्या में भारी कमी देखी जा रही है, क्योंकि गलन भरी हवाएं सीधे शरीर को चीरती हुई महसूस हो रही हैं।
देहरादून में धूप की तपिश और रातों की ठिठुरन
राजधानी देहरादून का मिजाज थोड़ा अलग नजर आ रहा है, जहाँ दिन में खिलने वाली धूप लोगों को कुछ राहत तो दे रही है, लेकिन सूरज ढलते ही स्थिति भयावह हो जा रही है। रविवार को दून का अधिकतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा, लेकिन रात होते ही यह (diurnal temperature variation) 6.0 डिग्री सेल्सियस तक जा गिरा। तापमान का यह भारी अंतर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, जिससे अस्पतालों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी है।
पंतनगर और मुक्तेश्वर में कांपता हुआ पारा
पंतनगर में न्यूनतम तापमान ने सबको चौंका दिया है, जहाँ पारा सामान्य से तीन डिग्री नीचे गिरकर महज 1.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। मुक्तेश्वर और नई टिहरी जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भी (subzero climatic conditions) का अहसास हो रहा है, जहाँ न्यूनतम तापमान क्रमशः 1.5 और 2.0 डिग्री दर्ज किया गया। मैदानी इलाकों में कोहरे के कारण नमी इतनी ज्यादा है कि धूप निकलने के बावजूद गलन कम होने का नाम नहीं ले रही है।
पाले का आतंक और ठप पड़ता जनजीवन
पहाड़ी क्षेत्रों में केवल कोहरा ही नहीं, बल्कि पाला भी एक बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है। सड़कों पर जमी पाले की पतली और फिसलन भरी परत (road safety hazards) को कई गुना बढ़ा रही है, जिससे वाहन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है। कई दूरदराज के गांवों में पाइपलाइनों के फटने की खबरें भी आ रही हैं, जिससे पेयजल आपूर्ति बाधित हुई है। खेती-किसानी पर भी इस कोरी ठंड का बुरा असर पड़ रहा है, जिससे किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं।
घने कोहरे की चादर में लिपटे छह जिले
मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के अलावा नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून में (dense fog visibility) बेहद कम रहने वाली है। कुछ स्थानों पर दृश्यता 10 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे हवाई और रेल यातायात पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों को बेवजह लंबी यात्राओं से बचने और केवल बहुत जरूरी होने पर ही सुबह के वक्त निकलने की सलाह दी है।
आने वाले दिनों के लिए सावधानी की दरकार
उत्तराखंड में ठंड का यह कहर अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। मौसम विभाग की (meteorological department forecast) के अनुसार, शीतकालीन बारिश न होने के कारण यह ‘कोरी ठंड’ और भी ज्यादा घातक साबित हो रही है। जब तक बर्फबारी के साथ बारिश नहीं होती, तब तक गलन से राहत मिलने की उम्मीद कम है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें और हीटर या अंगीठी का प्रयोग करते समय वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखें ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।



