Uttarakhand Green Cess Policy: उत्तराखंड जाने वालों की जेब पर पड़ेगा बोझ, नए साल से लागू होगा भारी ग्रीन सेस
Uttarakhand Green Cess Policy: उत्तराखंड सरकार ने नए साल से राज्य की सीमाओं में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों पर ‘ग्रीन सेस’ लगाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना को (Environmental Tax Implementation) 1 जनवरी से प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य न केवल राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है, बल्कि पर्यटन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए संसाधन जुटाना भी है। मुख्यमंत्री ने इस योजना में हो रही देरी पर अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

किन्हें मिलेगी इस टैक्स से राहत?
ग्रीन सेस की इस नई नीति में कुछ श्रेणियों (Uttarakhand Green Cess Policy)को विशेष छूट प्रदान की गई है। अन्य राज्यों से आने वाले दोपहिया वाहन, ट्रैक्टर, एंबुलेंस और फायर टेंडर (Vehicle Tax Exemptions) के दायरे से बाहर रहेंगे। इसके अलावा, सेना के वाहन, शव वाहन और केंद्र या राज्य सरकार की आधिकारिक गाड़ियों को भी यह शुल्क नहीं देना होगा। पर्यावरण के अनुकूल चलने वाले वाहनों जैसे इलेक्ट्रिक कारों, सीएनजी और हाइब्रिड गाड़ियों को भी इस टैक्स से मुक्त रखा गया है ताकि लोग हरित ऊर्जा की ओर प्रोत्साहित हों।
वाहन श्रेणी के अनुसार निर्धारित दरें
ग्रीन सेस की दरें वाहन के आकार और भार के आधार पर तय की गई हैं। भारी मालवाहक वाहनों के लिए यह शुल्क 450 से 700 रुपये तक होगा, जबकि मध्यम श्रेणी के वाहनों (Commercial Vehicle Toll) से 120 से 250 रुपये लिए जाएंगे। छोटी पैसेंजर कारों, टैक्सी और मैक्सी कैब के लिए 80 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। सरकार ने लंबी अवधि के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए तीन महीने और एक वर्ष के पास की भी सुविधा दी है, जिसमें एकमुश्त भुगतान पर विशेष छूट मिलेगी।
फास्टैग के जरिए होगी डिजिटल वसूली
टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों से बचने के लिए उत्तराखंड सरकार ने इस वसूली को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। फास्टैग तकनीक (FASTag Digital Payment) का उपयोग करते हुए यह शुल्क सीधे वाहन मालिक के खाते से कट जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर 10 अत्याधुनिक बॉर्डर चेक पोस्ट तैयार किए गए हैं। प्रमुख मार्गों पर एपीएनआर कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों की पहचान कर स्वतः ही टैक्स काट लेंगे।
राजस्व का उपयोग और बुनियादी ढांचा
ग्रीन सेस से प्राप्त होने वाले लगभग 50 से 100 करोड़ रुपये के सालाना राजस्व का उपयोग राज्य के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण (Infrastructure Development Funding) कार्यों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कर चोरी रोकने के लिए एआई आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही, राजस्व की नियमित निगरानी के लिए जिलाधिकारियों को जवाबदेह बनाया गया है। इस पारदर्शी व्यवस्था से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।



